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ठेकेदार और विभाग की गठजोड़ से सरकार को करोड़ों की क्षति
Ghazipur
Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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जंगीपुर। जिले मेें गेंहू खरीद और उसकी ढुलाई का कार्य इतना धीमा है कि बरसात शुरू होने के बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हो पाएगा। सड़क के किनारे गेंहू लदे ट्रकों से खाद्यान उतारने को लेकर गोदाम प्रभारी भी खेल कर रहे हैं। जिससे ठेकेदाराें को लाखों रुपये डैमेज चार्ज के रूप में ट्रक मालिकों को देना पड़ रहा है। ठेकेदार यह धनराशि कहां से जुटाते हैं इसको लेकर कई सवाल खडे़ हो रहे हैं।
जिले में भंडारण का कार्य एफसीआई के जिम्मे है। देवकठियां में भंडारण कार्य की क्षमता 11 हजार एमटी है। गोदाम में लेबी का 35 हजार कुंतल चावल पड़ा है। इस खाद्यान को आने वाले दिनों में कोटेदारों को दिया जाएगा। गोदाम खाली होने के बाद भी गोदाम प्रभारी गेंहू को उतारने से कतराते हैं। एक ट्रक का गेंहू उतारने में एक सप्ताह से अधिक का समय लग जाता है। यहां पर खाद्यान उतारने के नाम पर करोड़ों का खेल होता है। जिला प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी अपनी आंख बंद किए हुए हैं। कई बार ट्रक मालिकों और मिलरों ने आंदोलन भी किया, लेकिन गोदाम प्रभारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। गोदाम इंचार्ज खाद्यान में जमकर गड़बड़ी कर रहे हैं। ठेकेदारों और मिलरों का कहना है कि हम लोगाें का शोषण किया जा रहा है। समय पर खाद्यान नहीं उतारा जाता है। शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। गोदाम प्रभारी से गोदाम में आने वाले खाद्यान्न के विषय में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कोई स्पष्ट जबाव नहीं दिया। डिप्टी आरएमओ रवींद्र पांडेय ने बताया कि गेंहू को उतारने में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं करने के आदेश दिया गए हैं। उन्होंने बताया कि गड़बड़ी करने की शिकायत मिली तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इनसेट
डैमेज के लाखों रुपये पर सवाल
गाजीपुर। एफसीआई के देकठियां स्थित गोदाम पर एक सप्ताह तक खड़ी रहने वाली ट्रक ों को डैमेज चार्ज संबंधित ठेकेदार मालिकों को देते हैं। यह धनराशि कहां से आती है। इसको लेकर चर्चा का बाजार गरम है। डिप्टी आरएमओ रवींद्र पांडेय से डैमेज चार्ज के संबंध में कहा कि विभाग किसी भी प्रकार का कोई डैमेज चार्ज नहीं देता है। उन्होंने कहा कि परिवहन ठेकेदारों को शासन के निर्देश पर निर्धारित मूल्य ही दिए जाते हैं। जबकि ठेकेदार डैमेज चार्ज दे रहे है। यह भारी भरकम धनराशि कहां से आती है। इसको लेकर कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं है। यह तो तय है कि जिले में खाद्यान्न माफिया एफसीआई को दीमक की तरह से चाट रहे हैं।
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जिले में भंडारण का कार्य एफसीआई के जिम्मे है। देवकठियां में भंडारण कार्य की क्षमता 11 हजार एमटी है। गोदाम में लेबी का 35 हजार कुंतल चावल पड़ा है। इस खाद्यान को आने वाले दिनों में कोटेदारों को दिया जाएगा। गोदाम खाली होने के बाद भी गोदाम प्रभारी गेंहू को उतारने से कतराते हैं। एक ट्रक का गेंहू उतारने में एक सप्ताह से अधिक का समय लग जाता है। यहां पर खाद्यान उतारने के नाम पर करोड़ों का खेल होता है। जिला प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी अपनी आंख बंद किए हुए हैं। कई बार ट्रक मालिकों और मिलरों ने आंदोलन भी किया, लेकिन गोदाम प्रभारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। गोदाम इंचार्ज खाद्यान में जमकर गड़बड़ी कर रहे हैं। ठेकेदारों और मिलरों का कहना है कि हम लोगाें का शोषण किया जा रहा है। समय पर खाद्यान नहीं उतारा जाता है। शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। गोदाम प्रभारी से गोदाम में आने वाले खाद्यान्न के विषय में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कोई स्पष्ट जबाव नहीं दिया। डिप्टी आरएमओ रवींद्र पांडेय ने बताया कि गेंहू को उतारने में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं करने के आदेश दिया गए हैं। उन्होंने बताया कि गड़बड़ी करने की शिकायत मिली तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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डैमेज के लाखों रुपये पर सवाल
गाजीपुर। एफसीआई के देकठियां स्थित गोदाम पर एक सप्ताह तक खड़ी रहने वाली ट्रक ों को डैमेज चार्ज संबंधित ठेकेदार मालिकों को देते हैं। यह धनराशि कहां से आती है। इसको लेकर चर्चा का बाजार गरम है। डिप्टी आरएमओ रवींद्र पांडेय से डैमेज चार्ज के संबंध में कहा कि विभाग किसी भी प्रकार का कोई डैमेज चार्ज नहीं देता है। उन्होंने कहा कि परिवहन ठेकेदारों को शासन के निर्देश पर निर्धारित मूल्य ही दिए जाते हैं। जबकि ठेकेदार डैमेज चार्ज दे रहे है। यह भारी भरकम धनराशि कहां से आती है। इसको लेकर कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं है। यह तो तय है कि जिले में खाद्यान्न माफिया एफसीआई को दीमक की तरह से चाट रहे हैं।
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