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कीमत है बड़ी, इसलिए जर्जर स्कूली इमारतें बच्चों के आस-पास खड़ी

Thu, 16 Jun 2022 11:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jun 2022 11:24 PM IST
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The auction price is high, so dilapidated school buildings stand around the children
जिले के जर्जर एवं निष्प्रयोज्य परिषदीय विद्यालयों के भवनों को ध्वस्त करने का फरमान जारी हुए महीनों बीत गए हैं। इसके बावजूद इस कार्य को अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। वजह भवनों का मूल्यांकन अधिक होने की वजह से नीलामी की प्रक्रिया जोर नहीं पकड़ पा रही है। इसके चलते निष्प्रयोज्य जर्जर भवन जस के तस खड़े हैं। इनमें से तो कई स्कूल के परिसर में ही हैं। ऐसे में इन विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को हमेशा बच्चों की चिंता लगी रहती है।
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जिले में 2269 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 1468 प्राथमिक, 352 उच्च प्राथमिक एवं 449 कंपोजिट विद्यालय हैं। शासन की ओर से जर्जर भवनों की नीलामी कराते हुए ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया था। बीते वर्ष 420 ऐसे विद्यालयों को चिन्हित किया गया था जो जर्जर हैं या निष्प्रयोज्य घोषित हो चुके हैं। इनके भवन वर्षों से जर्जर खड़े हैं। इन इमारतों में बच्चों की पढ़ाई नहीं होती लेकिन इनसे हमेशा खतरा बना रहता है। कई जर्जर विद्यालय स्कूल परिसर में ही है तो वहीं कई स्कूलों के करीब ही हैं जहां अक्सर बच्चों का आना-जाना लगा रहता है।
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इनमें से अब तक महज 74 विद्यालयों की नीलामी के साथ ही उनको ध्वस्त करने की प्रक्रिया पूरी की जा सकी है। शेष 346 की नीलामी एवं उसको ध्वस्त करने की प्रक्रिया अभी पूरा नहीं की जा सकी है। इसके पीछे अधिकांश विद्यालय भवनों का आगणन अधिक होने की वजह से उनकी नीलामी न हो पाने को कारण बताया जा रहा है। यही वजह है कि उनको ध्वस्त करने का कार्य जोर नहीं पकड़ पा रहा है। इसके चलते विभिन्न विकास खंडों में निष्प्रयोज्य जर्जर भवन जस के तस खड़े हैं। बीएसए ने सभी बीईओ को इस पूरी प्रक्रिया को जल्द हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है। ऐसे में विद्यालय खुलने के बाद अब जर्जर भवनों को ध्वस्त कराने की प्रक्रिया में फिर से तेजी आने की उम्मीद है।
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कोट
अधिकांश जर्जर विद्यालय भवनों का आगणन अधिक होने की वजह से उनकी नीलामी का कार्य जोर नहीं पकड़ पा रहा है। जल्द ही भवनों को नियमानुसार नीलाम कराते हुए उनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरा कराई जाएगी- हेमंत राव, बेसिक शिक्षाधिकारी
अभी तक अंजाम तक नहीं पहुंचा ध्वस्त करने का कार्य
सुहवल। रेवतीपुर ब्लाक अंतर्गत कुल 104 विद्यालय हैं जिनमें 23 कंपोजिट, 18 उच्च प्राथमिक तथा 63 प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें करीब 15500 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। क्षेत्र के विभिन्न गांव के कुल 13 जर्जर विद्यालयों को चिह्नित कर उसकी नीलामी की प्रक्रिया बीते दिनों शुरू की गई। विभाग की उदासीनता से अभी तक इसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका है।
जर्जर विद्यालय भवन को लेकर अभिभावक चिंतित
मरदह। शिक्षा क्षेत्र मरदह के अंतर्गत कई विद्यालय जर्जर हाल में हैं। इसमें प्राथमिक विद्यालय चंवर, प्राथमिक विद्यालय शाहपुर सुल्तानपुर, प्राथमिक विद्यालय जगदीशपुर अवतार, प्राथमिक विद्यालय अविसहन, प्राथमिक विद्यालय सिंगेरा द्वितीय, प्राथमिक विद्यालय कलानी, प्राथमिक विद्यालय मरदह, उच्च प्राथमिक विद्यालय नसरतपुर, उच्च प्राथमिक विद्यालय पांडेयपुर राधे, प्राथमिक विद्यालय रसूलाबाद, उच्च प्राथमिक विद्यालय रसूलाबाद, उच्च प्राथमिक विद्यालय नसीरपुर डांड़ी आदि जर्जर विद्यालय भवन को लेकर अभिभावक चिंतित हैं।

हो चुके हैंकई हादसे, दो मौतें भी
गाजीपुर/जमानिया। सैदपुर कोतवाली क्षेत्र के शरीफपुर गांव के निष्प्रयोज्य प्राथमिक विद्यालय के गेट का खंभा कुछ महीने पहले गिर गया था। इस हादसे में ननिहाल आई बालिका रिद्धी (11) की मौत हो गई थी। दोपहर में गांव के कुछ बच्चों के साथ वह प्राथमिक विद्यालय के पास खेल रही थी। बच्चे विद्यालय के गेट से झूलने लगे। अचानक गेट का खंभा गिर गया और रिद्धी उसके मलबे में दब गई। वहीं बीते दिसंबर में बहरियाबाद थाना क्षेत्र के सलेमपुर बघाई गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के शौचालय के दरवाजे पर लगा छज्जा गिरने से आदित्य (5) की दबकर मौत हो गई थी। जमानिया क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय हमीदपुर शिव मंदिर के एक कक्ष की दीवार कुछ वर्ष पहले गिर गई थी। संयोग रहा कि इस घटना में कोई बड़ी क्षति नहीं हुई। हेतिमपुर गांव स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय वर्ष 1904 और प्राथमिक विद्यालय जमानिया-एक वर्ष 1910 में बना था। यह आज भी मौजूद है और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। जबकि वर्ष 2000 में बना आलमगंज और दाउदपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय के साथ 19 स्कूल के भवन जर्जर हैं। इन्हें ध्वस्त किया जाना जरूरी है।
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