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Ghazipur News: दम तोड़ते जन औषधि केंद्र, शुगर बीपी, हार्ट की दवाओं का भी टोटा
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गाजीपुर। सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खोले गए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र जिले में दवाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। कई केंद्रों पर शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल, दर्द निवारक और कैल्शियम सिरप जैसी रोजमर्रा की जरूरी दवाएं भी नहीं हैं।
इससे मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। सेलेकॉन हेल्थ इंडिया प्रा. लि. की ओर से जिले में 2018 के बाद चरणबद्ध तरीके से कुल 16 जन औषधि केंद्र खोले गए। इनमें से वर्तमान में सभी केंद्र संचालित हैं, लेकिन कई केंद्रों पर करीब 40 से 60 प्रकार की जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म बताया जा रहा है। जबकि योजना के तहत प्रत्येक केंद्र पर 1200 से अधिक जेनेरिक दवाएं रहनी चाहिए। रेवतीपुर केंद्र पर हैं सिर्फ 50 दवाएं : फार्मासिस्ट किसलय राय ने बताया कि रेवतीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित जन औषधि केंद्र पर शुगर, बीपी, हार्ट, कोलेस्ट्रॉल, पेनकिलर समेत 50 से अधिक तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं।
सीएमओ डॉ. सुनील कुमार पांडेय का कहना है कि जेनेरिक दवाएं पूरी तरह कारगर हैं और ब्रांडेड व जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता में कोई फर्क नहीं होता। जरूरत है लोगों में जागरूकता बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था सुधारने की।
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केंद्र पर कई जरूरी दवाएं नहीं
सैदपुर स्थित भारतीय जन औषधि केंद्र पर पेरासिटामोल 500, एसिक्लोफिनेक, पैंटोप्राजोल 40, सिप्रोफ्लाक्सासिन 500, मल्टीविटामिन, रनीटीडीन 150 जैसी दवाएं उपलब्ध बताई गईं। वहीं राबेप्राजोल, लीवोशल्प्राइड, थायरोक्सिन, विटामिन बी-12 और बीटाहिस्टीन-16 जैसी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। संचालकों के अनुसार केंद्र पर बाहरी दवाएं नहीं रखी जातीं और इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं होते। वहीं जखनिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित जन औषधि केंद्र पर मरीजों को ओपीडी पर्चे पर लिखी कुछ दवाएं तो मिल जाती हैं, लेकिन कई जरूरी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। इंजेक्शन मरीजों को नहीं मिलते हैं। केंद्र के संचालक आकाश सिंह ने बताया कि चिकित्सकों द्वारा लिखे जाने वाले इंजेक्शन की पावर मात्रा ज्यादा होती है।
जिले के कुछ जन औषधि केंद्रों पर समस्या है, जिसका शीघ्र ही समाधान कर दिया जाएगा, जबकि सभी केंद्रों पर पर्याप्त दवाएं उपलब्ध, जहां कमी होती है, वहांदवा की आपूर्ति की जाती है। - काशी, जिला प्रबंधक, सेलेकान हेल्थ इंडिया प्रा.लि.
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इससे मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। सेलेकॉन हेल्थ इंडिया प्रा. लि. की ओर से जिले में 2018 के बाद चरणबद्ध तरीके से कुल 16 जन औषधि केंद्र खोले गए। इनमें से वर्तमान में सभी केंद्र संचालित हैं, लेकिन कई केंद्रों पर करीब 40 से 60 प्रकार की जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म बताया जा रहा है। जबकि योजना के तहत प्रत्येक केंद्र पर 1200 से अधिक जेनेरिक दवाएं रहनी चाहिए। रेवतीपुर केंद्र पर हैं सिर्फ 50 दवाएं : फार्मासिस्ट किसलय राय ने बताया कि रेवतीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित जन औषधि केंद्र पर शुगर, बीपी, हार्ट, कोलेस्ट्रॉल, पेनकिलर समेत 50 से अधिक तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं।
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सीएमओ डॉ. सुनील कुमार पांडेय का कहना है कि जेनेरिक दवाएं पूरी तरह कारगर हैं और ब्रांडेड व जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता में कोई फर्क नहीं होता। जरूरत है लोगों में जागरूकता बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था सुधारने की।
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केंद्र पर कई जरूरी दवाएं नहीं
सैदपुर स्थित भारतीय जन औषधि केंद्र पर पेरासिटामोल 500, एसिक्लोफिनेक, पैंटोप्राजोल 40, सिप्रोफ्लाक्सासिन 500, मल्टीविटामिन, रनीटीडीन 150 जैसी दवाएं उपलब्ध बताई गईं। वहीं राबेप्राजोल, लीवोशल्प्राइड, थायरोक्सिन, विटामिन बी-12 और बीटाहिस्टीन-16 जैसी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। संचालकों के अनुसार केंद्र पर बाहरी दवाएं नहीं रखी जातीं और इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं होते। वहीं जखनिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित जन औषधि केंद्र पर मरीजों को ओपीडी पर्चे पर लिखी कुछ दवाएं तो मिल जाती हैं, लेकिन कई जरूरी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। इंजेक्शन मरीजों को नहीं मिलते हैं। केंद्र के संचालक आकाश सिंह ने बताया कि चिकित्सकों द्वारा लिखे जाने वाले इंजेक्शन की पावर मात्रा ज्यादा होती है।
जिले के कुछ जन औषधि केंद्रों पर समस्या है, जिसका शीघ्र ही समाधान कर दिया जाएगा, जबकि सभी केंद्रों पर पर्याप्त दवाएं उपलब्ध, जहां कमी होती है, वहांदवा की आपूर्ति की जाती है। - काशी, जिला प्रबंधक, सेलेकान हेल्थ इंडिया प्रा.लि.