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पीड़ितों के भोजन व इलाज की व्यवस्था में जुटा प्रशासन
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प्रभावितों के भोजन और इलाज में जुटा प्रशासन
गाजीपुर। पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश एवं गंगा नदी में पानी छोड़े जाने से नदियों के तेजी से बढ़ रहे जलस्तर से जनपदवासी भयभीत हैं। इससे बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जिला प्रशासन भी तैयारी में जुट गया है। डूब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित के लिए खाद्यान्न पैकेट वितरण की व्यवस्था लगभग पूरी कर ली गई है। इसके लिए ई-टेंडरिंग कर फर्म का चयन करने के साथ ही पीड़ितों तक खाद्यान्न उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था दुरूस्त कर ली गई है। इतना ही नहीं पशु चारे का संकट न हो इसके लिए भूसे की व्यवस्था की गई है। सर्पदंश से बचाव के लिए प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दिया गया है। इतना ही नहीं 1700 मेडिकल किट भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहले से तैयार कर बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी की जा चुकी।
जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य ने बाढ़ की संभावना को देखते हुए जिला व तहसील स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की है। नगर पालिका गाजीपुर सहित सोलह विकास खंडों में बाढ़ केंद्र खोले गए हैं। इतना ही नहीं संकट की घड़ी में कुल 46 बाढ़ राहत शिविर तथा 92 बाढ़ चौकियां भी स्थापित की गई हैं। गंगा सहित अन्य नदियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए कुल 541 नावों की व्यवस्था भी की जा चुकी है। नाविकों के नाम-पता तथा मोबाइल नंबर का सत्यापन कर लिया गया है। जरूरत के हिसाब से इन्हें लगाया जाएगा। जिलाधिकारी ओम प्रकाश आर्य ने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने अधीनस्थ अधिकारियों/ कर्मचारियों के साथ बाढ़ की स्थिति पर पैनी नजर रखें। जिला स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम को भी प्रतिदिन हालात से अवगत कराते रहें। उधर गंगा नदी के साथ ही गोमती, गांगी, मगई, टोंस आदि में जहां बढ़ाव शुरू हो गया है, वहीं भैंसहीं, उदंती, कर्मनाशा और बेसो नदी का जलस्तर अभी सामान्य है। तटवर्ती गांवों में धुकधुकी बढ़ती जा रही है। गंगा किनारे बसे लोग बाढ़ व कटान को लेकर चिंतित हैं।
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गाजीपुर। पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश एवं गंगा नदी में पानी छोड़े जाने से नदियों के तेजी से बढ़ रहे जलस्तर से जनपदवासी भयभीत हैं। इससे बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जिला प्रशासन भी तैयारी में जुट गया है। डूब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित के लिए खाद्यान्न पैकेट वितरण की व्यवस्था लगभग पूरी कर ली गई है। इसके लिए ई-टेंडरिंग कर फर्म का चयन करने के साथ ही पीड़ितों तक खाद्यान्न उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था दुरूस्त कर ली गई है। इतना ही नहीं पशु चारे का संकट न हो इसके लिए भूसे की व्यवस्था की गई है। सर्पदंश से बचाव के लिए प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दिया गया है। इतना ही नहीं 1700 मेडिकल किट भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहले से तैयार कर बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी की जा चुकी।
जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य ने बाढ़ की संभावना को देखते हुए जिला व तहसील स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की है। नगर पालिका गाजीपुर सहित सोलह विकास खंडों में बाढ़ केंद्र खोले गए हैं। इतना ही नहीं संकट की घड़ी में कुल 46 बाढ़ राहत शिविर तथा 92 बाढ़ चौकियां भी स्थापित की गई हैं। गंगा सहित अन्य नदियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए कुल 541 नावों की व्यवस्था भी की जा चुकी है। नाविकों के नाम-पता तथा मोबाइल नंबर का सत्यापन कर लिया गया है। जरूरत के हिसाब से इन्हें लगाया जाएगा। जिलाधिकारी ओम प्रकाश आर्य ने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने अधीनस्थ अधिकारियों/ कर्मचारियों के साथ बाढ़ की स्थिति पर पैनी नजर रखें। जिला स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम को भी प्रतिदिन हालात से अवगत कराते रहें। उधर गंगा नदी के साथ ही गोमती, गांगी, मगई, टोंस आदि में जहां बढ़ाव शुरू हो गया है, वहीं भैंसहीं, उदंती, कर्मनाशा और बेसो नदी का जलस्तर अभी सामान्य है। तटवर्ती गांवों में धुकधुकी बढ़ती जा रही है। गंगा किनारे बसे लोग बाढ़ व कटान को लेकर चिंतित हैं।
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