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Ghazipur News: जिले में जितने पंजीकृत, उसके तीन गुना बिना रजिस्ट्रेशन वाले अस्पताल
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गाजीपुर। जिले में पंजीकृत निजी अस्पतालों से तीनगुना बिना रजिस्ट्रेशन अस्पतालों का संचालन हो रहा है। इस समय पंजीकृत अस्पतालों की संख्या 112 है, जबकि अवैध का आंकड़ा करीब 300 के पार है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जांच के लिए अधिकारियों की कोई टीम नहीं बनी है, कार्रवाई के लिए सिर्फ उन इलाकों के सीएचसी प्रभारियों पर ही स्वास्थ्य विभाग निर्भर है। ऐसे में प्रत्येक महीने जांच और कार्रवाई की सिलसिला बंद है। कभी कभार दिशा- निर्देश पर जिम्मेदारों की तंद्रा टूटती है। कार्रवाई और मुकदमा दर्ज होने के कुछ महीने बाद मामला ठंडा होने पर झोलाछाप ग्रामीण इलाकों में दो से तीन रूम का मकान किराये पर लेकर धंधा शुरू कर देते हैं। बोर्ड हटा देते हैं, ताकि अस्पताल संचालन की जानकारी हो सके। ऐसे में अवैध अस्पतालों का खुलासा तब होता है, जब वहां किसी मरीज की मौत हो जाती है। पूर्व में तत्कालीन डीएम आर्यका अखौरी ने ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए तहसील स्तर पर टीम का गठन करके एसडीएम के अगुवाई में जांच का अभियान छेड़ा था। इस दौरान अवैध रूप से अस्पताल का संचालन करने वालों में खलबली मची थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग करीब छह महीने से जांच प्रक्रिया को लेकर निष्क्रिय है, ऐसे में अवैध अस्पतालों का संचालन करने वाले झोलाछापों का धंधा फल- फूल रहा है।
पीड़ित परिजनों की शिकायत पर जांच कर कार्रवाई करने की जाती है। हालांकि कुछ मामले की शिकायत नहीं मिलती है। ऐसे में कार्रवाई में दिक्कत आती है। हालांकि जिन इलाकों में अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए उस इलाके में स्थित सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है। - डा. एसके पांडेय, सीएमओ गाजीपुर।
केस एक-कासिमाबाद कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 2023 में एक प्रसूता की मौत हो गई थी। पीड़ित परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ। कुछ दिन बाद संचालक दूसरे इलाके में बिना बोर्ड के अवैध अस्पताल संचालन करना शुरू कर दिया।
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केस दो-करीब चार वर्ष पूर्व कासिमाबाद के एक निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत हो गई थी। परिजनों द्वारा हंगामा और बवाल के बाद कार्रवाई हुई। इसके बाद संचालक अब जनपद से सटे दूसरे जनपद में अवैध रूप से अस्पताल का संचालन कर रहा है।
केस तीन-वर्ष 2024 में सैदपुर के एक निजी अस्पताल में जच्चा- बच्चा दोनों की मौत हो गई थी। इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को सीज की कार्रवाई। संचालक ने सीज अस्पताल को न्यायालय के आदेश पर खोलवा कर संचालन शुरू कर दिया।
केस चार-दिलदारनगर थाना क्षेत्र के निजी अस्पताल में प्रसूता और नवजात की मौत हो गई। घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी अस्पताल का धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। यहीं इस इलाके में ऐसे कई अस्पताल हैं, जो नाम बदलकर संचालन हो रहे हैं।
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पीड़ित परिजनों की शिकायत पर जांच कर कार्रवाई करने की जाती है। हालांकि कुछ मामले की शिकायत नहीं मिलती है। ऐसे में कार्रवाई में दिक्कत आती है। हालांकि जिन इलाकों में अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए उस इलाके में स्थित सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है। - डा. एसके पांडेय, सीएमओ गाजीपुर।
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केस एक-कासिमाबाद कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 2023 में एक प्रसूता की मौत हो गई थी। पीड़ित परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ। कुछ दिन बाद संचालक दूसरे इलाके में बिना बोर्ड के अवैध अस्पताल संचालन करना शुरू कर दिया।
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केस दो-करीब चार वर्ष पूर्व कासिमाबाद के एक निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत हो गई थी। परिजनों द्वारा हंगामा और बवाल के बाद कार्रवाई हुई। इसके बाद संचालक अब जनपद से सटे दूसरे जनपद में अवैध रूप से अस्पताल का संचालन कर रहा है।
केस तीन-वर्ष 2024 में सैदपुर के एक निजी अस्पताल में जच्चा- बच्चा दोनों की मौत हो गई थी। इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को सीज की कार्रवाई। संचालक ने सीज अस्पताल को न्यायालय के आदेश पर खोलवा कर संचालन शुरू कर दिया।
केस चार-दिलदारनगर थाना क्षेत्र के निजी अस्पताल में प्रसूता और नवजात की मौत हो गई। घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी अस्पताल का धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। यहीं इस इलाके में ऐसे कई अस्पताल हैं, जो नाम बदलकर संचालन हो रहे हैं।