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सुहवल गांव के संत मानदास बाबा परिसर में आयोजित लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दौरान रामकथा सुनाती कथ?
- फोटो : GHAZIPUR
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सुहवल। संतों की कृपा से ही समागम होता है। रामकथा के जरिए मनुष्य का जीवन संवर जाता है। वह बुरे कर्म छोड़कर नेकी की राह पर चल पड़ता है। सत्संग से मानव अपने साथ-साथ परिवार एवं समाज का भी कल्याण करने लगता है। संत की कृपा से सत्संग मिलती है और जब संत विशेष कृपा करता है तो समागम मिल जाता है।
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ये विचार सुहवल गांव स्थित संत मानदास बाबा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय 25 कुंडीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के तहत चल रहे रामकथा के छठें दिन कथा वाचिका रागिनी सरस्वती ने कही। उन्होंने कहा कि धर्म मात्र बौद्धिक उपलब्धि नहीं है। वह मनुष्य की स्वाभाविक आत्मा है और मनुष्य के आवरण से ढकी हुई है। इस कारण वह अज्ञात है। आवरण से उसका चैतन्य ढका हुआ है, लेकिन वह अस्त नहीं है। उन्होंने कहा कि संतों की कृपा से ही समागम मिलता है। रामकथा के जरिए मनुष्य का जीवन संवर जाता है। वह बुरे कर्म छोड़कर नेकी की राह पर चल पड़ता है। सत्संग से जुड़ने के बाद मानव अपने साथ-साथ परिवार एवं समाज का भी कल्याण करने लगता है। संत की कृपा से सत्संग मिलता है और जब संत विशेष कृपा करता है तो समागम मिल जाता है। रामकथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अकेले प्रार्थना करने से हो सकता है कि परमात्मा कुछ देर में सुने, लेकिन जब एक साथ लाखों हाथ जुड़कर प्रार्थना करते हैं तो परमात्मा को सुनना ही पड़ता है। इसलिए रामकथा विशेष महत्व रखती है। सत्य का महत्व तब ही है जबकि सत्य को जीवन में मन, वचन, कर्म से स्वीकार किया जाए। सत्य का आचरण करने वाला व्यक्ति ही सामाजिक जीवन में प्रतिष्ठा एवं सम्मान प्राप्त करता है। सत्य के आचरण के आधार पर ही हम एक-दूसरे पर विश्वास करते हैं। परस्पर विश्वास की नींव पर ही संपूर्ण समाज की रचना टिकी हुई है। श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में मुसीबतों का सामना करते हुए समाज के सामने ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जिसके अनुसरण से मनुष्य का जीवन सफल हो सकता है। इस अवसर पर गौसपुर स्थित अघोर महिला शक्तिपीठ की माता रुद्राणी, जीवेंद्र नारायण शुक्ला, गंगासागर कश्यप, रविशंकर राय, विनोद गुप्ता, सुधीर राय, पिंकू राय, वीरेंद्र शर्मा, मनोज पांडेय, विजय शंकर आदि मौजूद रहे।
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