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पंचायत चुनाव में 12 हजार पद होंगे आरक्षित, महिलाओं को बड़ा मौका
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गोंडा। पंचायत चुनाव 18271 पदों पर होने हैं। इसमें 70 फीसदी से अधिक पदों के आरक्षित होने तय हैं। इस हिसाब से करीब 12 हजार पद आरक्षित होंगे। जिसमें महिलाओं के लिए ही चार हजार पद आरक्षित होंगे। अभी भले ही आरक्षण की नीति व तिथियां जारी न हुईं हैं लेकिन आरक्षण के लिए मानक तय हैं।
नई नीति तो होंगे लेकिन पदों के आरक्षण की स्थिति पुराने ही होंगे। प्रधान के पद सबसे अहम हैं, इसके लिए 1204 पदों पर चुनाव होने हैं। इसमें ही 800 प्रधान के पदों पर आरक्षण होना तय है। इसमें महिलाओं के लिए सबसे अधिक अवसर मिलेगा। त्रिस्तरीय पंचायतों के हर वर्ग के लिए आरक्षित होने वाले पदों में एक तिहाई पद महिलाओं के खाते में जाएंगे।
पंचायत चुनाव के लिए माना जा रहा है कि 20 फरवरी तक आरक्षण सूची जारी हो सकती है। नियमों के तहत 24 जून तक पंचायतों की कमान फिर प्रधानों के हाथ में सौंप देनी है। इसके अलावा हाईकोर्ट के फैसले के बाद माना जा रहा है कि अप्रैल में चुनाव होंगे।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां जोर शोर से हो रही हैं। प्रशासन, राजनीतिक दल, भावी उम्मीदवार और जनता सब अपने-अपने ढंग से तैयारी में जुटे हैं। इस बीच सभी को आरक्षण सूची जारी होने का इंतजार है।
जिले में आरक्षण की स्थित साफ होने पर बड़े स्तर पर महिलाओं केे चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा। वह अपने लिए आरक्षित पदों के साथ ही हर वर्ग के लिए तय पदों पर भी उसी वर्ग की महिलाएं भी चुनाव लड़ सकेंगी।
इस बार क्षेत्र व जिला पंचायत में चक्रानुक्रम आरक्षण पूरा होने पर नये सिरे से आरक्षण तय किया जा सकता है। वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायतों का चक्रानुक्रम आरक्षण शून्य कर के नये सिरे से आरक्षण तय किया गया गया था।
मगर पिछले पांच चुनावों से जिला व क्षेत्र पंचायत में चक्रानुक्रम आरक्षण ही चल रहा है। इसलिए जिला व क्षेत्र पंचायतों के सदस्यों की सीटों का आरक्षण नये सिरे से तय किया जा सकता है। जिला पंचायतों का आरक्षण राज्य मुख्यालय से तय होना है। ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत की सीटों का आरक्षण जिला मुख्यालय से ही तय किया जाएगा।
पंचायत के पदों के आरक्षण में पहले एसटी महिला, फिर एसटी महिला/पुरुष के लिए सीटें तय होनी हैं। जिले में इस वर्ग के लोगों के न होने से सीटें तय न नही होती है। एससी महिला, फिर एससी महिला/पुरुष के लिए सीटें तय करनी है।
सीटों में 21 फीसदी सीटें आरक्षित होंगी जिसमें एक तिहाई पद महिलाओं के तय की जाएंगी। लेकिन एससी के तय सीटों पर महिलाएं भी चुनाव लड़ सकेंगी। ऐसे ही ओबीसी के लिए 27 फीसदी पदों पर आरक्षण होगा, जिसमें एक तिहाई पद महिला, फिर शेष पदों पर ओबीसी महिला/पुरुष दोनों के लिए आरक्षित होंगे।
इससे महिलाओं का एक तिहाई आरक्षण पूरा न हो तो महिलाओं के लिए अनारक्षित में एक तिहाई पद आरक्षित होंगे। इसके बाद शेष पद अनारक्षित होंगे। जिसमें महिलाओं के साथ ही सभी वर्गों के लोग चुनाव लड़ सकेंगे।
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नई नीति तो होंगे लेकिन पदों के आरक्षण की स्थिति पुराने ही होंगे। प्रधान के पद सबसे अहम हैं, इसके लिए 1204 पदों पर चुनाव होने हैं। इसमें ही 800 प्रधान के पदों पर आरक्षण होना तय है। इसमें महिलाओं के लिए सबसे अधिक अवसर मिलेगा। त्रिस्तरीय पंचायतों के हर वर्ग के लिए आरक्षित होने वाले पदों में एक तिहाई पद महिलाओं के खाते में जाएंगे।
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पंचायत चुनाव के लिए माना जा रहा है कि 20 फरवरी तक आरक्षण सूची जारी हो सकती है। नियमों के तहत 24 जून तक पंचायतों की कमान फिर प्रधानों के हाथ में सौंप देनी है। इसके अलावा हाईकोर्ट के फैसले के बाद माना जा रहा है कि अप्रैल में चुनाव होंगे।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां जोर शोर से हो रही हैं। प्रशासन, राजनीतिक दल, भावी उम्मीदवार और जनता सब अपने-अपने ढंग से तैयारी में जुटे हैं। इस बीच सभी को आरक्षण सूची जारी होने का इंतजार है।
जिले में आरक्षण की स्थित साफ होने पर बड़े स्तर पर महिलाओं केे चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा। वह अपने लिए आरक्षित पदों के साथ ही हर वर्ग के लिए तय पदों पर भी उसी वर्ग की महिलाएं भी चुनाव लड़ सकेंगी।
इस बार क्षेत्र व जिला पंचायत में चक्रानुक्रम आरक्षण पूरा होने पर नये सिरे से आरक्षण तय किया जा सकता है। वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायतों का चक्रानुक्रम आरक्षण शून्य कर के नये सिरे से आरक्षण तय किया गया गया था।
मगर पिछले पांच चुनावों से जिला व क्षेत्र पंचायत में चक्रानुक्रम आरक्षण ही चल रहा है। इसलिए जिला व क्षेत्र पंचायतों के सदस्यों की सीटों का आरक्षण नये सिरे से तय किया जा सकता है। जिला पंचायतों का आरक्षण राज्य मुख्यालय से तय होना है। ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत की सीटों का आरक्षण जिला मुख्यालय से ही तय किया जाएगा।
पंचायत के पदों के आरक्षण में पहले एसटी महिला, फिर एसटी महिला/पुरुष के लिए सीटें तय होनी हैं। जिले में इस वर्ग के लोगों के न होने से सीटें तय न नही होती है। एससी महिला, फिर एससी महिला/पुरुष के लिए सीटें तय करनी है।
सीटों में 21 फीसदी सीटें आरक्षित होंगी जिसमें एक तिहाई पद महिलाओं के तय की जाएंगी। लेकिन एससी के तय सीटों पर महिलाएं भी चुनाव लड़ सकेंगी। ऐसे ही ओबीसी के लिए 27 फीसदी पदों पर आरक्षण होगा, जिसमें एक तिहाई पद महिला, फिर शेष पदों पर ओबीसी महिला/पुरुष दोनों के लिए आरक्षित होंगे।
इससे महिलाओं का एक तिहाई आरक्षण पूरा न हो तो महिलाओं के लिए अनारक्षित में एक तिहाई पद आरक्षित होंगे। इसके बाद शेष पद अनारक्षित होंगे। जिसमें महिलाओं के साथ ही सभी वर्गों के लोग चुनाव लड़ सकेंगे।