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करेंगे जागरूक और शिक्षित, बनाएंगे सेहतमंद
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कुपोषण एवं एनीमिया की दर को कम करने और किशोर-किशोरियों एवं गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए हर वर्ष एक से 30 सितंबर के बीच राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाता है।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी डीके पांडेय ने कहा कि इस संबंध में शासन की ओर से आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। पांचवें राष्ट्रीय पोषण माह के आयोजन के संबंध में जिला स्तर पर स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं स्वच्छता संबंधी सेवाएं एवं इसके प्रति जागरूकता जनसमुदाय तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जन आंदोलन और सामुदायिक भागीदारी को सुदृढ़ किया जाएगा।
हर वर्ष विशेष थीम के आधार पर राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाता है। इस वर्ष प्रमुख रूप से चार थीम महिला एवं स्वास्थ्य, बच्चा एवं शिक्षा- पोषण भी पढ़ाई भी, जेंडर आधारित पेयजल संरक्षण एवं प्रबंधन तथा जनजातीय क्षेत्र में महिलाओं एवं बच्चों के लिए परंपरागत आहार निर्धारित की गई हैं। इसके तहत प्रतिदिन विभिन्न जन जागरूक गतिविधियां, कार्यक्रम, प्रतियोगिता आदि आयोजित होंगी। इनमें मुख्य रूप से बच्चों का वजन एवं ऊंचाई मापन, ग्राम स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा पोषण संदेशों पर आधारित नारा लेखन, गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों को चिन्हांकित कर उनके पोषण देखभाल संबंधित परिचर्चा होगी।
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महिला स्वास्थ्य विषय पर कार्यशाला तथा आंगनबाड़ी और स्कूल स्तर पर खेल-खेल में पोषण ज्ञान एवं स्वच्छता आदि के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। वही ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण विषय पर जागरूकता कार्यक्रम एवं रैली निकाली जाएगी। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
डीपीओ ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री की मन की बात में बच्चों, किशोर-किशरियों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को मोटे अनाज व पारंपरिक खाद्य समूहों के सेवन पर जोर दिया था। पोषण माह के दौरान प्रधानमंत्री के वक्तव्यों का विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा। इस माह स्वस्थ बालक प्रतियोगिता, गृह आधारित अन्नप्राशन व गोद भराई, पोषण प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के भी आयोजन होंगे।
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी डीके पांडेय ने कहा कि इस संबंध में शासन की ओर से आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। पांचवें राष्ट्रीय पोषण माह के आयोजन के संबंध में जिला स्तर पर स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं स्वच्छता संबंधी सेवाएं एवं इसके प्रति जागरूकता जनसमुदाय तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जन आंदोलन और सामुदायिक भागीदारी को सुदृढ़ किया जाएगा।
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हर वर्ष विशेष थीम के आधार पर राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाता है। इस वर्ष प्रमुख रूप से चार थीम महिला एवं स्वास्थ्य, बच्चा एवं शिक्षा- पोषण भी पढ़ाई भी, जेंडर आधारित पेयजल संरक्षण एवं प्रबंधन तथा जनजातीय क्षेत्र में महिलाओं एवं बच्चों के लिए परंपरागत आहार निर्धारित की गई हैं। इसके तहत प्रतिदिन विभिन्न जन जागरूक गतिविधियां, कार्यक्रम, प्रतियोगिता आदि आयोजित होंगी। इनमें मुख्य रूप से बच्चों का वजन एवं ऊंचाई मापन, ग्राम स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा पोषण संदेशों पर आधारित नारा लेखन, गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों को चिन्हांकित कर उनके पोषण देखभाल संबंधित परिचर्चा होगी।
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महिला स्वास्थ्य विषय पर कार्यशाला तथा आंगनबाड़ी और स्कूल स्तर पर खेल-खेल में पोषण ज्ञान एवं स्वच्छता आदि के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। वही ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण विषय पर जागरूकता कार्यक्रम एवं रैली निकाली जाएगी। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
डीपीओ ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री की मन की बात में बच्चों, किशोर-किशरियों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को मोटे अनाज व पारंपरिक खाद्य समूहों के सेवन पर जोर दिया था। पोषण माह के दौरान प्रधानमंत्री के वक्तव्यों का विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा। इस माह स्वस्थ बालक प्रतियोगिता, गृह आधारित अन्नप्राशन व गोद भराई, पोषण प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के भी आयोजन होंगे।