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गाजीपुर में बाढ़ः संपर्क मार्गों पर चढ़ा पानी, नाव से गृहस्थी का सामान पहुंचाना भी हो गया है मुश्किल
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शहर का डूबा श्मशान घाट। संवाद
- फोटो : GHAZIPUR
बाढ़ के कारण गाजीपुर के जमानिया तहसील क्षेत्र के रामपुर पट्टी, सरनाम खां, पाह सैयदराजा, कालनपुर, मलसा देवरिया सब्बलपुर मंझरिया चितावनपट्टी राघोपुर जगदीशपुर, रघुनाथपुर बांड़, जीवपुर बांड़, सब्बलपुर बांड़, मतसा बांड़ तथा देवरिया बांड़ सहित कई आबादी वाले क्षेत्रों में बाढ़ का पानी आ चुका है। इस त्रासदी से प्रभावित क्षेत्रों में हाहाकार मचा हुआ है। बाढ़ प्रभावित लोग पशुओं सहित गृहस्थी के सामान को लेकर नाव के द्वारा सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन संपर्क मार्गो पर बाढ़ का पानी चढ़ गया है जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
सब्बलपुर निवासी रमाकांत यादव, मुन्ना, कन्हैया, शिवमुनी, सोनू यादव, शिव यादव, रघुनाथपुर बांड़ निवासी देवमूरत यादव, चंद्रमा यादव, जितेंद्र, उमेश आदि ने बताया कि बाढ़ के कारण सब कुछ नष्ट हो चुका है। प्रशासन के लोग या सत्तारूढ़ दल के नेता अभी तक इस क्षेत्र में हम लोगों की सुधि लेने नहीं आए।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन का व्यापक सुविधा देने का दावा झूठा साबित हो रहा है। अभी तक कुछ सुविधा नहीं मिल पाई है। सिर्फ अधिकारी घूमकर चले जाते हैं। सुविधा न मिलने से स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। नाव की मांग की जा रही है लेकिन अभी तक नाव नहीं मिल पाई है। अभी भी बड़ी संख्या में लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं। जीव-जंतु के आने से रात भर जागना पड़ रहा है। पशुओं के खाने का भूसा एवं हरा चारा सब कुछ नष्ट हो गया है। पशुओं के चारे का संकट गहरा गया है। हम लोग चारे को लेकर काफी परेशान हो गए हैं।
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सब्बलपुर निवासी रमाकांत यादव, मुन्ना, कन्हैया, शिवमुनी, सोनू यादव, शिव यादव, रघुनाथपुर बांड़ निवासी देवमूरत यादव, चंद्रमा यादव, जितेंद्र, उमेश आदि ने बताया कि बाढ़ के कारण सब कुछ नष्ट हो चुका है। प्रशासन के लोग या सत्तारूढ़ दल के नेता अभी तक इस क्षेत्र में हम लोगों की सुधि लेने नहीं आए।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन का व्यापक सुविधा देने का दावा झूठा साबित हो रहा है। अभी तक कुछ सुविधा नहीं मिल पाई है। सिर्फ अधिकारी घूमकर चले जाते हैं। सुविधा न मिलने से स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। नाव की मांग की जा रही है लेकिन अभी तक नाव नहीं मिल पाई है। अभी भी बड़ी संख्या में लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं। जीव-जंतु के आने से रात भर जागना पड़ रहा है। पशुओं के खाने का भूसा एवं हरा चारा सब कुछ नष्ट हो गया है। पशुओं के चारे का संकट गहरा गया है। हम लोग चारे को लेकर काफी परेशान हो गए हैं।
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