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मनरेगा में फर्जी काम दिखा निकाले 12.5 लाख
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गोंडा। तरबगंज के विशुनपुर गांव में बनी सड़क पर ही 12.57 लाख रुपये निकाल लिए गए। हद तो यहां तक हो गई अधिकारियों ने मौके को देखे बिना ही भुगतान करा दिया। मामले की जांच में खुलासा हुआ कि बनी सड़क को ही नया कार्य दिखाकर भुगतान ले लिया गया है। इसमें तत्कालीन खंड विकास अधिकारी राजाराम समेत तीन कर्मियों की मिलीभगत उजागर हुई। सीडीओ की रिपोर्ट पर जिलाधिकारी ने तत्कालीन खंड विकास अधिकारी समेत तीन कर्मियों के विरुद्ध एफआईआर के आदेश दिए हैं। जल्द ही एफआईआर दर्ज होगी और इस मामले में ब्लाक प्रमुख की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
तरबगंज ब्लॉक में मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आ चुके हैं। बीते दिनों 72 लाख रुपये से अधिक का बजट मनरेगा से निकलने के लिए हुई फर्जी फीडिंग के मामले में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी गिरजेश पांडेय की सेवा समाप्त की गई है। इसी बीच तरबगंज ब्लॉक के ही विशुनपुर गांव में चार परियोजना में फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आई। जांच शुरू हुई तो चौंकाने वाली बात सामने आई। सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) कार्यदायी संस्था की ओर से चारो परियोजना पर कार्य पहले ही दूसरी परियोजना से कराया जा चुका था। उन्हीं परियोजनाओं को मनरेगा से दिखाकर 12.57 लाख रुपये का बजट मनरेगा से निकाल लिये। इसमें तत्कालीन खंड विकास अधिकारी राजाराम, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी गिरजेश पांडेय व लेखाकार दोषी पाए गए। इन लोगों ने मिलीभगत करके भुगतान लिया गया। जिलाधिकारी ने इस मामले में एफआईआर के आदेश दिए हैं और देर सबेर मुकदमा दर्ज हो जाएगा।
ब्लॉक प्रमुख की भूमिका भी सवालों में, होगी कार्रवाई
तरबगंज के विशुनपुर गांव में फर्जी भुगतान के मामले में अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध तो कार्रवाई के आदेश हुए हैं। डीएम ने एफआईआर के आदेश दिए हैं लेकिन ब्लॉक प्रमुख मायावती भी कार्रवाई के दायरे में हैं। फिलहाल यहां प्रमुख का काम दूसरे लोग देखते हैं लेकिन प्रमुख की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भुगतान के मामले में प्रमुख की भूमिका भी सवालों से घिरी है।
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मनरेगा में अनियमित भुगतान के मामले में एफआईआर के आदेश दिए हैं। गलत भुगतान में कार्रवाई की जा रही है। -डॉ. नितिन बंसल, जिलाधिकारी
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तरबगंज ब्लॉक में मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आ चुके हैं। बीते दिनों 72 लाख रुपये से अधिक का बजट मनरेगा से निकलने के लिए हुई फर्जी फीडिंग के मामले में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी गिरजेश पांडेय की सेवा समाप्त की गई है। इसी बीच तरबगंज ब्लॉक के ही विशुनपुर गांव में चार परियोजना में फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आई। जांच शुरू हुई तो चौंकाने वाली बात सामने आई। सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) कार्यदायी संस्था की ओर से चारो परियोजना पर कार्य पहले ही दूसरी परियोजना से कराया जा चुका था। उन्हीं परियोजनाओं को मनरेगा से दिखाकर 12.57 लाख रुपये का बजट मनरेगा से निकाल लिये। इसमें तत्कालीन खंड विकास अधिकारी राजाराम, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी गिरजेश पांडेय व लेखाकार दोषी पाए गए। इन लोगों ने मिलीभगत करके भुगतान लिया गया। जिलाधिकारी ने इस मामले में एफआईआर के आदेश दिए हैं और देर सबेर मुकदमा दर्ज हो जाएगा।
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ब्लॉक प्रमुख की भूमिका भी सवालों में, होगी कार्रवाई
तरबगंज के विशुनपुर गांव में फर्जी भुगतान के मामले में अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध तो कार्रवाई के आदेश हुए हैं। डीएम ने एफआईआर के आदेश दिए हैं लेकिन ब्लॉक प्रमुख मायावती भी कार्रवाई के दायरे में हैं। फिलहाल यहां प्रमुख का काम दूसरे लोग देखते हैं लेकिन प्रमुख की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भुगतान के मामले में प्रमुख की भूमिका भी सवालों से घिरी है।
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मनरेगा में अनियमित भुगतान के मामले में एफआईआर के आदेश दिए हैं। गलत भुगतान में कार्रवाई की जा रही है। -डॉ. नितिन बंसल, जिलाधिकारी