सैदपुर। बीते गुरुवार को मुुंबई में संदिग्ध अवस्था में गोली लगने से मृत भारतीय नौसेना के जवान अखिलेश यादव का पार्थिव शरीर पैतृक गांव नारायनपुर ककहरी शनिवार की शाम आते ही कोहराम मच गया। परिवार के लोग चीख-पुकार करने लगे। पार्थिव शरीर के साथ आए जीटीसी-39 बटालियन के जवानों ने दरवाजा पर जवान को सलामी दी। इसके बाद सैदपुर नगर स्थित पक्का घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
मालूम हो कि नारायनपुर ककरही गांव निवासी किसान लालजी यादव के तीन पुत्रों में मझला पुत्र अखिलेश यादव इंडियन नेवी में कार्यरत था। उसकी ड्यूटी मुंबई में आईएनएस आंग्रे पर थी। इसी दौरान संदिग्ध अवस्था में बीते गुरुवार को उन्हें गोली लग गई थी। उन्हें नौसेना के अस्पताल आईएनएचएस अश्विनी में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। सूचना आते ही घर में कोहराम मच गया था। बड़े भाई रामाश्रय यादव, छोटे भाई राकेश यादव, पिता लालजी यादव, बहन अनीता एवं रिंकू चीख-पुकार करने लगे थे। शनिवार की देर शाम जीटीसी-39 बटालियन के जवान पार्थिव शरीर लेकर जैसे ही घर पहुंचे, कोहराम मच गया। पार्थिव शरीर के साथ आए जीटीसी-39 बटालियन के जवानों ने दरवाजा पर जवान को सलामी दी। तहसीलदार दिनेश कुमार, कोतवाल श्यामजी यादव, ग्राम प्रधान सुब्बा यादव, कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर के प्रतिनिधि गुरुदयाल राजभर, सपा नेता आलोक सिंह कौशिक, सामाजिक कार्यकर्ता नीतेश उर्फ भोनू सिंह, सुनील यादव, विनय यादव, कमलेश यादव, राजनाथ, काशीनाथ, अच्छेलाल, हवलदार, हीरा, आलोक सिंह, दुष्यंत चंद्रवंशी सहित सैकड़ों लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद शव यात्रा निकली। सैदपुर नगर स्थित पक्का घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने बताया कि सेना के अधिकारियों ने बताया कि अखिलेश को गोली कैसे लगी, इसकी जांच की जा रही है।