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मुखिया जी के खाते पर पहरेदारी
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sun, 24 Apr 2016 12:06 AM IST
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प्रधान जी जीतने के चार माह बीतने पर भी गांव के विकास का एक भी वादा पूरा नहीं कर पा रहे हैं। चौदहवें वित्त की धनराशि जारी हो गई है लेकिन उनके खाते में धन ही नहीं आया। आए भी कैसे, किसी का खाता नहीं खुला है और जिसका खाता खुल गया है उसका संचालन नहीं हो पा रहा है क्योंकि उस पर जिलाधिकारी ने पहरा बैठा दिया है। विकास कार्यों के प्रस्ताव को डीएम से मंजूरी मिलने के बाद ही उसके लिए धन जारी हो पाएगा। खाते के संचालन पर रोक से ग्राम प्रधान नाराज हैं और जल्द ही सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
पंचायती राज दिवस के मद्देनजर गांवों में बैठकेें हो रही हैं। ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों को कल्याणकारी योजनाओं की दी जा रही है। मगर विकास का पहिया रुका हुआ है। ग्राम प्रधान के चुनाव के लिए जितनी मारामारी थी। ग्राम पंचायत सदस्य बनने में लोगों की उतनी ही कम रुचि दिखी।
ऐसे में कई जगह सदस्यों का कोरम ही नहीं पूरा हो पाया। ऐसे में तमाम प्रधान शपथ ही ले नहीं ले पाए। कई गांवों के प्रधानों ने पिछले महीने कोरम पूरा होने पर शपथ ली। अभी उनका खाता भी नहीं खुल पाया है। कुछ ऐसा ही हाल उन गांवों में भी है, जहां के प्रधानों का खाता तो खुल गया है लेकिन उसका संचालन नहीं हो पा रहा है। दरअसल शासन ने खातों से संचालन पर रोक लगा दी है।
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अब कोई भी काम कराने के पहले उसका प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजना होगा और जिलाधिकारी मंजूरी मिलने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। ऐसे में विकास का काम नहीं शुरू होने के कारण वर्तमान और पूर्व प्रधानों के बीच लामबंदी शुरू हो गई है।
रेवतीपुर ब्लाक के सभी 46 ग्राम पंचायतों के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों ने शपथ ले ली है और उनका खाता खुल गया है। चौदहवें वित्त की रकम खाते में नहीं पहुंची है। नाली-खड़ंजा के काम लंबित हैं। सहायक विकास अधिकारी पंचायत अशोक कुमार यादव ने बताया कि प्रधानों से मिली कार्ययोजना को जिलाधिकारी से मंजूरी मिलने के बाद ही खातों का संचालन शुरू होगा।
इस ब्लाक में 14 वें वित्त और चतुर्थ राज्य वित्त के पौने तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट जारी हो गया है लेकिन उसमें से ग्राम प्रधान एक रुपया भी खर्च नहीं कर सकते। दुबिहा संवाददाता के मुताबिक बाराचवर ब्लाक के हरदासपुर, नेवादा, दुबिहां, खड़हरा, असावर में पंचायतों का गठन ही देर से हुआ, लिहाजा अभी यहां सबके खाते ही नहीं खुले हैं।
बहरहाल, वजह चाहे जो हो लेकिन गांवों में विकास कार्यों को लेकर लोगों में चर्चा जोरों पर है। जीत कर प्रध्ाान बने उम्मीदवारों को उनके वादे याद दिलाए जा रहे हैं। प्रधानों के लिए यह एक चुनौती है।
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पंचायती राज दिवस के मद्देनजर गांवों में बैठकेें हो रही हैं। ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों को कल्याणकारी योजनाओं की दी जा रही है। मगर विकास का पहिया रुका हुआ है। ग्राम प्रधान के चुनाव के लिए जितनी मारामारी थी। ग्राम पंचायत सदस्य बनने में लोगों की उतनी ही कम रुचि दिखी।
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ऐसे में कई जगह सदस्यों का कोरम ही नहीं पूरा हो पाया। ऐसे में तमाम प्रधान शपथ ही ले नहीं ले पाए। कई गांवों के प्रधानों ने पिछले महीने कोरम पूरा होने पर शपथ ली। अभी उनका खाता भी नहीं खुल पाया है। कुछ ऐसा ही हाल उन गांवों में भी है, जहां के प्रधानों का खाता तो खुल गया है लेकिन उसका संचालन नहीं हो पा रहा है। दरअसल शासन ने खातों से संचालन पर रोक लगा दी है।
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अब कोई भी काम कराने के पहले उसका प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजना होगा और जिलाधिकारी मंजूरी मिलने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। ऐसे में विकास का काम नहीं शुरू होने के कारण वर्तमान और पूर्व प्रधानों के बीच लामबंदी शुरू हो गई है।
रेवतीपुर ब्लाक के सभी 46 ग्राम पंचायतों के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों ने शपथ ले ली है और उनका खाता खुल गया है। चौदहवें वित्त की रकम खाते में नहीं पहुंची है। नाली-खड़ंजा के काम लंबित हैं। सहायक विकास अधिकारी पंचायत अशोक कुमार यादव ने बताया कि प्रधानों से मिली कार्ययोजना को जिलाधिकारी से मंजूरी मिलने के बाद ही खातों का संचालन शुरू होगा।
इस ब्लाक में 14 वें वित्त और चतुर्थ राज्य वित्त के पौने तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट जारी हो गया है लेकिन उसमें से ग्राम प्रधान एक रुपया भी खर्च नहीं कर सकते। दुबिहा संवाददाता के मुताबिक बाराचवर ब्लाक के हरदासपुर, नेवादा, दुबिहां, खड़हरा, असावर में पंचायतों का गठन ही देर से हुआ, लिहाजा अभी यहां सबके खाते ही नहीं खुले हैं।
बहरहाल, वजह चाहे जो हो लेकिन गांवों में विकास कार्यों को लेकर लोगों में चर्चा जोरों पर है। जीत कर प्रध्ाान बने उम्मीदवारों को उनके वादे याद दिलाए जा रहे हैं। प्रधानों के लिए यह एक चुनौती है।