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बारिश से बर्बाद होने के बाद धान को लगा हल्दिया रोग
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बीते माह कई दिनों तक हुई बारिश से खेतों में खड़ी धान न गिर कर खराब हो गई। अब वातावरण में नमी का स्तर अधिक हो जाने के कारण धान की फसल में हल्दिया रोग का प्रकोप है। धान के पौधों में भुनगा और गंधी कीट लग जाने से उपज के कम होने का खतरा भी बढ़ गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बार-बार आए बदलाव का प्रतिकूल असर धान की फसल पर भी पड़ा है। शुरुआत में अच्छी बारिश होने से धान की फसल को फायदा तो जरूर हुआ। जिससे अच्छी फसल की उम्मीद भी हो गई थी, लेकिन जैसे ही बालियां आने लगीं। वैसे ही बारिश शुरू हो गई। फिर कईं दिनों तक हुई लगातार बारिश ने तो किसानों के होश ही उड़ा दिए। क्षेत्र के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ गया है, लेकिन अब जबकि फसल कटने को तैयार हो गई है। धान की फसल में हल्दिया रोग लगने लगा है। खेतों में लहरा रही फसलें खराब होने लगी हैं। जलभराव वाले इलाके की फसलों में कंडुआ रोग लग गया है। इस बीमारी में भूरे रंग के कीट पत्तियों और बालियों का रस चूस कर फसल को नष्ट कर दे रहे हैं। दवा के छिड़काव का भी अब कोई असर नहीं पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार को ऐसे में धान की फसल के नुकसान का आंकलन करके मुआवजा देना चाहिए।
रोग का प्रकोप दूर करने के लिए स्यूडोमोनास फ्लोरिसेंस कृषि रक्षा रसायन को पांच ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए। जबकि मैलाथियान पांच प्रतिशत सांद्रता वाला कीटनाशक पाउडर का 20-25 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। - सुदामा पाल, सहायक विकास अधिकारी, कृषि रक्षा, गाजीपुर
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विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बार-बार आए बदलाव का प्रतिकूल असर धान की फसल पर भी पड़ा है। शुरुआत में अच्छी बारिश होने से धान की फसल को फायदा तो जरूर हुआ। जिससे अच्छी फसल की उम्मीद भी हो गई थी, लेकिन जैसे ही बालियां आने लगीं। वैसे ही बारिश शुरू हो गई। फिर कईं दिनों तक हुई लगातार बारिश ने तो किसानों के होश ही उड़ा दिए। क्षेत्र के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ गया है, लेकिन अब जबकि फसल कटने को तैयार हो गई है। धान की फसल में हल्दिया रोग लगने लगा है। खेतों में लहरा रही फसलें खराब होने लगी हैं। जलभराव वाले इलाके की फसलों में कंडुआ रोग लग गया है। इस बीमारी में भूरे रंग के कीट पत्तियों और बालियों का रस चूस कर फसल को नष्ट कर दे रहे हैं। दवा के छिड़काव का भी अब कोई असर नहीं पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार को ऐसे में धान की फसल के नुकसान का आंकलन करके मुआवजा देना चाहिए।
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रोग का प्रकोप दूर करने के लिए स्यूडोमोनास फ्लोरिसेंस कृषि रक्षा रसायन को पांच ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए। जबकि मैलाथियान पांच प्रतिशत सांद्रता वाला कीटनाशक पाउडर का 20-25 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। - सुदामा पाल, सहायक विकास अधिकारी, कृषि रक्षा, गाजीपुर
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