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डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर की परिवार की मंगल कामना
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sun, 06 Nov 2016 10:47 PM IST
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छठ पूजा
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सूर्य उपासना के पर्व डाला छठ पर अस्ताचल भगवान सूर्य को प्रथम अर्घ्य रविवार की शाम को दिया गया। व्रती महिलाएं समूहों में छठ मैया के गीत गाते हुए घाटों पर पहुंची। शहर के साथ ही सभी ग्रामीण क्षेत्र के गंगा घाटों, पोखरों, नहरों एवं तालाबों पर श्रद्धालु महिलाओं की भीड़ उमड़ी। व्रती महिलाओं ने मां गंगा की गोद में खड़े होकर सूर्यदेव की आराधना की। परिवार के लोगों ने सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। पर्व को लेकर व्रती महिलाओं सहित उनके परिवार के लोगों में जबरदस्त उत्साह दिखा।
दोपहर ढाई बजे के बाद व्रती महिलाओं तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों का गंगा घाटों के लिए निकलने का सिलसिला शुरु हो गया था। शाम को चार बजते-बजते सभी गंगा घाटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच गए। घाटों पर पहुंची व्रती महिलाएं सुपली में फल, सुपारी, नारियल, पान की पत्ती, अगरौटा आदि पूजा संबंधित सामानों को लेकर पहुंची। इसके बाद वेदी को गंगा जल से धोकर धूप-अगरबत्ती जलाने और ईख को खड़ा कर कलश स्थापित किया।
करीब डेढ़ से दो घंटे तक पूजन-अर्चन किया। सूर्यास्त से पहले व्रती महिलाएं गंगा में पहुंची और हाथों में सुपली लेकर सूर्य की उपासना की। बाद में अस्त होते सूर्य को व्रती महिलाओं के पुत्र, पति, बेटी सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने छह बार दूध और गंगा जल का अर्घ्य दिया। शहर के ददरीघाट, चीतनाथ घाट, कलेक्टर घाट, स्टीमर घाट, सिकंदरपुर घाट, पत्थर घाट, बड़ा महादेवा घाट, छोटा महादेवा घाट, कोयला घाट, अंजही घाट, नवापुरा घाट सहित अन्य घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। अर्घ्य का कार्य संपन्न होने के बाद व्रती महिलाएं तथा उनके घर के सदस्य घरों के लिए घाटों से रवाना हुए। घाटों पर परिवार के साथ पहुंचे बच्चों ने जमकर आतिशबाजी की।
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दोपहर ढाई बजे के बाद व्रती महिलाओं तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों का गंगा घाटों के लिए निकलने का सिलसिला शुरु हो गया था। शाम को चार बजते-बजते सभी गंगा घाटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच गए। घाटों पर पहुंची व्रती महिलाएं सुपली में फल, सुपारी, नारियल, पान की पत्ती, अगरौटा आदि पूजा संबंधित सामानों को लेकर पहुंची। इसके बाद वेदी को गंगा जल से धोकर धूप-अगरबत्ती जलाने और ईख को खड़ा कर कलश स्थापित किया।
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करीब डेढ़ से दो घंटे तक पूजन-अर्चन किया। सूर्यास्त से पहले व्रती महिलाएं गंगा में पहुंची और हाथों में सुपली लेकर सूर्य की उपासना की। बाद में अस्त होते सूर्य को व्रती महिलाओं के पुत्र, पति, बेटी सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने छह बार दूध और गंगा जल का अर्घ्य दिया। शहर के ददरीघाट, चीतनाथ घाट, कलेक्टर घाट, स्टीमर घाट, सिकंदरपुर घाट, पत्थर घाट, बड़ा महादेवा घाट, छोटा महादेवा घाट, कोयला घाट, अंजही घाट, नवापुरा घाट सहित अन्य घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। अर्घ्य का कार्य संपन्न होने के बाद व्रती महिलाएं तथा उनके घर के सदस्य घरों के लिए घाटों से रवाना हुए। घाटों पर परिवार के साथ पहुंचे बच्चों ने जमकर आतिशबाजी की।
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