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गंगा के जलस्तर में बढ़ाव और बारिश से परेशानियों के बादल गहराए
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जनपद में पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के साथ फिर से गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी दर्ज हो रही है। मंगलवार को गंगा में बढ़ाव की रफ्तार तीन सेमी प्रतिघंटे दर्ज की गई । दोपहर तीन बजे तक जलस्तर 59.230 मीटर दर्ज किया गया। जबकि खतरा बिंदु 63.105 मीटर है। जलस्तर में बढ़ोत्तरी से तटवर्ती इलाके के लोगों को एक बार फिर बाढ़ का डर सताने लगा है। मंगलवार की दोपहर को भी कुछ देर के लिए बौछारें पड़ीं।
केंद्रीय जल आयोग के प्रभारी मेराजुद्दीन ने बताया कि प्रयागराज और वाराणसी में गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी दर्ज हो रही है। इस लिहाज से जनपद में भी गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी बनी रहेगी। पिछले दिनों बारिश और डैम से पानी छोड़े जाने से गंगा में बढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में कई दिनों से लगातार बारिश भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
पिेछले दिनों से हो रहे बारिश मंगलवार को भी जारी रही। ये धान के लिए तो फायदेमंद रही लेकिन आलू, मिर्च व टमाटर की खंती करने वालों के लिए मुसीबत बनी। क्योंकि खेत गीला होने से खेती पिछड़ती जा रही है। वहीं, दिन भर आसमान में बादल और धूप का लुकाछिपी होने से दिन का तापमान भी बढ़ा रहा।
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कृषि विज्ञान केंद्र पीजी कॉलेज से मिले पांच दिनों के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, घने बादल छाए रहने की संभावना के साथ हल्की से मध्यम बारिश होती रहेगी। अधिकतम तापमान 29 से 34 डिग्री सेंटीग्रेड व न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहने के साथ पूर्वी हवा औसत 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा से चलने की संभावना है।
कृषि व मौसम विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा ने बताया गया कि वर्षा की संभावना को देखते हुए किसान खड़ी फसलों में फिलहाल सिंचाई रोक दें और फसलों में कीटनाशी दवाओं का छिड़काव सावधानीपूर्वक आसमान साफ होने पर ही करें। साथ ही बेल वाली सब्जियों की फसलों में फल पर लगने वाली मक्खी और कीट की निगरानी करें। फिलहाल मौसम नमीयुक्त और गर्म है जो कीटों के लिए अनुकूल है। ऐसे मौसम में भिंडी, मूंग की फसलों में पीला मोजेक कीट की निगरानी करें। रोगग्रस्त पौधों को उखाड़ कर अलग कर दें।
इस दौरान गर्भित पशु की उचित देखभाल करने के साथ पौष्टिक चारा दें। पशुशाला को साफ-सुथरा व सूखा रखें। उसके आस-पास पानी न जमा होने दें। मच्छरों से बचाव के लिए पशुशाला के पास नीम की पत्ती का धुआं करें। लंपी स्किन बीमारी गाय और भैसों का विषाणु जनित रोग है। इस बीमारी से संक्रमित पशु कमजोर हो जाता है और दूसरी बीमारियों से भी संक्रमित हो जाता है। इसलिए किसान पशुओं की समय से निगरानी करें।
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केंद्रीय जल आयोग के प्रभारी मेराजुद्दीन ने बताया कि प्रयागराज और वाराणसी में गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी दर्ज हो रही है। इस लिहाज से जनपद में भी गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी बनी रहेगी। पिछले दिनों बारिश और डैम से पानी छोड़े जाने से गंगा में बढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में कई दिनों से लगातार बारिश भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
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पिेछले दिनों से हो रहे बारिश मंगलवार को भी जारी रही। ये धान के लिए तो फायदेमंद रही लेकिन आलू, मिर्च व टमाटर की खंती करने वालों के लिए मुसीबत बनी। क्योंकि खेत गीला होने से खेती पिछड़ती जा रही है। वहीं, दिन भर आसमान में बादल और धूप का लुकाछिपी होने से दिन का तापमान भी बढ़ा रहा।
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कृषि विज्ञान केंद्र पीजी कॉलेज से मिले पांच दिनों के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, घने बादल छाए रहने की संभावना के साथ हल्की से मध्यम बारिश होती रहेगी। अधिकतम तापमान 29 से 34 डिग्री सेंटीग्रेड व न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहने के साथ पूर्वी हवा औसत 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा से चलने की संभावना है।
कृषि व मौसम विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा ने बताया गया कि वर्षा की संभावना को देखते हुए किसान खड़ी फसलों में फिलहाल सिंचाई रोक दें और फसलों में कीटनाशी दवाओं का छिड़काव सावधानीपूर्वक आसमान साफ होने पर ही करें। साथ ही बेल वाली सब्जियों की फसलों में फल पर लगने वाली मक्खी और कीट की निगरानी करें। फिलहाल मौसम नमीयुक्त और गर्म है जो कीटों के लिए अनुकूल है। ऐसे मौसम में भिंडी, मूंग की फसलों में पीला मोजेक कीट की निगरानी करें। रोगग्रस्त पौधों को उखाड़ कर अलग कर दें।
इस दौरान गर्भित पशु की उचित देखभाल करने के साथ पौष्टिक चारा दें। पशुशाला को साफ-सुथरा व सूखा रखें। उसके आस-पास पानी न जमा होने दें। मच्छरों से बचाव के लिए पशुशाला के पास नीम की पत्ती का धुआं करें। लंपी स्किन बीमारी गाय और भैसों का विषाणु जनित रोग है। इस बीमारी से संक्रमित पशु कमजोर हो जाता है और दूसरी बीमारियों से भी संक्रमित हो जाता है। इसलिए किसान पशुओं की समय से निगरानी करें।