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गाजीपुर: पैटन टैंकों की कब्रगाह बनाने वाले वीर अब्दुल हमीद की धरती पर गूंजेगा शौर्य का जयघोष

Wed, 09 Sep 2026 11:15 PM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Wed, 09 Sep 2026 11:15 PM IST
सार

परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद की धरती पर आज शौर्य का जयघोष गूंजेगा। उन्होंने असल उत्तर की जंग में दुश्मन के पैटन टैंकों को ध्वस्त कर भारतीय सैन्य इतिहास में वीरता की अमर गाथा लिख दी थी। 
 

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triumphant call of valor will resound across land of brave Abdul Hamid
परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वर्ष 1965...पाकिस्तान के पैटन टैंकों का खौफ और सीमा पर दुश्मन की बढ़ती चुनौती। इसी बीच एक भारतीय सैनिक ने अपनी अदम्य हिम्मत से ऐसा इतिहास रचा, जिसे देश आज भी गर्व से याद करता है। धामूपुर की धरती के लाल परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद ने असल उत्तर की जंग में दुश्मन के पैटन टैंकों को ध्वस्त कर भारतीय सैन्य इतिहास में वीरता की अमर गाथा लिख दी थी। 10 सितंबर को उनके 61वें बलिदान दिवस पर धामूपुर में एक बार फिर उसी शौर्य को नमन किया जाएगा।
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वीर अब्दुल हमीद मेमोरियल पार्क में बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजे से भव्य कार्यक्रम आयोजित होगा। इस अवसर पर भारत के प्रथम 21 परमवीर चक्र विजेताओं की स्मृति में बनने वाले स्मारक का शिलान्यास किया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव के शामिल होने की जानकारी उनके पौत्र जमील आलम द्वारा दी गई है।
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जीप पर सवार होकर टैंकों को दी थी चुनौती

एक जुलाई 1933 को जन्मे अब्दुल हमीद भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट की चौथी बटालियन का हिस्सा थे। पांच वर्ष तक एंटी टैंक सेक्शन में सेवा देने के बाद उन्हें कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार बनाया गया। 106 एमएम रिकॉइललेस राइफल पर उनकी बेहतरीन पकड़ को देखते हुए उन्हें रिकॉइललेस राइफल प्लाटून की कमान दी गई।
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1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पंजाब के खेमकरण क्षेत्र के असल उत्तर में पाकिस्तानी सेना के पैटन टैंकों ने मोर्चा संभाला था। उस समय पैटन टैंकों को बेहद शक्तिशाली माना जाता था। अब्दुल हमीद ने अपनी सैन्य जीप से मोर्चा संभालते हुए दुश्मन के टैंकों को निशाना बनाया।

उनके साथियों के मुताबिक उन्होंने कई पैटन टैंकों को ध्वस्त किया। लगातार हमले के बावजूद वह पीछे नहीं हटे और अंततः 10 सितंबर 1965 को दुश्मन की फायरिंग की चपेट में आकर वीरगति को प्राप्त हुए। उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी वीरता के कारण उन्हें ‘टैंक डिस्ट्रॉयर’ के नाम से भी याद किया जाता है।

असल उत्तर और अब्दुल हमीद की वीरता एक-दूसरे के पर्याय
1965 की जंग में असल उत्तर की लड़ाई ने पाकिस्तानी सेना के टैंकों के अभेद्य होने के दावे को तोड़ दिया था। इसी युद्ध में अब्दुल हमीद और उनके साथियों ने पैटन टैंकों के खिलाफ मोर्चा संभाला। यही वजह है कि असल उत्तर का नाम लेते ही वीर अब्दुल हमीद की शौर्यगाथा याद आती है।

अखबार की खबर से मिली थी शहादत की सूचना
वीर अब्दुल हमीद की शहादत की खबर परिवार तक भी तत्काल नहीं पहुंच सकी थी। उनके पौत्र जमील आलम के अनुसार, 19 सितंबर 1965 को अखबार में प्रकाशित खबर के माध्यम से परिवार को उनकी शहादत की जानकारी मिली थी। खबर पढ़कर परिजनों की आंखों में आंसू आ गए थे। उनकी पत्नी रसूलन बीवी भी यह समझते ही बुरी तरह रो पड़ी थीं। आज भी धामूपुर ही नहीं, पूरा देश उनकी शहादत पर गर्व करता है।
आज शहीद की धरती पर जुटेंगे देशभर के वीरता-प्रेमी

61वें बलिदान दिवस का आयोजन इस बार विशेष महत्व रखता है। शहीद अब्दुल हमीद की स्मृति में होने वाले कार्यक्रम के साथ ही 21 परमवीर चक्र विजेताओं की स्मृति में प्रस्तावित स्मारक का शिलान्यास होगा। कार्यक्रम में क्षेत्रीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों के बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है।

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर प्रशासन और पुलिस स्तर पर भी तैयारी की जा रही है। शहीद के पौत्र एवं द लीजेंड वीर अब्दुल हमीद ट्रस्ट के अध्यक्ष जमील आलम ने कार्यक्रम की जानकारी दी। कार्यक्रम के संरक्षक शहीद वीर अब्दुल हमीद के पुत्र जुनेद आलम हैं। केंद्रीय मंत्रियों के आगमन को लेकर सुरक्षा और प्रोटोकॉल संबंधी जानकारी दुल्लहपुर थानाध्यक्ष दीपक कुमार की ओर से दी गई है। 

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