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प्रधान और सचिव से लेकर ब्लाक स्तर तक लगाई गुहार लेकिन नहीं मिला आवास
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गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए जब प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू हुई तो गरीब खुश हुए थे लेकिन मरदह ब्लाक क्षेत्र में तमाम पात्र ऐसे हैं जिन्हें अब तक योजना के तहत छत नसीब नहीं हुई। जबकि इन पात्रों ने प्रधान, सचिव से लेकर ब्लाक कार्यालय तक गुहार लगाई। स्थिति यह है कि ये पात्र गरीब टिन शेड और झोपड़ियों में परिवार के साथ गुजर बसर कर रहे हैं।
सरकार की ओर से गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना चल रही है। गरीबों के सिर पर छत उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई इस योजना का लाभ तमाम गरीबों को मिला है लेकिन प्रत्येक विकासखंड क्षेत्रों में कुछ गरीब अब भी प्रधानमंत्री आवास से वंचित हैं। वे सही मायने में पात्र हैं लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिला है।
डोड़सर गांव के वीरेंद्र गोड़ परिवार के साथ प्लास्टिक के छप्पर में रहते हैं। मजदूरी करके जीविकोपार्जन करते हैं। इन्होंने प्रधानमंत्री आवास के लिए कई बार आवेदन किया लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने ग्राम प्रधान से लेकर ब्लाक कार्यालय तक चक्कर काटा। इस दौरान सिर्फ आश्वासन दिया गया लेकिन सब कोरा साबित हो रहा है।
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मरदह गांव निवासी गनपत कनौजिया एक टिन शेड में रहते हैं। विभागीय एवं जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण वह झोपड़ी में रह रहे हैं। किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। कई बार गुहार लगाने के बाद भी उनको प्रधानमंत्री आवास नहीं मिला।
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सरकार की ओर से गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना चल रही है। गरीबों के सिर पर छत उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई इस योजना का लाभ तमाम गरीबों को मिला है लेकिन प्रत्येक विकासखंड क्षेत्रों में कुछ गरीब अब भी प्रधानमंत्री आवास से वंचित हैं। वे सही मायने में पात्र हैं लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिला है।
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डोड़सर गांव के वीरेंद्र गोड़ परिवार के साथ प्लास्टिक के छप्पर में रहते हैं। मजदूरी करके जीविकोपार्जन करते हैं। इन्होंने प्रधानमंत्री आवास के लिए कई बार आवेदन किया लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने ग्राम प्रधान से लेकर ब्लाक कार्यालय तक चक्कर काटा। इस दौरान सिर्फ आश्वासन दिया गया लेकिन सब कोरा साबित हो रहा है।
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मरदह गांव निवासी गनपत कनौजिया एक टिन शेड में रहते हैं। विभागीय एवं जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण वह झोपड़ी में रह रहे हैं। किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। कई बार गुहार लगाने के बाद भी उनको प्रधानमंत्री आवास नहीं मिला।