{"_id":"6782eca83e7891bf8008c5cb","slug":"rambabu-shandilyas-name-is-also-appearing-in-bihars-vaishali-bank-scam-ghazipur-news-c-20-ali1005-852295-2025-01-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: बिहार के वैशाली बैंक घोटाले में भी आ रहा रामबाबू शांडिल्य का नाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: बिहार के वैशाली बैंक घोटाले में भी आ रहा रामबाबू शांडिल्य का नाम
विज्ञापन
गाजीपुर। बिहार के द वैशाली शहरी विकास को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले के तार गाजीपुर से जुड़ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम पूर्वांचल को ऑपरेटिव बैंक के पूर्व प्रवर्तक रामबाबू शांडिल्य को गिरफ्तार कर पटना ले गई है। गाजीपुर व वाराणसी में दो दिनों तक रही ईडी की टीम ने आरोपी के बेटे सहित करीबियों से भी पूछताछ की थी। हालांकि, करीबी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। बताया जा रहा है कि द वैशाली शहरी विकास को-ऑपरेटिव बैंक में 383 ऋण खातों के माध्यम से 83.50 करोड़ रुपये का गबन किया गया था। पूर्व मंत्री आलोक मेहता इस बैंक के चेयरमैन व प्रवर्तक रह चुके हैं। इस कारण जांच की आंच उन तक पहुंची। इसी क्रम में ईडी ने लगभग आठ घंटे तक बिहार के हाजीपुर में यादव चौक स्थित बैंक कर्मियों से पूछताछ के बाद गाजीपुर का रुख किया। सूत्रों की मानें तो टीम बृहस्पतिवार को ही यहां आ गई थी। तीन गाड़ियों से आई ईडी की टीम ने शुक्रवार को पूर्वांचल को-ऑपरेटिव बैंक में पूरे दिन गोपनीय तरीके से जांच की। इसकी भनक किसी सुरक्षा एजेंसी को भी नहीं लगने दी। रात में पुलिस के उच्चाधिकारियों को मेसेज भेजकर बैंक के पूर्व प्रवर्तक रामबाबू शांडिल्य को गिरफ्तार कर लिया। इसकी जानकारी होते ही हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि आरोपी के बेटे व करीबियों से भी ईडी ने पूछताछ की थी। परिवार से जुड़े कुछ लोग पटना गए हैं। हालांकि, करीबी इस मामले में कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। चर्चा है कि यहां से पटना के को-ऑपरेटिव बैंक के जरिये लेन-देन किया गया था।
नोटबंदी के बाद एक सप्ताह में जमा हुए थे पांच करोड़ : पूर्वांचल को-आपरेटिव बैंक की जनपद में छह शाखाएं हैं। नोटबंदी के बाद एक सप्ताह में करीब पांच करोड़ पुराने नोट जमा हुए थे, जिसकी इसकी सूचना आरबीआई को भी भेजी गई थी।
पूर्वांचल बैंक घोटाले की रकम का चल रहा आकलन, जिम्मेदारों से होगी वसूली
गाजीपुर। पूर्वांचल को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व प्रवर्तक रामबाबू शांडिल्य और उनके करीबियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, बैंक में वित्तीय अनियमितता के मामले में इस समय रकम का आकलन किया जा रहा है, उसी हिसाब से तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों से रकम की वसूली की जाएगी। रकम वसूली में अड़चन आने पर गिरफ्तारी और कुर्की की कार्रवाई की जा सकती है। वर्ष 2023 में आरबीआई को पूर्वांचल को-ऑपरेटिव बैंक में गंभीर वित्तीय अनियमितता मिली थी। इससे पहले आरबीआई ने बैंक की सभी शाखाओं पर जमा एवं निकासी पर रोक लगी थी। हालांकि, आरबीआई ने बैंक में पांच लाख से कम जमा करने वाले 912 खाताधारकों का 12 करोड़ 63 लाख रुपया वापस करा दिया है। 