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बड़हरिया में कटान तेज
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Thu, 13 Oct 2016 11:40 PM IST
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जगदीशपुर में गंगा की बैकरोलिंग से कटता रिहायशी इलाका।
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गंगा का जलस्तर घटने के बाद नदी तट पर बसे लोगों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन कई इलाकों में अब भी मुसीबत टली नहीं है। गंगा के पीछे हटते कदम ने अब बड़हरिया गांव में तेज कटान शुरू कर दिया है। पिछले 24 घंटे के दौरान 12 बीघे से अधिक उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। ऐसे में कटान प्रभावित गांवों के लोग चिंतित हैं। पीड़ितों ने जिला प्रशासन से राहत बचाव कार्य कराने की मांग की है।
बीते बुधवार को मध्य रात्रि में नदी का कटान अचानक तेज हो गया। तीव्र कटान के कारण जमीन के बड़े-बड़े हिस्से टूटकर पानी में विलीन होने लगे। जिससे लोग नींद से उठकर तट की तरफ चल दिए। तटवर्ती इलाके में पूरी रात दहशत कायम रहा। गुरुवार की सुबह गांव के ज्यादातर लोगों के चेहरे पर चिंता के भाव स्पष्ट दिख रहे थे।बड़हरिया के राम अवतार यादव, सुदामा यादव आदि का कहना है कि प्रकृति हमें भूमिहीन के साथ-साथ बेघर करने पर आतुर है।
कटान की तीव्रता ऐसे ही बरकरार रही, तो हमारा कुछ न बचेगा। किसान हमेशा परिवार के खाने के लिए अनाज पैदा करने तथा गृहस्थी चलाने में परेशान रहता है। हमारे जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी पूरी तरह से संवेदन शून्य हैं। इतने दिनों से हो रही कटान को देखने तक को ई नहीं पहुंचा। कुछ दिनों पहले सूबे के कबीना मंत्री विजय मिश्रा इलाके में पहुंचे जरूर थे, लेकिन उन्हें भी कटान पीड़ितों का हाल जानने के लिए फुरसत तक नहीं मिली।
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ग्रामीणों का कहना था कि मंत्री जी नवरात्रि में रामलीला मंचों तक कटारिया, करकटपुर, धरमरपुर, पुरैना, सोकनी, बड़सरा और आगे के गांवों तक गए थे, लेकिन कटान पीड़ितों का हाल जानना उन्होंने उचित नहीं समझा। उपेक्षा से लोगों में नाराजगी है।
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बीते बुधवार को मध्य रात्रि में नदी का कटान अचानक तेज हो गया। तीव्र कटान के कारण जमीन के बड़े-बड़े हिस्से टूटकर पानी में विलीन होने लगे। जिससे लोग नींद से उठकर तट की तरफ चल दिए। तटवर्ती इलाके में पूरी रात दहशत कायम रहा। गुरुवार की सुबह गांव के ज्यादातर लोगों के चेहरे पर चिंता के भाव स्पष्ट दिख रहे थे।बड़हरिया के राम अवतार यादव, सुदामा यादव आदि का कहना है कि प्रकृति हमें भूमिहीन के साथ-साथ बेघर करने पर आतुर है।
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कटान की तीव्रता ऐसे ही बरकरार रही, तो हमारा कुछ न बचेगा। किसान हमेशा परिवार के खाने के लिए अनाज पैदा करने तथा गृहस्थी चलाने में परेशान रहता है। हमारे जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी पूरी तरह से संवेदन शून्य हैं। इतने दिनों से हो रही कटान को देखने तक को ई नहीं पहुंचा। कुछ दिनों पहले सूबे के कबीना मंत्री विजय मिश्रा इलाके में पहुंचे जरूर थे, लेकिन उन्हें भी कटान पीड़ितों का हाल जानने के लिए फुरसत तक नहीं मिली।
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ग्रामीणों का कहना था कि मंत्री जी नवरात्रि में रामलीला मंचों तक कटारिया, करकटपुर, धरमरपुर, पुरैना, सोकनी, बड़सरा और आगे के गांवों तक गए थे, लेकिन कटान पीड़ितों का हाल जानना उन्होंने उचित नहीं समझा। उपेक्षा से लोगों में नाराजगी है।