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कटान से गंगा में समाई नौ बीघे भूमि
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Sat, 01 Aug 2015 11:33 PM IST
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गंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ ही कटान का क्रम भी शुरू हो गया है। तीन दिनों में कसेरा, बयेपुर, सोकनी और बड़हरिया में लगभग नौ बीघा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो चुकी है। कटान से कसेरा और बयेपुर गांव पर खतरा मंडरा रहा है।
क्षेत्र के कसेरा, बयेपुर, सोकनी और बड़हरिया में वर्षों के गंगा कटान का सिलसिला चला रहा है। हर वर्ष गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने और पानी घटने पर जबरदस्त कटान होता है। पिछले कई दिनों से गंगा के जलस्तर से
तेजी की वृद्धि हो रही है। पानी बढ़ने के साथ गंगा कटान का भी शुरू हो गया है। तीन दिनों में कसेरा गांव के जलील खान, उस्मान खान, जमील खान, वसीर खान, नजीर खान, बादशाह खान, मुनीर खान, मकसूद खान,
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इस्लाइल खान, मुर्तजा खान, अली खान आदि की लगभग तीन बीघे भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई है। बयेपुर के सूर्यनाथ, श्रीनाथ, पारस, भोला, हरिनारायण, संग्राम, शेरू, हरिहर, राजेश आदि की लगभग डेढ़ बीघा और
सोकनी तथा बड़हरिया के लगभग दो दर्जन लोगों की पांच से छह बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। लगभग 35 वर्ष में कसेरा की लगभग दो सौ बीघा भूमि, डेढ़ सौ बीघा बयेपुर की तथा पुरैना और बड़हरिया की भी लगभग
डेढ़ से दो सौ बीघा भूमि अब तक कटान की भेंट चढ़ चुकी है। कसेरा के 80 प्रतिशत किसान भूमिहीन हो गए हैं तथा 75 प्रतिशत आबादी का दूसरे जिलों में पलायन हो चुका है।
कटान पीड़ितों का आरोप है कि कटान से बचाव के नाम पर पिछले कई वर्षों से शासन की ओर से महज आश्वासन ही दिया जा रहा है। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों ने मौका मुआयना किया, लेकिन कटान से बचाव का कार्य शुरू नहीं कराया। जनप्रतिनिधि भी सिर्फ आश्वासन का मरहम लगा रहे हैं।
गंगा का जलस्तर शनिवार को भले ही स्थिर रहा लेकिन कटान का सिलसिला जारी रहा। शनिवार को बच्छल का पुरा, सेमरा गांव में 12 मंडा कृषि योग्य भूमि कटान की भेंट चढ़ गई। सेमरा को बचाने के लिए बने ठोकर के ऊपर से
पानी का बहाव शुरू हो गया। बाढ़ का पानी ताल में गिरना शुरू हो गया है। इससे ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। कहीं अरार पानी से लबालब हैं तो कहीं दो से तीन फीट नीचे है। बच्छलका पुरा में गिरजा यादव के खेत से देवनारायण
के खेत तक कटान हुआ है। इसमें दीपनारायण यादव, सोहन यादव, अनिरुद्ध यादव, जीतन राम, सुब्बा, शर्मा राय, रामाधार, रामजी राय, श्यामा चौधरी, अयोध्या यादव आदि की जमीन कटान में समाहित हुई है। इसके अलावा
शेरपुर के मौजा 90 के किनारे उपेन्द्र पटेल, रवि राय, गोवर्द्धन यादव, विश्वनाथ यादव, रमाशंकर, तुलसी पटेल आदि की भूमि भी कटान में गई है। सेमरा के पश्चिम तरफ जहां ठोकर के ऊपर पानी बह रहा है वहां पर ग्रामीणों ने
निर्माण के समय ही ठोकर को ऊंचा करने की मांग की थी लेकिन ठेकेदारों ने ग्रामीणों की बातों की अनसुनी कर आनन-फानन में ठोकर बना दिया जिसका परिणाम आज दिखाई देने लगा है।
गंगा के जलस्तर में दो दिनों तक वृद्धि के बाद शनिवार को ठहराव आ गया है। केंद्रीय जल आयोग ने शनिवार की शाम गंगा का जलस्तर 61.960 मीटर रिकार्ड किया। फिलहाल गंगा स्थिर है। शुक्रवार को एक सेंटीमीटर प्रति घंटा
