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गंगा-जमुनी तहजीब के पैरोकार थे राही मासूम रजा
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राही मासूम रजा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते समाजसेवी ।संवाद
- फोटो : GHAZIPUR
गंगा-जमुनी तहजीब के पैरोकार थे राही मासूम रजा
पुण्यतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि
संवाद न्यूज एजेंसी
कासिमाबाद। गंगौली गांव में जन्मे सहित्यकार डा. राही मासूम रजा गंगा-जमुनी तहजीब के पैरोकार थे। यह बातें मंगलवार को डॉ. राही मासूम रजा की पुण्यतिथि पर उनके पैतृक आवास पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुहम्मद आमिर ने कही।
उन्होंने बताया कि महाभारत धारावाहिक का संवाद लिखने के प्रस्ताव को उन्होंने पहली बार ठुकरा दिया था। तब वे अलीगढ़ विश्वविद्यालय में प्राध्यापक थे। उसी समय कुछ लोगों ने बीआर चोपड़ा को पत्र लिखकर सवाल उठाया कि क्या इसके लिए कोई हिंदू लेखक नहीं मिला। इन पत्रों को पढ़ने के बाद उन्होने ठान लिया कि महाभारत की पटकथा लिखेंगे। किसान सभा के जिला महासचिव अशोक मिश्रा ने कहा कि डा. रजा उन साहित्यकारों में से एक हैं जिन्होंने सिनेमा में भी साहित्य को कायम रखा। शमीम अहमद ने कहा कि वह अलीगढ़ स्थित शमशाद मार्केट स्थित जिस बिल्डिंग में वे रहते थे उसके कमरे के आगे उनके नाम की तख्ती आज भी लगी है। मुहम्मद शकील हैदर ने कहा कि डॉ. रजा मुंबई में रहने लगे तब भी न तो अलीगढ़ को भूले और न गंगौली को। प्रीति जायसवाल, इरशाद अहमद, पूर्व प्रधान देवनारायण राजभर, नंदू राजभर, बालचंद यादव, विनोद जायसवाल, पप्पू यादव, रामलाल प्रजापति आदि ने विचार व्यक्त किया। गाजीपुर के के तुलसीसागर में कवि दिनेश चंद्र शर्मा के आवास पर हुई श्रद्धांजलि सभा में वीके सिंह, रमेश, अमित ठाकुर आदि मौजूद रहे।
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पुण्यतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि
संवाद न्यूज एजेंसी
कासिमाबाद। गंगौली गांव में जन्मे सहित्यकार डा. राही मासूम रजा गंगा-जमुनी तहजीब के पैरोकार थे। यह बातें मंगलवार को डॉ. राही मासूम रजा की पुण्यतिथि पर उनके पैतृक आवास पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुहम्मद आमिर ने कही।
उन्होंने बताया कि महाभारत धारावाहिक का संवाद लिखने के प्रस्ताव को उन्होंने पहली बार ठुकरा दिया था। तब वे अलीगढ़ विश्वविद्यालय में प्राध्यापक थे। उसी समय कुछ लोगों ने बीआर चोपड़ा को पत्र लिखकर सवाल उठाया कि क्या इसके लिए कोई हिंदू लेखक नहीं मिला। इन पत्रों को पढ़ने के बाद उन्होने ठान लिया कि महाभारत की पटकथा लिखेंगे। किसान सभा के जिला महासचिव अशोक मिश्रा ने कहा कि डा. रजा उन साहित्यकारों में से एक हैं जिन्होंने सिनेमा में भी साहित्य को कायम रखा। शमीम अहमद ने कहा कि वह अलीगढ़ स्थित शमशाद मार्केट स्थित जिस बिल्डिंग में वे रहते थे उसके कमरे के आगे उनके नाम की तख्ती आज भी लगी है। मुहम्मद शकील हैदर ने कहा कि डॉ. रजा मुंबई में रहने लगे तब भी न तो अलीगढ़ को भूले और न गंगौली को। प्रीति जायसवाल, इरशाद अहमद, पूर्व प्रधान देवनारायण राजभर, नंदू राजभर, बालचंद यादव, विनोद जायसवाल, पप्पू यादव, रामलाल प्रजापति आदि ने विचार व्यक्त किया। गाजीपुर के के तुलसीसागर में कवि दिनेश चंद्र शर्मा के आवास पर हुई श्रद्धांजलि सभा में वीके सिंह, रमेश, अमित ठाकुर आदि मौजूद रहे।
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