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शौचालय निर्माण में 10 लाख रुपये का घोटाला
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2015 11:09 PM IST
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स्वच्छता को प्रतीक मानकर निर्मल ग्राम योजना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। निर्मल गांव का पुरस्कार प्राप्त कर चुके कई गांवों की पोल पहले ही खुल चुकी है, लेकिन मुजेहना ब्लॉक के निर्मल ग्राम दुल्हापुर की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। बीते सप्ताह जब सीडीओ ने संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी व बीडीओ से जानकारी मांगी तो वे कोई जवाब नहीं दे सके।
इस गांव में दो साल पहले 202 शौचालयों के निर्माण के लिए 18 लाख रुपये से अधिक दिए गए, लेकिन मौके पर केवल 90 शौचालय ही बने हैं, वह भी आधे-अधूरे। इससे करीब 10 लाख रुपये का घोटाला सामने आया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुजेहना विकास खंड की दुल्हापुर ग्राम पंचायत को वित्तीय वर्ष 2013-14 में निर्मल ग्राम योजना के अंतर्गत चयनित किया गया। इस योजना के तहत शासन की तरफ से गांव में 202 शौचालय बनवाने की स्वीकृति दी गई थी।
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इसके लिए 18 लाख 38 हजार रुपये दिए गए। प्रत्येक शौचालय के निर्माण में कुल 10 हजार रुपये खर्च होने थे। इसमें 4600 रुपये ग्राम निधि के खाते से, 4500 रुपये मनरेगा से व 900 रुपये लाभार्थी को खुद खर्च करने थे। लेकिन दो वर्ष में करीब 90 लाभार्थी ही शौचालय का निर्माण करा सके। इसमें भी पूरी राशि न मिलने से अभी कई लोगों के शौचालय अधूरे पड़े हैं।
गांव के मजरा उजारी डिहवा निवासी बुधई का आरोप है कि उसे शौचालय निर्माण के लिए 4600 रुपये का चेक मिला था, लेकिन प्रधान व सचिव ने स्वयं निर्माण कराने की बात कहकर उससे पैसा ले लिया, मगर शौचालय नहीं बनवाया।
सरकारी धन के इस बंदरबांट को लेकर गांव के ही ओंकार मिश्रा ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से कर मामले की जांच कराने की मांग की थी। ओंकार का आरोप है कि उन्होेंने करीब आठ माह पूर्व गांव में बनवाए गए शौचालयों की प्रगति के संबंध में जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना भी मांगी थी, लेकिन उसे सूचना नहीं मिली। उल्टे उसे फर्जी तरीके से मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया गया।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि भगवानदीन व पंचायत सचिव मालिकराम ने आरोपों को निराधार बताया है। सचिव का कहना है कि जितने शौचालय का निर्माण हुआ है, उतना ही पैसा निकाला गया है। शेष राशि ग्राम निधि खाते में जमा है।
शिकायत मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी जयंत कुमार दीक्षित ने बीते शुक्रवार को जब पंचायत सचिव मालिकराम से शौचालय निर्माण की प्रगति रिपोर्ट तलब की तो मामले का खुलासा हुआ। सीडीओ ने पंचायत सचिव को फटकार लगाते हुए निर्माण संबंधी पूरी रिपोर्ट दो दिन के भीतर तलब की है।
सीडीओ का कहना है कि अगर सरकारी धन के दुरुपयोग की बात सामने आई तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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इस गांव में दो साल पहले 202 शौचालयों के निर्माण के लिए 18 लाख रुपये से अधिक दिए गए, लेकिन मौके पर केवल 90 शौचालय ही बने हैं, वह भी आधे-अधूरे। इससे करीब 10 लाख रुपये का घोटाला सामने आया है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुजेहना विकास खंड की दुल्हापुर ग्राम पंचायत को वित्तीय वर्ष 2013-14 में निर्मल ग्राम योजना के अंतर्गत चयनित किया गया। इस योजना के तहत शासन की तरफ से गांव में 202 शौचालय बनवाने की स्वीकृति दी गई थी।
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इसके लिए 18 लाख 38 हजार रुपये दिए गए। प्रत्येक शौचालय के निर्माण में कुल 10 हजार रुपये खर्च होने थे। इसमें 4600 रुपये ग्राम निधि के खाते से, 4500 रुपये मनरेगा से व 900 रुपये लाभार्थी को खुद खर्च करने थे। लेकिन दो वर्ष में करीब 90 लाभार्थी ही शौचालय का निर्माण करा सके। इसमें भी पूरी राशि न मिलने से अभी कई लोगों के शौचालय अधूरे पड़े हैं।
गांव के मजरा उजारी डिहवा निवासी बुधई का आरोप है कि उसे शौचालय निर्माण के लिए 4600 रुपये का चेक मिला था, लेकिन प्रधान व सचिव ने स्वयं निर्माण कराने की बात कहकर उससे पैसा ले लिया, मगर शौचालय नहीं बनवाया।
सरकारी धन के इस बंदरबांट को लेकर गांव के ही ओंकार मिश्रा ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से कर मामले की जांच कराने की मांग की थी। ओंकार का आरोप है कि उन्होेंने करीब आठ माह पूर्व गांव में बनवाए गए शौचालयों की प्रगति के संबंध में जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना भी मांगी थी, लेकिन उसे सूचना नहीं मिली। उल्टे उसे फर्जी तरीके से मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया गया।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि भगवानदीन व पंचायत सचिव मालिकराम ने आरोपों को निराधार बताया है। सचिव का कहना है कि जितने शौचालय का निर्माण हुआ है, उतना ही पैसा निकाला गया है। शेष राशि ग्राम निधि खाते में जमा है।
शिकायत मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी जयंत कुमार दीक्षित ने बीते शुक्रवार को जब पंचायत सचिव मालिकराम से शौचालय निर्माण की प्रगति रिपोर्ट तलब की तो मामले का खुलासा हुआ। सीडीओ ने पंचायत सचिव को फटकार लगाते हुए निर्माण संबंधी पूरी रिपोर्ट दो दिन के भीतर तलब की है।
सीडीओ का कहना है कि अगर सरकारी धन के दुरुपयोग की बात सामने आई तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।