1691 खाताधारकों का 22 करोड़ 92 लाख रुपये वापस करने की प्रक्रिया चल रही है। बैंक से 40 करोड़ रुपये का ऋण बांटा गया था। आरबीआई की जांच रिपोर्ट से पता चला था कि बैंक में 25 खातों के जरिये गड़बड़ी की गई थी। बैंक के प्रवर्तकों तथा फर्म ने एंटी मनी लॉन्ड्रिंग तथा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया और पांच को-ऑपरेटिव सोसाइटी और 6 फर्मों के नाम 25 खाते खोल दिए। इन खातों से बड़ी राशि की निकासी की गई है। ये खाते किसके नाम से थे, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। बीते 14 जून को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक के लाइसेंस को निरस्त कर दिया था। उसके पहले 2023 में आरबीआई की जांच रिपोर्ट पर पूर्वांचल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के पूर्व प्रवर्तक रामबाबू शांडिल्य, पूर्व सीईओ विवेक पांडेय, प्रबंध कमेटी, लेखा परीक्षक मेसर्स विजय के. शर्मा एंड कंपनी, बैंक प्रोप्राइटर और संबंधित पार्टी व फर्म के खिलाफ शहर कोतवाली में 30 अगस्त 2023 में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीसीआईडी कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नोटबंदी के बाद एक सप्ताह में जमा हुए थे पांच करोड़ : पूर्वांचल को-आपरेटिव बैंक की जनपद में छह शाखाएं हैं। नोटबंदी के बाद एक सप्ताह में करीब पांच करोड़ पुराने नोट जमा हुए थे, जिसकी इसकी सूचना आरबीआई को भी भेजी गई थी।
विज्ञापन
पूर्वांचल बैंक घोटाले की रकम का चल रहा आकलन, जिम्मेदारों से होगी वसूली
गाजीपुर। पूर्वांचल को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व प्रवर्तक रामबाबू शांडिल्य और उनके करीबियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, बैंक में वित्तीय अनियमितता के मामले में इस समय रकम का आकलन किया जा रहा है, उसी हिसाब से तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों से रकम की वसूली की जाएगी। रकम वसूली में अड़चन आने पर गिरफ्तारी और कुर्की की कार्रवाई की जा सकती है। वर्ष 2023 में आरबीआई को पूर्वांचल को-ऑपरेटिव बैंक में गंभीर वित्तीय अनियमितता मिली थी। इससे पहले आरबीआई ने बैंक की सभी शाखाओं पर जमा एवं निकासी पर रोक लगी थी। हालांकि, आरबीआई ने बैंक में पांच लाख से कम जमा करने वाले 912 खाताधारकों का 12 करोड़ 63 लाख रुपया वापस करा दिया है। 1691 खाताधारकों का 22 करोड़ 92 लाख रुपये वापस करने की प्रक्रिया चल रही है। बैंक से 40 करोड़ रुपये का ऋण बांटा गया था। आरबीआई की जांच रिपोर्ट से पता चला था कि बैंक में 25 खातों के जरिये गड़बड़ी की गई थी। बैंक के प्रवर्तकों तथा फर्म ने एंटी मनी लॉन्ड्रिंग तथा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया और पांच को-ऑपरेटिव सोसाइटी और 6 फर्मों के नाम 25 खाते खोल दिए। इन खातों से बड़ी राशि की निकासी की गई है। ये खाते किसके नाम से थे, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। बीते 14 जून को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक के लाइसेंस को निरस्त कर दिया था। उसके पहले 2023 में आरबीआई की जांच रिपोर्ट पर पूर्वांचल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के पूर्व प्रवर्तक रामबाबू शांडिल्य, पूर्व सीईओ विवेक पांडेय, प्रबंध कमेटी, लेखा परीक्षक मेसर्स विजय के. शर्मा एंड कंपनी, बैंक प्रोप्राइटर और संबंधित पार्टी व फर्म के खिलाफ शहर कोतवाली में 30 अगस्त 2023 में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीसीआईडी कर रही है।

शिक्षक हुए साइबर फ्रॉड के शिकार

शिक्षक हुए साइबर फ्रॉड के शिकार
विज्ञापन