पड़ोसी राज्य बिहार को जोड़ने वाली 38 किमी लंबी ताड़ीघाट बारा नेशनल हाईवे 124 सी विभिन्न जगहों पर दरकी हुई है। दरकी हुई जगहों की मरम्मत का कार्य सोमवार को नेशनल हाईवे डिविजन वाराणसी के द्वारा शुरू कर दिया गया। वहीं राहगीरों और ग्रामीणों ने दरकने वाली जगहों की हो रही मरम्मत पर सवाल खड़े किए हैं।
लोगों ने आरोप लगाया कि जिस तरह से विभाग के द्वारा हाईवे के मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है, उसकी छानबीन की जाए। लोगों ने बताया कि आगे आगे मरम्मत का कार्य हो रहा, वहीं पीछे से सड़क की गिट्टियां उखड़ रही है। मरम्मत के नाम पर गिट्टी और पीच का हल्का मिश्रण कर दरार में डाल उसे समतल करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग किया कि टूटे और दरार वाली जगहों को तोड़कर दोबारा सीसी तरीके से ढलाई मानक के निर्धारित नियमों के तहत किया जाए, जिससे इसकी मजबूती बरकरार रहे। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि वर्ष 2019 में 38 किमी लंबी 245 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुई थी। सीसी रोड जो वाहनों के दबाव के चलते जगह जगह दरकने लगी। इसके कारण विभिन्न छोटे बड़े वाहन आवागमन करते समय दरार में वाहनों के पहिए पड़ते ही अनियंत्रित हो जाने से गिरकर चोटिल हो जा रहे हैं। लोगों ने बताया कि हाईवे के हुए निर्माण के जांच को लेकर जिम्मेदार मौन साधे है। इस संबंध में नेशनल हाइवे डिविजन वाराणसी के अधिशासी अभियंता एके सिंह ने बताया कि दरक रही सड़कों के मरम्मत का काम शुरू हो गया है, बताया कि मरम्मत मानक के विपरीत पाए जाने पर जांच कर कार्यवाई की जाएगी।