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अजय नहीं, मैं आनंद सिंह हूं
Ghazipur
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। आखिरकार बाइक लूट के मामले में जौनपुर में बंद आरोपी अजय और आनंद सिंह को लेकर बना संशय मंगलवार को खत्म हो गया। वारंट बी के तहत जौनपुर पुलिस द्वारा मंगलवार को जब आरोपी अजय को अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन मुहम्मदाबाद की अदालत में पेश किया गया तो उसने माना कि वह अजय नहीं बल्कि आनंद सिंह ही है। कोर्ट में बने रिमांड पत्र पर भी आनंद सिंह के नाम सेे हस्ताक्षर कर उसने इस बात की पुख्ता मुहर भी लगा दी। इसके बाद उसे गाजीपुर जेल में दाखिल कर जौनपुर पुलिस वापस चली गई। अब पुलिस जेल में बंद आरोपी राजू के बारे में तस्दीक कर रही है। धोखाधड़ी के मामले में उसे भी कोर्ट में पेश किया जाना है।
बीते 29 अक्तूबर 2011 को कासिमाबाद थानाक्षेत्र के बेदबिहारी पोखरे पर लूटी गई बाइक के साथ केराकत पुलिस ने दो आरोपियों अजय सिंह तथा राजू सिंह को गिरफ्तार किया था। इसमें अजय सिंह ने अपना पता देवकली थाना मेंहनगर जिला आजमगढ़ लिखाया था। पिछले दिनों मऊ में हुए इनकाउंटर में मारे गए कुख्यात बदमाश धीरज सिंह के बाद जब पुलिस ने फरार मानते हुए उसके भाई आनंद सिंह की खोजबीन शुरू की तो पुलिस को बाइक लूट के मामले में जौनपुर जेल में बंद अजय सिंह पर संदेश हुआ। तफ्तीश बढ़ी तो पता चला कि आरोपी ने जो पता दर्ज कराया है, देवकली मेहनगर में उस नाम और पते का कोई भी व्यक्ति नहीं है। इस पर पुलिस को शक हुआ कि जेल में अजय के नाम से बंद आरोपी आनंद सिंह या फिर कोई और है। इसके लिए कासिमाबाद पुलिस ने वारंट बी की प्रक्रिया पूरी की। इस पर 10 मई तक की तिथि तय की गई थी।
सीओ कासिमाबाद रमेश गुप्ता ने बताया कि जौनपुर में मुकदमा समाप्त होने के बाद मंगलवार को जौनपुर पुलिस ने उसे वारंट बी के तहत मुहम्मदाबाद में अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में पेश किया। सीओ ने बताया कि आरोपी ने माना कि वह अजय नहीं बल्कि आनंद सिंह ही है। पुलिस को चकमा देने और खुद को सुरक्षित रखने के लिए ही उसने ये साजिश रची थी। कासिमाबाद थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में रिमांड बनने पर आरोपी ने आनंद सिंह के नाम से ही कागजात पर हस्ताक्षर भी किया। इसके बाद जौनपुर पुलिस ने उसे गाजीपुर जेल में ही दाखिल कर दिया।
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बीते 29 अक्तूबर 2011 को कासिमाबाद थानाक्षेत्र के बेदबिहारी पोखरे पर लूटी गई बाइक के साथ केराकत पुलिस ने दो आरोपियों अजय सिंह तथा राजू सिंह को गिरफ्तार किया था। इसमें अजय सिंह ने अपना पता देवकली थाना मेंहनगर जिला आजमगढ़ लिखाया था। पिछले दिनों मऊ में हुए इनकाउंटर में मारे गए कुख्यात बदमाश धीरज सिंह के बाद जब पुलिस ने फरार मानते हुए उसके भाई आनंद सिंह की खोजबीन शुरू की तो पुलिस को बाइक लूट के मामले में जौनपुर जेल में बंद अजय सिंह पर संदेश हुआ। तफ्तीश बढ़ी तो पता चला कि आरोपी ने जो पता दर्ज कराया है, देवकली मेहनगर में उस नाम और पते का कोई भी व्यक्ति नहीं है। इस पर पुलिस को शक हुआ कि जेल में अजय के नाम से बंद आरोपी आनंद सिंह या फिर कोई और है। इसके लिए कासिमाबाद पुलिस ने वारंट बी की प्रक्रिया पूरी की। इस पर 10 मई तक की तिथि तय की गई थी।
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सीओ कासिमाबाद रमेश गुप्ता ने बताया कि जौनपुर में मुकदमा समाप्त होने के बाद मंगलवार को जौनपुर पुलिस ने उसे वारंट बी के तहत मुहम्मदाबाद में अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में पेश किया। सीओ ने बताया कि आरोपी ने माना कि वह अजय नहीं बल्कि आनंद सिंह ही है। पुलिस को चकमा देने और खुद को सुरक्षित रखने के लिए ही उसने ये साजिश रची थी। कासिमाबाद थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में रिमांड बनने पर आरोपी ने आनंद सिंह के नाम से ही कागजात पर हस्ताक्षर भी किया। इसके बाद जौनपुर पुलिस ने उसे गाजीपुर जेल में ही दाखिल कर दिया।
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