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बाढ़ में डूबी सैकड़ों बीघा फसल, टमाटर और परवल की खेती चौपट

Sat, 15 Oct 2022 10:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 15 Oct 2022 10:57 PM IST
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Hundreds of bigha crops submerged in floods, tomato and parwal cultivation destroyed
रेवतीपुर ब्लाक के विरउपुर गांव के सिवान में बाढ़ के पानी से जलमग्न हुआ खेत। - फोटो : GHAZIPUR
गंगा ने एक बार फिर अक्तूबर में रौद्ररूप दिखाना शुरू कर दिया है। तीसरी बार बढ़े जलस्तर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नगदिलपुर, हसनपुरा, बीरउपुर, नसीरपुर और अठहठा के सिवान में पानी भरने से सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है। टमाटर, मिर्च और परवल की खेती चौपट होने से किसानों की कमर टूट गई है। एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गंगा का पानी बढ़ रहा है। दोपहर दो बजे गंगा का जलस्तर 61.200 मीटर दर्ज किया गया। जबकि चेतावनी बिंदु 61.550 मीटर है।
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जिले में गंगा के जलस्तर में तीसरी बार बढ़ाव होना शुरू हुआ है। दूसरी बार में गंगा ने तटवर्ती इलाकों को अपने आगोश में ले लिया था। गंगा सबसे पहले तटवर्ती इलाकों को जलमग्न करते हुए रेवतीपुर ब्लाक के चार गांवों के सिवान में पहुंचती है। दूसरी बार आई बाढ़ ने अठाहठा गांव के लोगों को ऐसा दर्द दिया था कि जनपद ही प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। गांव के छह लोगों की नाव पलटने से डूबकर मौत हो गई थी। इधर पानी इन गांवों के सिवान में भरने के साथ फसलों को जलमग्न करते हुए आगे बढ़ रही है, जिससे एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है।
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शुक्रवार सुबह से गंगा के जलस्तर में तीन सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि हो रही थी। गंगा की रफ्तार में कुछ कमी देखने को मिली एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गंगा में वृद्धि दर्ज की गई। इस समय किसान टमाटर, मिर्च, परवल की पौध खेतों में लगाए हुए थे, जो पानी बढ़ने से डूब गई। रेवतीपुर ब्लाक के आधा दर्जन गांव के बाहर गंगा का पानी आ चुका है। फिलहाल बाढ़ का पानी गांवों में प्रवेश नहीं किया है, लेकिन फसल डूबने से किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है।
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अब तो किसानों को नहीं मिला है मुआवजा
गंगा में दूसरी बार आई बाढ़ में नष्ट हुए फसलों का अभी किसानों को मुआवजा भी नहीं मिल सका है। हालांकि सर्वे रिपोर्ट आनलाइन जिला प्रशासन की ओर से शासन को भेजा है। ऐसे में एक बार फिर तीसरी बार गंगा में आई बाढ़ ने किसानों को परेशान कर दिया है। वजह कई ऐसे इलाके हैं, जहां के सिवान एवं खेतों में बाढ़ का पानी भरा तो निकलने में कई महीने लग जाएंगे और किसानों को खेती से वंचित होना पड़ेगा।
पिछले एक महीना पहले आई बाढ़ ने हम लोगों को काफी मुसीबत में डाला था। वहीं अचानक बाढ़ आ जाने की वजह से हमारा डेढ़ बीघा परवल का खेत डूब गया।- पुतुल यादव, नगदिलपुर।
गंगा पानी आज और बढ़ा तो परवल और टमाटर की फसल डूब जाएगी। इससे काफी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। किसानों की कमर टूट गई है।- दीपक यादव, नगदिलपुर।
पिछले बार आई बाढ़ से खेती पिछड़ गई थी। ऐसे में बिलंब हो चुका था। इधर अचानक आई बाढ़ का पानी खेतों में आ गया है। जिससे काफी नुकसान होगा।- श्रीनारायण , नगदिलपुर।

बाढ़ आने से पांच बीघा परवल की फसल डूब गई, जिससे ढाई लाख रुपये का नुकसान हुआ। एक बीघा परवल बोने में खेत सहित कुल 50 हजार रुपये का खर्च आता है। - बड़क बाबा, नगदिलपुर।
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