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Ghazipur News: महंगाई और ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे व्यवसायी

Tue, 13 May 2025 12:11 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 13 May 2025 12:11 AM IST
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Businessmen are struggling with inflation and online competition
जमानिया। वर्तमान में पारंपरिक किराना व्यवसाय एक कठिन दौर से गुजर रहा है। एक ओर महंगाई की मार और दूसरी ओर ऑनलाइन रिटेल कंपनियों की आक्रमक नीति ने छोटे किराना दुकानदारों के व्यापार को चुनौती में डाल दिया है।
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छोटे गांव से लेकर कस्बों में लंबे समय से लोगों की जरूरतें पूरी करने वाले स्थानीय किराना व्यवसायी ग्राहकों की घटती संख्या और बढ़ती लागत से परेशान हैं। खाद्य पदार्थों, तेल, दाल, साबुन, नमक जैसे दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ता की क्रय शक्ति प्रभावित हुई है।
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इसके चलते खुदरा दुकानदारों को भी सीमित स्टॉक और कम मुनाफे में काम करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर ई-कॉमर्स कंपनियों ने छूट, होम डिलीवरी और आसान भुगतान विकल्प, वापसी आदि देकर उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित किया है।
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इससे परंपरागत दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही में गिरावट आई है। स्थानीय किराना व्यवसायी अखिलेश सिंह ने बताया कि पहले जहां रोजाना 100 से ज्यादा ग्राहक आते थे, अब वह संख्या घटकर 50 -60 के आस-पास रह गई है। मुनाफा कम होता जा रहा है और माल खरीदने के लिए पूंजी जुटाना भी मुश्किल हो रहा है। बढ़ते दुकान का किराया, बिजली बिल और परिवहन खर्च जैसे अतिरिक्त भार ने व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अधिकांश किराना दुकानदारों के लिए बैंक से ऋण लेना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, जिससे वे अपने व्यापार का विस्तार नहीं कर पा रहे।
हालांकि अधिकतर दुकानदार अब डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं को शामिल कर आधुनिक तरीकों से ग्राहकों को जोड़े रखने की कोशिश कर रहे हैं।
व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष सतीश जायसवाल ने बताया कि सरकार को छोटे व्यापारियों के लिए विशेष राहत पैकेज, सस्ता लोन और डिजिटल प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि यह वर्ग तेजी से बदलते बाजार में खुद को टिकाए रख सके।

अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में पारंपरिक किराना दुकानें धीरे-धीरे बाजार से गायब हो सकती हैं। सरकार और समाज को मिलकर इन्हें सहारा देने की आवश्यकता है क्योंकि यही स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
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