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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Billa sentenced to life imprisonment convicted of molestation of girl in Ghazipur

नए कानून के बाद बड़ा फैसला: 145 दिन में दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद, ढाई साल की मासूम से की थी दरिंदगी

Sat, 21 Dec 2024 06:11 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 21 Dec 2024 06:11 PM IST
सार

गाजीपुर जिले में मासूम के साथ दुष्कर्म के दोषी बिल्ला को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही अदालत ने 40 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। 

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Billa sentenced to life imprisonment convicted of molestation of girl in Ghazipur
बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद की सजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ढाई वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के करंडा थाना क्षेत्र के 145 दिन पुराने मामले में अभियुक्त अशोक उर्फ बिल्ला को अदालत ने सश्रम उम्रकैद और 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) राकेश कुमार सप्तम की अदालत ने अर्थदंड की राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है। 

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यह है पूरा मामला
एक जुलाई 2024 से नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद जिले की अदालत ने यह बड़ा फैसला सुनाया है। 27 जुलाई को अपराह्न तीन बजे ढाई वर्षीय बालिका अपने घर के बाहर खेल रही थी। परिवार के लोग पड़ोस की दादी के दाह संस्कार में गए थे। उसी दौरान गांव निवासी अशोक सिंह उर्फ बिल्ला आया और बालिका को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। 
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बालिका को गांव की बंसवारी में ले जाकर अशोक ने उसके साथ दुष्कर्म किया। परिजनों से वारदात की जानकारी पाकर करंडा थाने की पुलिस ने दुष्कर्म सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अशोक के खिलाफ पुलिस ने 11 सितंबर को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। आरोप पत्र पर अदालत ने एक अक्तूबर को संज्ञान लिया। सात अक्तूबर को अशोक के खिलाफ आरोप विरचित किया गया। अदालत ने अभियोजन के आठ गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर अशोक को दोषी पाया और सजा सुनाई।

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डीएनए रिपोर्ट अहम साक्ष्य के रूप में उपयोगी साबित हुई

पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने बताया कि प्रभावी तरीके से प्रयास करके अभियुक्त और पीड़िता की डीएनए रिपोर्ट विधि विज्ञान प्रयोगशाला से अल्प अवधि में मंगवाई गई। अभियुक्त और पीड़िता की डीएनए रिपोर्ट मिलान की। अभियुक्त को सजा कराने में डीएनए रिपोर्ट पुष्टिकारक साक्ष्य के रूप में उपयोगी साबित हुई।

परिवार ने आरोपी की जमानत का भी नहीं किया था प्रयास
ढाई वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाला अशोक सिंह बिल्ला (50) मनबढ़ और अपराधी किस्म का रहा। उसके कृत्यों के चलते उसकी पत्नी तथा परिवार उससे घृणा करता है। यही कारण है कि परिजनों ने उसकी जमानत तक का प्रयास नहीं किया। न कभी उससे मिलने जेल गए। बिल्ला तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर है। उसके दो बच्चे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वह करंडा थाने का हिस्ट्रीशीटर भी है। उस पर 23 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें दुष्कर्म, हत्या, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट जैसे-गंभीर अपराध हैं। 

डेढ़ महीने पहले ही जेल से छूटा था दोषी

पुलिस ने अशोक सिंह को एक साल पहले तमंचे के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वह घटना के डेढ़ महीने पहले ही जेल से जमानत पर छूटा था। पुलिस के अनुसार विवेचना में यह भी तथ्य सामने आए थे कि उसके कई ऐसे गुनाह हैं, जिसकी चर्चा गांव के लोग करते हैं। उसका पुलिस रिकॉर्ड में जिक्र नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक वह घटना के तीन दिन पहले ही मुंबई से घूमकर घर आया था। उससे गांव और आसपास के इलाके के लोग खौफ खाते थे। उसके पिता की मौत हो चुकी है, वो आर्मी से रिटायर थे। कुछ माह पहले ही बड़े भाई की बीमारी से मौत हुई थी। वहीं, एक और भाई सफाई कर्मी का काम करता है।

1 अक्तूबर को तय हुआ था आरोप, एक दिन पहले आई डीएनए रिपोर्ट
ढाई साल की मासूम के साथ हुए दुष्कर्म मामले में जल्द फैसले के पीछे पुलिस की सक्रियता भी रही। अल्प समय में आरोप पत्र दाखिल करने वाली पुलिस डीएनए रिपोर्ट मंगाने में भी प्रभावी प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक एक दिन पहले ही इस मामले का डीएनए रिपोर्ट आई। पूरे मामले की मॉनीटरिंग खुद एसपी डॉ. ईरज राजा और एएसपी सिटी ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद कर रहे थे। 

सीओ सदर सुधाकर पांडेय के पर्यवेक्षण में इस मामले की विवेचना की गई। 27 जुलाई को हुई घटना की विवेचना करने के बाद पुलिस ने 11 सितंबर को आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। वहीं, प्रभावी पैरवी के चलते कोर्ट से अभियुक्त के खिलाफ एक अक्तूबर को आरोप तय कर दिया था। सजा के लिए डीएनए रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था। एएसपी सिटी के मुताबिक एसपी के प्रभावी प्रयास से डीएनए रिपोर्ट एक दिन पहले ही आ गया, जिसे कोर्ट के समक्ष पेश किया गया।

तीन दिन ट्रॉमा सेंटर में भर्ती थी बच्ची

ढाई वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म की घटना ने हर किसी को झकझोर दिया था। विशेष लोक अभियोजक रविकांत पांडेय के मुताबिक मामले में आठ गवाहों को पेश किए। पीड़िता की दादी ने बयान दिया था कि वह अभियुक्त से मासूम को दुष्कर्म करते समय किसी तरह से छीन पाई थी। पीड़िता की हालत गंभीर बनी थी। वो तीन दिन तक ट्रॅामा सेंटर में भर्ती थी। 

विशेष लोक अभियोजक के मुताबिक पीड़िता, उसकी दादी, मां- पिता समेत आठ लोगों का बयान कराया गया था। पीड़िता बच्ची की मां ने बयान दिया था कि घर के बाहर उनकी बेटी अपने दादा के पास खेल रही थी। इसी दौरान अवसर पाकर अभियुक्त अशोक सिंह बिल्ला बहला-फुसलाकर बच्ची को गोद में उठा ले गया था। पीड़िता की दादी ने बताया था कि वो घर के पास ही पशुओं को चारा डाल रही थी। 

इसी दौरान बालिका के चीखने की आवाज सुनाई दी तो वह दौड़कर बांस की झाड़ी के पास पहुंची। वहां उन्होंने देखा कि अभियुक्त अशोक सिंह बिल्ला बालिका के साथ दुष्कर्म कर रहा था। वह चिल्लाते हुए आरोपी से किसी तरह छीनकर बालिका को अपने पास ले सकी थीं। शोर सुनकर आसपास से पहुंचे लोग आनन-फानन में बालिका को अस्पताल ले गए थे। जहां हालत नाजुक होने पर पीड़िता को ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। वहां तीन दिनों तक भर्ती थी।
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