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राजमार्ग पर चलना दुश्वार, बजट बैंक में
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Tue, 17 May 2016 11:38 PM IST
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राष्ट्रीय राजमार्ग का हाल
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लखनऊ से पटना जा रही शीशे से लदी ट्रक मंगलवार को बारा गांव में पहुंचते ही खराब हो गई। वाराणसी के व्यवसायी शोएब अहमद ने बनारस से क्रेन भेजकर किसी तरह दूसरे ट्रक से माल भिजवाया। यह इकलौती घटना नहीं है। ताड़ीघाट-बारा मार्ग का हाल ही कुछ ऐसा ही यहां फर्राटा भरने वाले वाहन भी रेंगने लगते हैं।
इस बदहाल सड़क के बड़े-बड़े गड्ढों के चलते वाहनों की रफ्तार ही थम जाती है और अक्सर उनके पत्ते और गुल्ले टूटते रहते हैं।यह स्थिति तब है जबकि सरकार ने सड़क बनाने के लिए पिछले साल ही 233 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे।
बिहार से उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली इस सड़क के जरिए रोजाना हजारों वाहन माल लेकर जाते हैं। उनको बिहार और यूपी के अन्य हिस्सों की सड़कों पर चलने में शायद ही उतनी कठिनाई होती है, जितनी इस 39 किमी लंबी सड़क पर। सूबे के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह के इलाके की इस सड़क को बनाने में सरकारी महकमा जरा भी तत्परता नहीं दिखा रहा है।
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रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करवा दिया लेकिन निर्माण कार्य कागज पर ही हो रहा है। ताड़ीघाट से बारा जाने के लिए वर्ष 1974 में सड़क बनी थी। उस समय समय गंगा पर हमीद सेतु नहीं था। लिहाजा लोग ताड़ीघाट से स्टीमर से गाजीपुर जाते थे। तब इस पर भारी वाहन नहीं चलते थे। पुल बनने के बाद भारी वाहन भी चलने लगे और बारा, गहमर, भदौरा, नवली, रेवतीपुर, सुहवल क्षेत्र लोगों को जिला मुख्यालय जाने में सुविधा हो गई।
भदौरा जाने वाले उतरौली और नवली गांव के सड़क का सहारा लेना पड़ता है। ताड़ीघाट-बारा मार्ग के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार ने बीते वर्ष 233 करोड़ रुपये जारी किए थे। मार्ग को चौड़ा करने के लिए सड़क के किनारे स्थित पेड़ों की कटाई भी जुलाई माह में वन विभाग ने शुरू कर दी। वन विभाग के क्षेत्रीय वन अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि मार्ग पर 3635 पेड़ है, जिनमें आधे काट दिए गए हैं।
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इस बदहाल सड़क के बड़े-बड़े गड्ढों के चलते वाहनों की रफ्तार ही थम जाती है और अक्सर उनके पत्ते और गुल्ले टूटते रहते हैं।यह स्थिति तब है जबकि सरकार ने सड़क बनाने के लिए पिछले साल ही 233 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे।
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बिहार से उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली इस सड़क के जरिए रोजाना हजारों वाहन माल लेकर जाते हैं। उनको बिहार और यूपी के अन्य हिस्सों की सड़कों पर चलने में शायद ही उतनी कठिनाई होती है, जितनी इस 39 किमी लंबी सड़क पर। सूबे के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह के इलाके की इस सड़क को बनाने में सरकारी महकमा जरा भी तत्परता नहीं दिखा रहा है।
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रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करवा दिया लेकिन निर्माण कार्य कागज पर ही हो रहा है। ताड़ीघाट से बारा जाने के लिए वर्ष 1974 में सड़क बनी थी। उस समय समय गंगा पर हमीद सेतु नहीं था। लिहाजा लोग ताड़ीघाट से स्टीमर से गाजीपुर जाते थे। तब इस पर भारी वाहन नहीं चलते थे। पुल बनने के बाद भारी वाहन भी चलने लगे और बारा, गहमर, भदौरा, नवली, रेवतीपुर, सुहवल क्षेत्र लोगों को जिला मुख्यालय जाने में सुविधा हो गई।
भदौरा जाने वाले उतरौली और नवली गांव के सड़क का सहारा लेना पड़ता है। ताड़ीघाट-बारा मार्ग के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार ने बीते वर्ष 233 करोड़ रुपये जारी किए थे। मार्ग को चौड़ा करने के लिए सड़क के किनारे स्थित पेड़ों की कटाई भी जुलाई माह में वन विभाग ने शुरू कर दी। वन विभाग के क्षेत्रीय वन अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि मार्ग पर 3635 पेड़ है, जिनमें आधे काट दिए गए हैं।