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शहर में नपाप की 64 अवैध दुकानों से नहीं हट सका कब्जा
Updated Wed, 17 Oct 2018 11:52 PM IST
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नगर पालिका की 64 दुकानों पर अवैध कब्जा
गोंडा। शहर के मनकापुर बस स्टाप रोड पर 64 दुकानों पर अवैध कब्जा है। नपाप व प्रशासन की ओर से कई बार कोशिश की गई, लेकिन सियासी दखल से अवैध कब्जा हट नहीं पाया।
इससे नपाप को लाखों के राजस्व का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुकानें वर्ष 1992 में फल व्यापारियों के लिए बनाई गई थी। 26 साल बीतने के बाद भी दुकानों का आवंटन नहीं हो पाया और न ही अवैध कब्जा ही खाली हुआ।
कई बार नगर मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर की टीम की ओर से कब्जा हटाने का प्रयास किया गया लेकिन वे खाली हाथ ही रहे। अब एक बार फिर इन दुकानों को लेकर प्रशासन गंभीर हुआ है।
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शहर में फल व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1992 में दुकानों का निर्माण कराया गया। योजना यह थी कि फल की दुकानें एक स्थान पर लगाई जाएं। जिससे फल व्यवसाय से जुड़े लोगों को रोजगार मिल सके और लोगों को एक ही स्थान पर कई तरह के फल मिल सके।
फल मंडी के नाम से यहां के स्थान को जाना भी जाता है। दुकानें तैयार होने के बाद से यहां आसपास के लोगों ने कब्जा कर लिया और अपना कार्य करने लगे। सदर के लेखपाल योगेन्द्र सिंह ने फल मंडी पर अवैध कब्जे की रिपोर्ट तहसील को दी थी।
उन्होंने बताया कि दुकानें बनी हैं और उन पर अवैध कब्जा की सूचना मिली थी। वर्ष 2014 में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर की टीम ने मौके पर जाकर जांच किया और अवैध कब्जेदारों की रिपोर्ट तैयार किया।
दुकानें उस समय 65 मिलीं थीं और 15 लोग अवैध कब्जेदार पाए गए थे। उस समय कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। बताया जा रहा है कि अभी भी दुकानों पर कब्जा है और आवंटन की कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दुकानों के आवंटन न होने से नपाप को हर साल 5 से 7 लाख रुपये के राजस्व के नुकसान होने की बात भी कही जा रही है। फिलहाल अब एक बार फिर इन दुकानों की छानबीन शुरु हुई है। अभी गोपनीय तरीके से प्रशासन सूची तैयार कर रहा है।
फल मंडी के दुकानों के बारे में जानकारी की जा रही है। पूरी रिपोर्ट मिलने पर ही कुछ कहा जा सकता है। मामला बहुत पुराना है, इससे जानकारी करने में वक्त लगेगा। अवैध कब्जे के मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।
-एसएन त्रिपाठी, उप जिलाधिकारी सदर
अवैध कब्जेके बारे में नपाप व तहसील से जानकारी की जाएगी। दुकानों के बारे में जो भी स्थिति होगी, उसकी रिपोर्ट मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
-सुभाष चन्द्र प्रजापति, नगर मजिस्ट्रेट
लाखों हुए खर्च पर नहीं हो सका उपयोग
व्यापारियों के लिए बनाई गईं दुकानों पर लाखों रुपए खर्च किया गया। विभाग के लोगों की मानें तो उस समय निर्माण पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किया। नपाप की ओर से इसका निर्माण कराया गया।
बाद में इसे छोड़ दिया गया। आवंटन की कार्रवाई कई सालों तक नहीं हुई। इससे लाखों खर्च के बाद भी इसका उपयोग नहीं हो सका। इसके पीछे मंशा थी कि किराए पर दुकानें दी जाएंगी और नपाप की आय होगी। अब तक नपाप का इससे लाखों का घाटा हुआ है।
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गोंडा। शहर के मनकापुर बस स्टाप रोड पर 64 दुकानों पर अवैध कब्जा है। नपाप व प्रशासन की ओर से कई बार कोशिश की गई, लेकिन सियासी दखल से अवैध कब्जा हट नहीं पाया।
इससे नपाप को लाखों के राजस्व का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुकानें वर्ष 1992 में फल व्यापारियों के लिए बनाई गई थी। 26 साल बीतने के बाद भी दुकानों का आवंटन नहीं हो पाया और न ही अवैध कब्जा ही खाली हुआ।
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कई बार नगर मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर की टीम की ओर से कब्जा हटाने का प्रयास किया गया लेकिन वे खाली हाथ ही रहे। अब एक बार फिर इन दुकानों को लेकर प्रशासन गंभीर हुआ है।
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शहर में फल व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1992 में दुकानों का निर्माण कराया गया। योजना यह थी कि फल की दुकानें एक स्थान पर लगाई जाएं। जिससे फल व्यवसाय से जुड़े लोगों को रोजगार मिल सके और लोगों को एक ही स्थान पर कई तरह के फल मिल सके।
फल मंडी के नाम से यहां के स्थान को जाना भी जाता है। दुकानें तैयार होने के बाद से यहां आसपास के लोगों ने कब्जा कर लिया और अपना कार्य करने लगे। सदर के लेखपाल योगेन्द्र सिंह ने फल मंडी पर अवैध कब्जे की रिपोर्ट तहसील को दी थी।
उन्होंने बताया कि दुकानें बनी हैं और उन पर अवैध कब्जा की सूचना मिली थी। वर्ष 2014 में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर की टीम ने मौके पर जाकर जांच किया और अवैध कब्जेदारों की रिपोर्ट तैयार किया।
दुकानें उस समय 65 मिलीं थीं और 15 लोग अवैध कब्जेदार पाए गए थे। उस समय कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। बताया जा रहा है कि अभी भी दुकानों पर कब्जा है और आवंटन की कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दुकानों के आवंटन न होने से नपाप को हर साल 5 से 7 लाख रुपये के राजस्व के नुकसान होने की बात भी कही जा रही है। फिलहाल अब एक बार फिर इन दुकानों की छानबीन शुरु हुई है। अभी गोपनीय तरीके से प्रशासन सूची तैयार कर रहा है।
फल मंडी के दुकानों के बारे में जानकारी की जा रही है। पूरी रिपोर्ट मिलने पर ही कुछ कहा जा सकता है। मामला बहुत पुराना है, इससे जानकारी करने में वक्त लगेगा। अवैध कब्जे के मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।
-एसएन त्रिपाठी, उप जिलाधिकारी सदर
अवैध कब्जेके बारे में नपाप व तहसील से जानकारी की जाएगी। दुकानों के बारे में जो भी स्थिति होगी, उसकी रिपोर्ट मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
-सुभाष चन्द्र प्रजापति, नगर मजिस्ट्रेट
लाखों हुए खर्च पर नहीं हो सका उपयोग
व्यापारियों के लिए बनाई गईं दुकानों पर लाखों रुपए खर्च किया गया। विभाग के लोगों की मानें तो उस समय निर्माण पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किया। नपाप की ओर से इसका निर्माण कराया गया।
बाद में इसे छोड़ दिया गया। आवंटन की कार्रवाई कई सालों तक नहीं हुई। इससे लाखों खर्च के बाद भी इसका उपयोग नहीं हो सका। इसके पीछे मंशा थी कि किराए पर दुकानें दी जाएंगी और नपाप की आय होगी। अब तक नपाप का इससे लाखों का घाटा हुआ है।