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भविष्य निधि में गोलमाल की जांच करने पहुंची आडिट टीम
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गाजीपुर। शादियाबाद थाना क्षेत्र के मलिकपुरा डिग्री कालेज में प्राचार्य सहित चार शिक्षकों के भविष्य निधि खाते से करीब 44 लाख रुपये के गबन का मामला प्रकाश में आने के बाद इलाहाबाद उच्च शिक्षा निदेशालय की चार सदस्सीय आडिट टीम सोमवार को विद्यालय पर पहुंची। इससे कालेज के बाबुओं और शिक्षकों में हड़कंप मचा रहा। टीम ने पूर्व प्राचार्य को उपस्थित होने के लिए कहा था, लेकिन वह अंतत: उपस्थित नहीं हुए। जांच टीम के घेरे में एक रिटायर्ड प्राचार्य तथा वर्तमान के बाबू हैं।
शादियाबाद थाना क्षेत्र के मलिकपुरा डिग्री कालेज में एक महिला समेत तीन शिक्षकों और प्राचार्य के खाते से करीब 44 लाख रुपये निकाला गया है। सूत्रों की मानें तो कालेज ने आशंका व्यक्त किया है कि कालेज में कार्यरत एक लिपिक की मदद से यह घोटाला किया गया है। घोटाला 2017 से ही लगातार किया जा रहा है। इस मामले की पोल तब खुली, जब उच्च शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद से एक शिक्षक को फोन पर 14 लाख के लोन सेंक्शन होने की बात पूछी गई। उन्हें बताया गया कि आपका लोन स्वीकृत हो गया है। इसके बाद महाविद्यालय प्रशासन के कान खड़े हो गए और एक-एक कर सभी शिक्षकों ने अपने जीपीएफ एकाउंट की जानकारी लेनी शुरू की तो इसमें से यह जानकारी सामने आई की शिक्षका पुष्पा सिंह के खाते से आठ लाख, शिवशंकर मिश्र के खाते से चार लाख, कैलाशनाथ तिवारी के खाते से 18 लाख तथा प्राचार्य से बालमुकुंद सिंह 13 लाख पचास हजार रुपये निकाल लिए गए। इसके बाद एक शिक्षक के एकाउंट से दूसरी किस्त 14 लाख का लोन दोबारा स्वीकृत हुआ है। इसकी जानकारी होने के बाद शिक्षकों में हड़कंप मचा रहा। इस मामले में पीड़ित शिक्षक कुछ बताने से घबरा रहे हैं। टीम ने बताया कि पूर्व प्राचार्य ओम प्रकाश सिंह से इस संबंध में पूछताछ करना जरूरी था, लेकिन वह कालेज पर नहीं आए। इसके बाद टीम उनके घर पहुंची, लेकिन वह वहां से भी गायब थे। इस मामले की जांच करने सोमवार को शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद के सीनियन आडिटर जीडी गौतम, आलोक पांडेय, एस बंसल तथा शिवशरण जांच करने मलिकपुरा डिग्री कालेज गाजीपुर आए थे। इस पूरे प्रकरण की जांच पड़ताल की जा रही है।
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शादियाबाद थाना क्षेत्र के मलिकपुरा डिग्री कालेज में एक महिला समेत तीन शिक्षकों और प्राचार्य के खाते से करीब 44 लाख रुपये निकाला गया है। सूत्रों की मानें तो कालेज ने आशंका व्यक्त किया है कि कालेज में कार्यरत एक लिपिक की मदद से यह घोटाला किया गया है। घोटाला 2017 से ही लगातार किया जा रहा है। इस मामले की पोल तब खुली, जब उच्च शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद से एक शिक्षक को फोन पर 14 लाख के लोन सेंक्शन होने की बात पूछी गई। उन्हें बताया गया कि आपका लोन स्वीकृत हो गया है। इसके बाद महाविद्यालय प्रशासन के कान खड़े हो गए और एक-एक कर सभी शिक्षकों ने अपने जीपीएफ एकाउंट की जानकारी लेनी शुरू की तो इसमें से यह जानकारी सामने आई की शिक्षका पुष्पा सिंह के खाते से आठ लाख, शिवशंकर मिश्र के खाते से चार लाख, कैलाशनाथ तिवारी के खाते से 18 लाख तथा प्राचार्य से बालमुकुंद सिंह 13 लाख पचास हजार रुपये निकाल लिए गए। इसके बाद एक शिक्षक के एकाउंट से दूसरी किस्त 14 लाख का लोन दोबारा स्वीकृत हुआ है। इसकी जानकारी होने के बाद शिक्षकों में हड़कंप मचा रहा। इस मामले में पीड़ित शिक्षक कुछ बताने से घबरा रहे हैं। टीम ने बताया कि पूर्व प्राचार्य ओम प्रकाश सिंह से इस संबंध में पूछताछ करना जरूरी था, लेकिन वह कालेज पर नहीं आए। इसके बाद टीम उनके घर पहुंची, लेकिन वह वहां से भी गायब थे। इस मामले की जांच करने सोमवार को शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद के सीनियन आडिटर जीडी गौतम, आलोक पांडेय, एस बंसल तथा शिवशरण जांच करने मलिकपुरा डिग्री कालेज गाजीपुर आए थे। इस पूरे प्रकरण की जांच पड़ताल की जा रही है।
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