भांवरकोल। स्थानीय विकास खंड क्षेत्र के सियाड़ी गांव के तिवारी का डेरा पुन्नीपुर में श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस में अयोध्या से आए 1008 महामंडलेश्वर अमर दास महाराज ने बुधवार को कहा कि भगवान के अवतार का मुख्य कारण राक्षसों को मारना नहीं, बल्कि भक्तों के ऊपर कृपा करना था। भगवान विदुर के घर केले के छिलके खाए, लेकिन दुर्योधन के घर मेवा का भी परित्याग कर दिया। भगवान तो भाव के भूखे हैं। भगवान श्री कृष्ण का परिवार वैसे तो बहुत बड़ा है, लेकिन परिवार में किसी प्रकार का कोई कलह नहीं है। इसका एक मुख्य कारण यह है कि पूरे परिवार में आपसी सहमति एवं प्रेम है, जो आज के समाज में बहुत कम देखने को मिलता है। परिवार की समस्या को लोग परिवार के बीच नहीं बल्कि कोर्ट के बीच सुलझाना चाहते हैं, परिणाम विवाद रूकने की जगह बढ़ जाता है। भगवान श्री कृष्ण के चरित्र से यह शिक्षा मिलती है कि बड़ा परिवार होने पर भी आपसी प्रेम कैसे बना कर रखें। कृष्ण ने सुदामा जैसे गरीब को भी धनवान बना दिया। ये भगवान की उदारता को दर्शाता है। मित्र के साथ व्यवहार कैसा होना चाहिए ये तो कोई उनसे से सीखे। कथा समापन के अवसर पर आयोजक विवेकानंद तिवारी और प्रेमचंद तिवारी ने कहा कि कथा के पश्चात हवन पूर्णाहुति कर्मकांड (पूजन ) का कार्य बड़क पांडेय ने संपन्न करवाया। भंडारा का कार्यक्रम 30 सितंबर को रखा गया है। इस अवसर पर हृषिकेश तिवारी, ऋषिकेश तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।