{"_id":"6647bf63881f513e5305a8e6","slug":"from-gram-seller-to-beard-and-hair-groomer-contesting-elections-ghazipur-news-c-313-svns1023-114793-2024-05-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: चना बेचने से लेकर दाढ़ी-बाल बनाने वाले तक लड़ रहे चुनाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: चना बेचने से लेकर दाढ़ी-बाल बनाने वाले तक लड़ रहे चुनाव
विज्ञापन
गाजीपुर। गाजीपुर लोकसभा चुनाव इस बार कई मायने में रोचक है। इस चुनाव में चना बेचने वाले से लेकर दाढ़ी-बाल बनाने वाले अपना भाग्य आजमा रहे हैं। सभी प्रत्याशी अपनी जीत के लिए पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार में जुटे हैं।
गुजरात से लेकर गोरखपुर तक घूम-घूम कर बेचते हैं चना
अंधऊ निवासी ज्ञानचंद्र बिंद चुनावी मैदान में हैं। वे कहते हैं मैं गुजरात से लेकर गोरखपुर तक घूम-घूम कर चना बेचता हूं। जरूरत पड़ने पर मजदूरी भी कर लेता हूं। बदले में रोजाना 500 से 1000 रुपये बचत मिल जाते हैं। वह इस बार होली घर आए थे। इन दिनों चुनाव लड़ने की इच्छा मन में जागी और जीतकर कुछ करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने नामांकन भी कर दिया है।
चलाते हैं सैलून, एक घंटे ही कर रहे काम, बाकी समय प्रचार
पदुमपुर भैगर राम निवासी राम प्रवेश भी चुनाव लड़ रहे हैं। ये सैलून चलाते हैं। 39 वर्षीय राम प्रवेश बताते हैं कि उनके साथ सैलून पर एक कारीगर भी काम करता है। इस समय वो सैलून केवल रविवार को एक घंटे के लिए खोल रहे हैं, जबकि बाकी समय प्रचार कर रहे हैं।
विज्ञापन
करते हैं पशु पालन, आजमगढ़ से आकर लड़ रहे चुनाव
आदित्य श्रीवास्तव भी लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वो आजमगढ़ जिले के खरिहानी गांव के निवासी हैं। 2019 में स्नातक (बीए) तक पढ़ाई करने वाले आदित्य श्रीवास्तव खेती और पशु पालन करते हैं। इनके पास चार गाय हैं। वे कहते हैं अब वे राजनीति में सक्रिय हुए हैं। उनकी पार्टी ने यहां से चुनाव लड़ने के लिए कहा है इसलिए उन्होंने यहां से नामांकन किया है। इस समय गाजीपुर में ही रहकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
मोदी-मुलायम के खिलाफ लड़ चुके हैं चुनाव
गाजीपुर। ग्राम सराय पीर मोहम्मद पोस्ट-चौकिया निवासी सत्यदेव यादव ने निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान मैं हैं। वो कहते हैं कि 28 बार चुनाव लड़ चुके हैं। वो बसपा और भाजपा में भी शामिल रहे हैं, तीन बार ग्राम प्रधान चुने गए हैं। वह हर बार विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव लड़़ते हैं। यह अलग बात है कि जमानत तक नहीं बचा पाते हैं। उन्होंने मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आजमगढ़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से भी नामांकन किया था। पिछले लोकसभा चुनाव में वो घोड़े पर सवार होकर नामांकन करने कलेक्ट्रेट तक पहुंचे थे। उसके पहले बैलगाड़ी से नामांकन करने गए थे।
विज्ञापन
गुजरात से लेकर गोरखपुर तक घूम-घूम कर बेचते हैं चना
अंधऊ निवासी ज्ञानचंद्र बिंद चुनावी मैदान में हैं। वे कहते हैं मैं गुजरात से लेकर गोरखपुर तक घूम-घूम कर चना बेचता हूं। जरूरत पड़ने पर मजदूरी भी कर लेता हूं। बदले में रोजाना 500 से 1000 रुपये बचत मिल जाते हैं। वह इस बार होली घर आए थे। इन दिनों चुनाव लड़ने की इच्छा मन में जागी और जीतकर कुछ करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने नामांकन भी कर दिया है।
विज्ञापन
चलाते हैं सैलून, एक घंटे ही कर रहे काम, बाकी समय प्रचार
पदुमपुर भैगर राम निवासी राम प्रवेश भी चुनाव लड़ रहे हैं। ये सैलून चलाते हैं। 39 वर्षीय राम प्रवेश बताते हैं कि उनके साथ सैलून पर एक कारीगर भी काम करता है। इस समय वो सैलून केवल रविवार को एक घंटे के लिए खोल रहे हैं, जबकि बाकी समय प्रचार कर रहे हैं।
विज्ञापन
करते हैं पशु पालन, आजमगढ़ से आकर लड़ रहे चुनाव
आदित्य श्रीवास्तव भी लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वो आजमगढ़ जिले के खरिहानी गांव के निवासी हैं। 2019 में स्नातक (बीए) तक पढ़ाई करने वाले आदित्य श्रीवास्तव खेती और पशु पालन करते हैं। इनके पास चार गाय हैं। वे कहते हैं अब वे राजनीति में सक्रिय हुए हैं। उनकी पार्टी ने यहां से चुनाव लड़ने के लिए कहा है इसलिए उन्होंने यहां से नामांकन किया है। इस समय गाजीपुर में ही रहकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
मोदी-मुलायम के खिलाफ लड़ चुके हैं चुनाव
गाजीपुर। ग्राम सराय पीर मोहम्मद पोस्ट-चौकिया निवासी सत्यदेव यादव ने निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान मैं हैं। वो कहते हैं कि 28 बार चुनाव लड़ चुके हैं। वो बसपा और भाजपा में भी शामिल रहे हैं, तीन बार ग्राम प्रधान चुने गए हैं। वह हर बार विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव लड़़ते हैं। यह अलग बात है कि जमानत तक नहीं बचा पाते हैं। उन्होंने मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आजमगढ़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से भी नामांकन किया था। पिछले लोकसभा चुनाव में वो घोड़े पर सवार होकर नामांकन करने कलेक्ट्रेट तक पहुंचे थे। उसके पहले बैलगाड़ी से नामांकन करने गए थे।