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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   The administration's overconfidence... no flood damage expected this time; cuts made to relief and rescue resources.

Ghazipur News: प्रशासन का अति आत्मविश्वास...इस बार बाढ़ से नहीं होगा नुकसान, राहत बचाव के संसाधनों में कटौती

Mon, 20 Jul 2026 01:05 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jul 2026 01:05 AM IST
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The administration's overconfidence... no flood damage expected this time; cuts made to relief and rescue resources.
गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच शहर के ददरीघाट पर हाथों ें बंशी लेकर पानी में खड़े लोग। संवाद - फोटो : 1
गाजीपुर। गंगा में जलस्तर बढ़ने के साथ जिले में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है, लेकिन इस बार जिला प्रशासन की तैयारियां पिछले साल की तुलना में कमजोर नजर आ रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जिले में वर्ष 2025 की बाढ़ से 166 गांव और 18,922 किसान प्रभावित हुए थे, वहां इस बार राहत और बचाव के सबसे अहम संसाधनों में ही भारी कटौती कर दी गई है। प्रशासन भले ही तैयारियां पूरी होने का दावा कर रहा हो, लेकिन सरकारी आंकड़े ही इस दावे की पोल खोल रहे हैं।
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जिले में इस बार 152 बाढ़ चौकियां और 46 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। हालांकि पिछले साल 160 बाढ़ चौकियां और 44 शरणालय बनाए गए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले वर्ष राहत कार्यों में 510 आपदा मित्र लगाए गए थे, जबकि इस बार उनकी संख्या घटाकर सिर्फ 22 कर दी गई है। ऐसे में बाढ़ जैसी आपदा के दौरान त्वरित राहत और बचाव कार्य कैसे होंगे, यह बड़ा सवाल बन गया है।
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नावों और नाविकों की संख्या में भी कमी आई है। पिछले साल 340 नाव और 357 नाविक तैनात किए गए थे, जबकि इस बार केवल 229 नाव और 237 नाविक ही उपलब्ध कराए गए हैं। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि गोताखोरों की संख्या 27 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है।
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हर चार घंटे पर एक सेमी बढ़ रहा गंगा का जलस्तर
पिछले वर्ष आई बाढ़ में 166 गांवों के 18,922 किसान प्रभावित हुए थे और 3,741.42 हेक्टेयर में लगी धान, बाजरा, केला और मिर्च की फसल बर्बाद हो गई थी। फिलहाल गंगा का जलस्तर 53.450 मीटर है और हर चार घंटे में लगभग एक सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है। जिले में गंगा के अलावा बेसो, मगई, भैसही, उदंती और गंगी नदियां भी हर वर्ष तबाही मचाती हैं।

आंकड़ों में तैयारी या कटौती?
संसाधन
2025
2026
बाढ़ चौकियां
160
152
बाढ़ शरणालय 44
46
आपदा मित्र
510
22
नाव
340
229
नाविक
357
237
गोताखोर
27
37
इन नदियों से हर साल बढ़ता है खतरा
जिले में गंगा के अलावा बेसो, मगई, भैसही, उदंती और गंगी नदियां भी हर वर्ष उफान पर आकर जिले के निचले इलाकों में बाढ़ का कारण बनती हैं। सबसे अधिक खतरा गंगा किनारे बसे गांवों के साथ इन नदियों के तटीय क्षेत्रों में रहता है।

बाढ़ की संभावनाओं को देखते हुए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बाढ़ चौकियां और शरणालय सक्रिय हैं। कर्मचारियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है और निगरानी समितियां भी गठित कर दी गई हैं।-वेद सिंह चौहान, एडीएम।

गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच शहर के ददरीघाट पर हाथों ें बंशी लेकर पानी में खड़े लोग। संवाद

गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच शहर के ददरीघाट पर हाथों ें बंशी लेकर पानी में खड़े लोग। संवाद- फोटो : 1

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