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कल याद किए जाएंगे वीर अब्दुल हमीद
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Tue, 08 Sep 2015 10:59 PM IST
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अपनी बहादुरी से दुश्मनों को छक्के छुड़ाने वाले परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का शहादत दिवस 10 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दौरान विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पिछले कई दिनों से कार्यक्रम तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है। धामूपुर स्थित हमीद पार्क की साफ-सफाई के साथ ही रंगाई-पुताई का काम किया जा रहा है। अतिथियों के बैठने के लिए नया टीनशेड और वाटरप्रूफ तिरपाल लगाया जा रहा है।
1965 में भारत-पाक के युद्ध में हमीद ने पाक सेना से चीन निर्मित तीन पैर्टन टैंकों को नष्ट कर ते हुए शहीद हाे गए थे। इसके बाद भारत सरकार ने उन्हें परमवीर चक्र से नवाजा था।
जनपद के जखनिया ब्लाक मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर उत्तर-पूर्व और दुल्लहपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किलोमीटर पूरब में स्थित धामूपुर गांव में परमवीर चक्र विजेता हवलदार अब्दुल हमीद का जन्म एक गरीब परिवार उस्मान खां दर्जी के घर 1 जुलाई 1933 को हुआ था। उन्हें बचपन से ही सेना में भर्ती होने का शौक था। गरीबी से जूझते हुए हमीद 22 दिसंबर 1954 को बनारस जाकर फौज में भर्ती हो गए।
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सन 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया। कंकरीली-पथरीली जमीन पर बीच भूखे-प्यासे, बच-बचाकर चलते हुए वह एक दिन तेजपुर नामक बस्ती में पहुंच गए। इस मोर्चे की बहादुरी ने उन्हें जवान की जगह लांस नायक अब्दुल हमीद बना दिया।
12 मार्च 1962 के बाद उन्हें 3 वर्षों के अंदर ही नायक, हवलदार, कंपनी क्वार्टर मास्टर की उपाधि हासिल हो गई। सन 1965 में जब पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया। 17 सितंबर 1965 को भारत-पाक के बीच घमासान लड़ाई जारी थी। पाकिस्तान को अपने पैटर्न टैकों पर बड़ा नाज था। ये टैंक भारत की सीमा में घुसते जा रहे थे। यह देख अब्दुल हमीद का खून खौल उठा देखते ही देखते तीन टैंक ध्वस्त हो गए। सीने में गोली लगने से अब्दुल हमीद वीर गति को प्राप्त हो गए।
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1965 में भारत-पाक के युद्ध में हमीद ने पाक सेना से चीन निर्मित तीन पैर्टन टैंकों को नष्ट कर ते हुए शहीद हाे गए थे। इसके बाद भारत सरकार ने उन्हें परमवीर चक्र से नवाजा था।
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जनपद के जखनिया ब्लाक मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर उत्तर-पूर्व और दुल्लहपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किलोमीटर पूरब में स्थित धामूपुर गांव में परमवीर चक्र विजेता हवलदार अब्दुल हमीद का जन्म एक गरीब परिवार उस्मान खां दर्जी के घर 1 जुलाई 1933 को हुआ था। उन्हें बचपन से ही सेना में भर्ती होने का शौक था। गरीबी से जूझते हुए हमीद 22 दिसंबर 1954 को बनारस जाकर फौज में भर्ती हो गए।
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सन 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया। कंकरीली-पथरीली जमीन पर बीच भूखे-प्यासे, बच-बचाकर चलते हुए वह एक दिन तेजपुर नामक बस्ती में पहुंच गए। इस मोर्चे की बहादुरी ने उन्हें जवान की जगह लांस नायक अब्दुल हमीद बना दिया।
12 मार्च 1962 के बाद उन्हें 3 वर्षों के अंदर ही नायक, हवलदार, कंपनी क्वार्टर मास्टर की उपाधि हासिल हो गई। सन 1965 में जब पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया। 17 सितंबर 1965 को भारत-पाक के बीच घमासान लड़ाई जारी थी। पाकिस्तान को अपने पैटर्न टैकों पर बड़ा नाज था। ये टैंक भारत की सीमा में घुसते जा रहे थे। यह देख अब्दुल हमीद का खून खौल उठा देखते ही देखते तीन टैंक ध्वस्त हो गए। सीने में गोली लगने से अब्दुल हमीद वीर गति को प्राप्त हो गए।