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Ghazipur News: घोड़ा गाड़ी से पहुंचे और जगा गए आजादी की अलख
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सैदपुर में जब गांधी, खादी और आजादी की चर्चा चलती है तो लोगों के जेहन में गांधी जी की स्मृतियां ताजा हो जाती हैं। यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 2 अक्टूबर 1929 को अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी, बहन मीरा, आचार्य कृपलानी, महादेव देसाई, देवदास गांधी व अन्य कई साथियों के साथ आए थे।
सैदपुर में तत्कालीन मिडिल स्कूल जिसे नॉर्मल स्कूल और वर्तमान समय में डायट सैदपुर के नाम से जाना जाता है इस स्थल पर उन्होंने जनसभा की थी और इसके बाद नगर के वार्ड नंबर 14 आत्मा नगर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित आत्माराम पांडे के निवास शांति कुटीर में चरखा संघ का उद्घाटन किया।
गांधी जी ने अपने अहिंसावादी सिद्धांत के बल पर फिरंगियों से लोहा लेने की लड़ाई का भी आह्वान किया। गांधीजी वाराणसी से एक मोटर गाड़ी से गंगा-गोमती की संगम स्थली कैथी होते हुए औड़िहार के पास वाराह घाट पर भी रुके थे। यहां कुछ देर रूक कर संध्या वंदन भी किया। गांधी जी का दर्शन पाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा था। उन्होंने उस वक्त अपनी अहिंसावादी लड़ाई और सिद्धांत को जनता के बीच प्रमुखता से रखकर देश को आजाद कराने का ऐलान किया था।
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जिला मुख्यालय के लिए रवाना होते वक्त यहां के लोगों ने उन्हें आजादी की लड़ाई के लिए सहयोग धनराशि भी अर्पित की थी। गांधीजी को गाजीपुर लंका मैदान में सभा करनी थी किंतु उनकी मोटर गाड़ी खराब हो जाने के कारण उन्हें जिला मुख्यालय पहुंचने में विलंब हुआ। गाड़ी न बन पाने की स्थिति में घोड़ा गाड़ी की व्यवस्था कर आनन-फानन में जिला मुख्यालय भेजा गया।
लंका मैदान में उनकी सभा हुई और वहां भी काफी भीड़ उमड़ी थी। सैदपुर क्षेत्र की जनता उनका दर्शन पाकर अभिभूत थी। यही कारण था कि आजादी की लड़ाई में क्षेत्र के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अंग्रेजी पलटन के छक्के छुड़ाए। अपने प्राणों की बलि देकर आजादी की अलख जगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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सैदपुर में तत्कालीन मिडिल स्कूल जिसे नॉर्मल स्कूल और वर्तमान समय में डायट सैदपुर के नाम से जाना जाता है इस स्थल पर उन्होंने जनसभा की थी और इसके बाद नगर के वार्ड नंबर 14 आत्मा नगर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित आत्माराम पांडे के निवास शांति कुटीर में चरखा संघ का उद्घाटन किया।
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गांधी जी ने अपने अहिंसावादी सिद्धांत के बल पर फिरंगियों से लोहा लेने की लड़ाई का भी आह्वान किया। गांधीजी वाराणसी से एक मोटर गाड़ी से गंगा-गोमती की संगम स्थली कैथी होते हुए औड़िहार के पास वाराह घाट पर भी रुके थे। यहां कुछ देर रूक कर संध्या वंदन भी किया। गांधी जी का दर्शन पाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा था। उन्होंने उस वक्त अपनी अहिंसावादी लड़ाई और सिद्धांत को जनता के बीच प्रमुखता से रखकर देश को आजाद कराने का ऐलान किया था।
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जिला मुख्यालय के लिए रवाना होते वक्त यहां के लोगों ने उन्हें आजादी की लड़ाई के लिए सहयोग धनराशि भी अर्पित की थी। गांधीजी को गाजीपुर लंका मैदान में सभा करनी थी किंतु उनकी मोटर गाड़ी खराब हो जाने के कारण उन्हें जिला मुख्यालय पहुंचने में विलंब हुआ। गाड़ी न बन पाने की स्थिति में घोड़ा गाड़ी की व्यवस्था कर आनन-फानन में जिला मुख्यालय भेजा गया।
लंका मैदान में उनकी सभा हुई और वहां भी काफी भीड़ उमड़ी थी। सैदपुर क्षेत्र की जनता उनका दर्शन पाकर अभिभूत थी। यही कारण था कि आजादी की लड़ाई में क्षेत्र के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अंग्रेजी पलटन के छक्के छुड़ाए। अपने प्राणों की बलि देकर आजादी की अलख जगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।