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नहीं रहे पद्मश्री सीताराम पाल
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Sat, 06 Jun 2015 11:33 PM IST
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क्षेत्र के शेरपुर कला गांव निवासी पद्मश्री से सम्मानित सीताराम पाल का शनिवार की अपराह्न तीन बजे निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे और कई महीनों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही तमाम गणमान्य लोगों ने उनके आवास पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किया। अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा।
शेरपुर कला गांव निवासी हरिनारायण पाल के पुत्र सीताराम पाल की उत्कृष्ट कंबल बुनाई को कलात्मक सामाजिक कार्य मानते हुए केंद्र सरकार ने उनका चयन पद्मश्री सम्मान के लिए किया था। वर्ष 1981 में 28 मार्च को तत्कालीन राष्ट्रपति डा. नीलम संजीव रेड्डी ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा था।
बीमारी और अपनी बेबसी से आजिज आकर सीताराम ने वर्ष 2011 में केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता देने की गुहार लगाई। आर्थिक सहायता न मिलने पर उन्होंने सम्मान में मिले तमगे को जलाने की चेतावनी दी थी। अमर उजाला ने वर्ष 2013 के अक्तूबर माह में प्रमुखता के साथ यह खबर प्रकाशित कर उनकी बेबसी और तकलीफ को उठाया।
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इसके बाद प्रदेश सरकार ने आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए दो लाख रुपये का चेक उपलब्ध कराया जिसे तत्कालीन सांसद नीरज शेखर ने उन्हें प्रदान किया था। केंद्र सरकार की तरफ से भी 50 हजार रुपये का चेक उन्हें बतौर सहायता प्रदान किया गया। उनके दो पुत्र श्रवण और शशि हैं।
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शेरपुर कला गांव निवासी हरिनारायण पाल के पुत्र सीताराम पाल की उत्कृष्ट कंबल बुनाई को कलात्मक सामाजिक कार्य मानते हुए केंद्र सरकार ने उनका चयन पद्मश्री सम्मान के लिए किया था। वर्ष 1981 में 28 मार्च को तत्कालीन राष्ट्रपति डा. नीलम संजीव रेड्डी ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा था।
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बीमारी और अपनी बेबसी से आजिज आकर सीताराम ने वर्ष 2011 में केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता देने की गुहार लगाई। आर्थिक सहायता न मिलने पर उन्होंने सम्मान में मिले तमगे को जलाने की चेतावनी दी थी। अमर उजाला ने वर्ष 2013 के अक्तूबर माह में प्रमुखता के साथ यह खबर प्रकाशित कर उनकी बेबसी और तकलीफ को उठाया।
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इसके बाद प्रदेश सरकार ने आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए दो लाख रुपये का चेक उपलब्ध कराया जिसे तत्कालीन सांसद नीरज शेखर ने उन्हें प्रदान किया था। केंद्र सरकार की तरफ से भी 50 हजार रुपये का चेक उन्हें बतौर सहायता प्रदान किया गया। उनके दो पुत्र श्रवण और शशि हैं।