{"_id":"8e8b9ae044f566dc384bc1892b033a6c","slug":"is-anti-labor-government-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मजदूर विरोधी है केंद्र सरकार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मजदूर विरोधी है केंद्र सरकार
ब्यूरो अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Tue, 22 Dec 2015 11:37 PM IST
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भाकपा माले तथा अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न सवालों को लेकर मंगलवार को सरजू पांडेय पार्क में धरना दिया। इस अवसर पर आयोजित सभा में पार्टी की केन्द्रीय कमेटी के सदस्य
ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि ईंट भट्ठा उद्योग बंद होने से ग्रामीण आबादी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा जो ईंट की पथाई एवं ढुलाई करता था बेरोजगारी की मार झेल रहा है। काम न मिलने की वजह से ईंट-भट्ठा मजदूरों को
फांकाकशी के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। केन्द्र-प्रदेश की सरकार ने इन मजदूरों को रोजगार न देकर अपना मजदूर विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है। कहा कि अगर जिला प्रशासन ईंट-भट्ठा मजदूरों के लिए काम की व्यवस्था नहीं
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करता है तो लेबर आफिस में ताला बंद कर आवाज बुलंद की जाएगी। माले नेता ने भूमिहीन दलितों-गरीबों को आवासीय पट्टा के साथ आवास देने की मांग के साथ मनरेगा के तहत गांवों में सिर्फ 150 दिन ही नहीं साल भर
काम देने तथा रोजाना पांच सौ रुपया मजदूरी देने की मांग उठाई। कहा कि किसान बर्बाद हुई फसल के मुआवजा के लिए तहसील का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन गरीब एवं मझोले किसानों को राहत चेक देने के बजाए लेखपाल तथा
तहसील के अधिकारी संपन्न किसानों को दे रहे हैं। किसानों को राहत धनराशि उपलब्ध कराने में हीलाहवाली करने वाले तहसील के अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग उठाई। माले जिला सचिव रामप्यारे राम ने कहा कि
सांप्रदायिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने जन अभियान चलाकर जिला मुख्यालय पर डीएम कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी। अंत में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को संबोधित 13 सूत्रीय ज्ञापन सहायक
श्रमायुक्त को सौंपा गया। सभा में विजयबहादुर सिंह, विरेन्द्र, लालबहादुर बागी, मुराली, बुच्चीलाल, विजयी, कौशल्या देवी, कमलाकर राम, चन्द्रावती देवी, जगदीश, नंदकिशोर बिंद तथा संजय भारती ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता वासुदेव त्यागी एवं संचालन योगेंद्र भारती ने किया।
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ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि ईंट भट्ठा उद्योग बंद होने से ग्रामीण आबादी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा जो ईंट की पथाई एवं ढुलाई करता था बेरोजगारी की मार झेल रहा है। काम न मिलने की वजह से ईंट-भट्ठा मजदूरों को
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फांकाकशी के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। केन्द्र-प्रदेश की सरकार ने इन मजदूरों को रोजगार न देकर अपना मजदूर विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है। कहा कि अगर जिला प्रशासन ईंट-भट्ठा मजदूरों के लिए काम की व्यवस्था नहीं
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करता है तो लेबर आफिस में ताला बंद कर आवाज बुलंद की जाएगी। माले नेता ने भूमिहीन दलितों-गरीबों को आवासीय पट्टा के साथ आवास देने की मांग के साथ मनरेगा के तहत गांवों में सिर्फ 150 दिन ही नहीं साल भर
काम देने तथा रोजाना पांच सौ रुपया मजदूरी देने की मांग उठाई। कहा कि किसान बर्बाद हुई फसल के मुआवजा के लिए तहसील का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन गरीब एवं मझोले किसानों को राहत चेक देने के बजाए लेखपाल तथा
तहसील के अधिकारी संपन्न किसानों को दे रहे हैं। किसानों को राहत धनराशि उपलब्ध कराने में हीलाहवाली करने वाले तहसील के अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग उठाई। माले जिला सचिव रामप्यारे राम ने कहा कि
सांप्रदायिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने जन अभियान चलाकर जिला मुख्यालय पर डीएम कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी। अंत में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को संबोधित 13 सूत्रीय ज्ञापन सहायक
श्रमायुक्त को सौंपा गया। सभा में विजयबहादुर सिंह, विरेन्द्र, लालबहादुर बागी, मुराली, बुच्चीलाल, विजयी, कौशल्या देवी, कमलाकर राम, चन्द्रावती देवी, जगदीश, नंदकिशोर बिंद तथा संजय भारती ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता वासुदेव त्यागी एवं संचालन योगेंद्र भारती ने किया।