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Ghazipur News: जब शेरपुर में घुसी अंग्रेजी फौज, लाठी-भाला लेकर डट गए थे ग्रामीण

Sat, 29 Aug 2026 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2026 12:27 AM IST
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When the British army entered Sherpur, villagers stood their ground armed with lathis and spears.
शेरपुर में अमर शहीद ​शिवपूजन राय की प्रतिमा का ​शिलापट्ट-संवाद
भांवरकोल। 29 अगस्त 1942... गाजीपुर के शेरपुर गांव में अंग्रेजी हुकूमत के तांडव और ग्रामीणों के अदम्य साहस की वह तारीख, जिसे इतिहास कभी भुला नहीं सकता।
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इस बाबत जिले के शिक्षाविद् व इतिहासकार डॉक्टर राम अवतार यादव ने अपनी जनपद गाजीपुर एक अध्ययन नामक पुस्तक में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जिले में घटित घटनाओं का विस्तृत वर्णन किया है।
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उन्होंने बताया कि 18 अगस्त को मुहम्मदाबाद तहसील मुख्यालय पर तिरंगा फहराने के दौरान शेरपुर के आठ क्रांतिकारियों के बलिदान के महज 11 दिन बाद अंग्रेजी फौज ने गांव में धावा बोल दिया था। बलिदानियों के श्राद्ध कर्म में जुटे ग्रामीणों को डराने, गांव में लूटपाट करने और आंदोलन को कुचलने की कोशिश की गई, लेकिन आजादी के दीवानों का हौसला नहीं टूटा।
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श्री हनुमान मंदिर के पूरब स्थित बाग में बलिदानियों का श्राद्ध कर्म चल रहा था। इसी दौरान बड़ी नावों के सहारे अंग्रेजी फौज गांव के करीब पहुंची। चारों ओर पानी होने के कारण सैनिकों को गांव में प्रवेश करने में मुश्किल हो रही थी। ग्रामीण भी भाला, लाठी-डंडे और तलवार लेकर मुकाबले के लिए डट गए। चारों ओर भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे गूंज रहे थे।
बताया जाता है कि एक अंग्रेज अधिकारी हाथी पर सवार होकर पानी के रास्ते गांव में घुसने का प्रयास करने लगा, लेकिन अढ़ार नाले के तेज बहाव में बह गया। इससे अंग्रेजी फौज सहम गई। बाद में एक ग्रामीण को पानी से गुजरते देख सैनिकों को गांव में दाखिल होने का रास्ता मिल गया।

गांव में प्रवेश करते ही अंग्रेज सैनिकों ने लूटपाट और तांडव शुरू कर दिया। रमाशंकर लाल ने वीरता दिखाते हुए सैनिकों को खदेड़ने का प्रयास किया और गोली लगने से बलिदान हो गए। खेदन यादव और राधिका पांडेय ने भी मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
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