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शिवालयों में उमड़ेगा भक्तों का रेला
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Tue, 19 Jul 2016 11:49 PM IST
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lord shiva
- फोटो : getty images
इस वर्ष 20 जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो रही है। पर्व के पहले दिन बुधवार को शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भक्तों का रेला उमड़ेगा। इस दौरान भक्त बाबा का जलाभिषेक करने के साथ ही उनका पूजन-अर्चन कर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। इस दौरान हर-हर महादेव के उद्घोष से लहुरी काशी गूंज उठेगी।
सावन माह को पवित्र माना जाता है। पूरे माह पूजन-अर्चन का कार्य चलता है। देवाधिदेव के जलाभिषेक का महत्व है। बड़ी संख्या में सावन माह के प्रत्येक रविवार को बाबा के भक्त जिला मुख्यालय से 35 किलो मीटर दूर महाहाहर धाम में भोले का जलाभिषेक करने के लिए जाते हैं। सावन के पहले सोमवार को महाहर धाम में जलाभिषेक करने के लिए रविवार को शहर में कांवरियों का हुजूम उमड़ता है। सुबह से कांवरियों के आने का जो क्रम शुरू होता है, वहां देर रात तक जारी रहता है। विभिन्न साधनों से कांवरिए शहर में पहुंचते हैं। इसके बाद मिश्रबाजार सहित अन्य बाजारों में सजे कांवर की दूकानों से पूजा संबंधित सामानों की खरीदारी करने के बाद विभिन्न गंगा घाटों के लिए रवाना होते हैं। घाटों पर गंगा स्नान के बाद पूजन-अर्चन करते है। इसके बाद नंगे पांव हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए महाहर धाम के लिए रवाना होते है। कांवरियों की भीड़ में महिलाओं, युवतियों सहित छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल रहते है। भोले हर लिहन कुल कष्ट, बोल बम आदि का जयघोष किए जाने से आसपास का माहौल शिवमय बना रहता है। सावन माह के प्रत्येक रविवार और सोमवार को आलम यह रहता है कि गंगा घाटों पर जाने वाले मार्गों पर जिधर नजर जाती है, उधर गेरुआधारी ही दिखाई देते है। सावन माह के पहले दिन आज शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के शिव मंदिरों में भक्तों का रेला उमड़ेगा। भक्त औढरदानी का दशर्न-पूजन कर परिवार की मंगल की कामना करेंगे।
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सावन माह को पवित्र माना जाता है। पूरे माह पूजन-अर्चन का कार्य चलता है। देवाधिदेव के जलाभिषेक का महत्व है। बड़ी संख्या में सावन माह के प्रत्येक रविवार को बाबा के भक्त जिला मुख्यालय से 35 किलो मीटर दूर महाहाहर धाम में भोले का जलाभिषेक करने के लिए जाते हैं। सावन के पहले सोमवार को महाहर धाम में जलाभिषेक करने के लिए रविवार को शहर में कांवरियों का हुजूम उमड़ता है। सुबह से कांवरियों के आने का जो क्रम शुरू होता है, वहां देर रात तक जारी रहता है। विभिन्न साधनों से कांवरिए शहर में पहुंचते हैं। इसके बाद मिश्रबाजार सहित अन्य बाजारों में सजे कांवर की दूकानों से पूजा संबंधित सामानों की खरीदारी करने के बाद विभिन्न गंगा घाटों के लिए रवाना होते हैं। घाटों पर गंगा स्नान के बाद पूजन-अर्चन करते है। इसके बाद नंगे पांव हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए महाहर धाम के लिए रवाना होते है। कांवरियों की भीड़ में महिलाओं, युवतियों सहित छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल रहते है। भोले हर लिहन कुल कष्ट, बोल बम आदि का जयघोष किए जाने से आसपास का माहौल शिवमय बना रहता है। सावन माह के प्रत्येक रविवार और सोमवार को आलम यह रहता है कि गंगा घाटों पर जाने वाले मार्गों पर जिधर नजर जाती है, उधर गेरुआधारी ही दिखाई देते है। सावन माह के पहले दिन आज शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के शिव मंदिरों में भक्तों का रेला उमड़ेगा। भक्त औढरदानी का दशर्न-पूजन कर परिवार की मंगल की कामना करेंगे।
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