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वित्तविहीन स्कूलों के 1086 शिक्षकों को लगा झटका
Amarujala
Updated Tue, 09 May 2017 11:20 PM IST
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वित्तविहीन स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को अब सरकार मानदेय नहीं देगी। सरकार के इस फैसले के बाद मानदेय पाने वाले जिले के 1086 शिक्षकों का भविष्य बनते-बनते बिगड़ गया है। सरकार के इस फैसले को वित्तविहीन शिक्षकों के साथ धोखा बताते हुए शिक्षक संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
सूबे की समाजवादी पार्टी की सरकार ने पिछले शैक्षिक सत्र में प्रदेश भर के वित्तविहीन स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों को मानदेय देने का फैसला किया था। इसके तहत इंटरमीडिएट के प्रधानाचार्य को 13090 रुपये प्रतिवर्ष, हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक को 1
1990 रुपये प्रतिवर्ष, इंटरमीडिएट के प्रवक्ता को 10890 व हाईस्कूल के सहायक अध्यापक को 9790 रुपये प्रतिवर्ष मानदेय देने का निर्णय हुआ था। सरकार ने पिछले सत्र में मानदेय के लिए जिले को 1.36 करोड़ रुपये जारी किए थे।
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पूर्ववर्ती सरकार के इस फैसले के बाद जिले के 168 वित्तविहीन स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों में उनके सुरक्षित भविष्य की आस जगी थी। शिक्षकों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए सरकार की सराहना भी की थी। विभिन्न जांचों के बाद 153 वित्तविहीन स्कूलों के 1086 शिक्षकों को मानदेय देने के लिए चयनित किया गया था।
इन शिक्षकों को छह-छह माह के अंतराल पर मानदेय की दो किश्तों का भुगतान भी कर दिया गया था। सूबे में नई सरकार के गठन के बाद वित्तविहीन शिक्षक मानदेय को बढ़ाने की मांग कर रहे थे। मानदेय बढ़ाने की मांग तो दूर सरकार ने इनके मानदेय पर ही अड़ंगा लगा दिया।
योगी सरकार ने हाल ही में अपने एक फैसले में वित्तवहीन स्कूलों के शिक्षकों को दिए जा रहे मानदेय को बंद कर दिया। अपने सुनहरे भविष्य की आस लगाए वित्तविहीन स्कूलों के 1086 शिक्षकों का मानदेय बंद होने पर इनके भविष्य पर ही सवालिया निशान लग गया है।
वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को मानदेय न देने के सरकार के फैसले के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जताई है। वित्तविहीन शिक्षक महासभा के मंडलीय मंत्री भोलानाथ मिश्रा ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे वित्तविहीन शिक्षकों के साथ धोख बताया है। भोलानाथ मिश्र का कहना है कि मानदेय मिलने के कारण इस बार वित्तविहीन शिक्षक मूल्यांकन कार्य में लगे थे लेकिन अब मूल्यांकन का काम करने के फैसले पर दोबारा किया जाएगा। वहीं महासभा के जिलाध्यक्ष रमेश मिश्रा ने सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
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सूबे की समाजवादी पार्टी की सरकार ने पिछले शैक्षिक सत्र में प्रदेश भर के वित्तविहीन स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों को मानदेय देने का फैसला किया था। इसके तहत इंटरमीडिएट के प्रधानाचार्य को 13090 रुपये प्रतिवर्ष, हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक को 1
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1990 रुपये प्रतिवर्ष, इंटरमीडिएट के प्रवक्ता को 10890 व हाईस्कूल के सहायक अध्यापक को 9790 रुपये प्रतिवर्ष मानदेय देने का निर्णय हुआ था। सरकार ने पिछले सत्र में मानदेय के लिए जिले को 1.36 करोड़ रुपये जारी किए थे।
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पूर्ववर्ती सरकार के इस फैसले के बाद जिले के 168 वित्तविहीन स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों में उनके सुरक्षित भविष्य की आस जगी थी। शिक्षकों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए सरकार की सराहना भी की थी। विभिन्न जांचों के बाद 153 वित्तविहीन स्कूलों के 1086 शिक्षकों को मानदेय देने के लिए चयनित किया गया था।
इन शिक्षकों को छह-छह माह के अंतराल पर मानदेय की दो किश्तों का भुगतान भी कर दिया गया था। सूबे में नई सरकार के गठन के बाद वित्तविहीन शिक्षक मानदेय को बढ़ाने की मांग कर रहे थे। मानदेय बढ़ाने की मांग तो दूर सरकार ने इनके मानदेय पर ही अड़ंगा लगा दिया।
योगी सरकार ने हाल ही में अपने एक फैसले में वित्तवहीन स्कूलों के शिक्षकों को दिए जा रहे मानदेय को बंद कर दिया। अपने सुनहरे भविष्य की आस लगाए वित्तविहीन स्कूलों के 1086 शिक्षकों का मानदेय बंद होने पर इनके भविष्य पर ही सवालिया निशान लग गया है।
वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को मानदेय न देने के सरकार के फैसले के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जताई है। वित्तविहीन शिक्षक महासभा के मंडलीय मंत्री भोलानाथ मिश्रा ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे वित्तविहीन शिक्षकों के साथ धोख बताया है। भोलानाथ मिश्र का कहना है कि मानदेय मिलने के कारण इस बार वित्तविहीन शिक्षक मूल्यांकन कार्य में लगे थे लेकिन अब मूल्यांकन का काम करने के फैसले पर दोबारा किया जाएगा। वहीं महासभा के जिलाध्यक्ष रमेश मिश्रा ने सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।