की रफ्तार से वृद्धि जारी रही और जलस्तर 61.690 मीटर दर्ज किया गया था। खतरे का निशान 63.105 है।
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क्षेत्र के कसेरा, बयेपुर, सोकनी और बड़हरिया में वर्षों के गंगा कटान का सिलसिला चला रहा है। हर वर्ष गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने और पानी घटने पर जबरदस्त कटान होता है। पिछले कई दिनों से गंगा के जलस्तर से
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तेजी की वृद्धि हो रही है। पानी बढ़ने के साथ गंगा कटान का भी शुरू हो गया है। तीन दिनों में कसेरा गांव के जलील खान, उस्मान खान, जमील खान, वसीर खान, नजीर खान, बादशाह खान, मुनीर खान, मकसूद खान,
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इस्लाइल खान, मुर्तजा खान, अली खान आदि की लगभग तीन बीघे भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई है। बयेपुर के सूर्यनाथ, श्रीनाथ, पारस, भोला, हरिनारायण, संग्राम, शेरू, हरिहर, राजेश आदि की लगभग डेढ़ बीघा और
सोकनी तथा बड़हरिया के लगभग दो दर्जन लोगों की पांच से छह बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। लगभग 35 वर्ष में कसेरा की लगभग दो सौ बीघा भूमि, डेढ़ सौ बीघा बयेपुर की तथा पुरैना और बड़हरिया की भी लगभग
डेढ़ से दो सौ बीघा भूमि अब तक कटान की भेंट चढ़ चुकी है। कसेरा के 80 प्रतिशत किसान भूमिहीन हो गए हैं तथा 75 प्रतिशत आबादी का दूसरे जिलों में पलायन हो चुका है।
कटान पीड़ितों का आरोप है कि कटान से बचाव के नाम पर पिछले कई वर्षों से शासन की ओर से महज आश्वासन ही दिया जा रहा है। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों ने मौका मुआयना किया, लेकिन कटान से बचाव का कार्य शुरू नहीं कराया। जनप्रतिनिधि भी सिर्फ आश्वासन का मरहम लगा रहे हैं।
गंगा का जलस्तर शनिवार को भले ही स्थिर रहा लेकिन कटान का सिलसिला जारी रहा। शनिवार को बच्छल का पुरा, सेमरा गांव में 12 मंडा कृषि योग्य भूमि कटान की भेंट चढ़ गई। सेमरा को बचाने के लिए बने ठोकर के ऊपर से
पानी का बहाव शुरू हो गया। बाढ़ का पानी ताल में गिरना शुरू हो गया है। इससे ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। कहीं अरार पानी से लबालब हैं तो कहीं दो से तीन फीट नीचे है। बच्छलका पुरा में गिरजा यादव के खेत से देवनारायण
के खेत तक कटान हुआ है। इसमें दीपनारायण यादव, सोहन यादव, अनिरुद्ध यादव, जीतन राम, सुब्बा, शर्मा राय, रामाधार, रामजी राय, श्यामा चौधरी, अयोध्या यादव आदि की जमीन कटान में समाहित हुई है। इसके अलावा
शेरपुर के मौजा 90 के किनारे उपेन्द्र पटेल, रवि राय, गोवर्द्धन यादव, विश्वनाथ यादव, रमाशंकर, तुलसी पटेल आदि की भूमि भी कटान में गई है। सेमरा के पश्चिम तरफ जहां ठोकर के ऊपर पानी बह रहा है वहां पर ग्रामीणों ने
निर्माण के समय ही ठोकर को ऊंचा करने की मांग की थी लेकिन ठेकेदारों ने ग्रामीणों की बातों की अनसुनी कर आनन-फानन में ठोकर बना दिया जिसका परिणाम आज दिखाई देने लगा है।
गंगा के जलस्तर में दो दिनों तक वृद्धि के बाद शनिवार को ठहराव आ गया है। केंद्रीय जल आयोग ने शनिवार की शाम गंगा का जलस्तर 61.960 मीटर रिकार्ड किया। फिलहाल गंगा स्थिर है। शुक्रवार को एक सेंटीमीटर प्रति घंटा
की रफ्तार से वृद्धि जारी रही और जलस्तर 61.690 मीटर दर्ज किया गया था। खतरे का निशान 63.105 है।