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छह बीडीओ के भरोसे है जिला
Ghazipur
Updated Wed, 04 Dec 2013 05:43 AM IST
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गाजीपुर। जिले के गांवों के विकास की धुरी खंड विकास अधिकारी को माना जाता है। गांवों के विकास में इन्हीं बीडीओ का अहम रोल होता है। लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ छह बीडीओ के माध्यम से जिले के विकास का खाका खींचा जा रहा है।
जिले में 16 ब्लाकों में विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक ब्लाकों में खंड विकास अधिकारी के पद सृजित किए गए हैं। खंड विकास अधिकारी के माध्यम से ब्लाक के सभी गांवों में विकास का खाका खींचा जाता है। ब्लाक में कल्याणकारी योजनाओं का क्या हाल है। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी बीडीओ की होती है। गांवों के विकास के साथ ही परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर भी बीडीओ के भरोसे है। लेकिन बीडीओ की कमी की वजह से जो बीडीओ हैं वह भी काम के बोझ से परेशान हैं । उन्हें गांवों में स्थलीय निरीक्षण का मौका ही नहीं मिलता है। सिर्फ निरीक्षण की औपचारिकता पूरी करनी पड़ती है। देखा जाए तो बीडीओ भृगुनाथ राम को बाराचंवर के साथ ही बिरनो की भी जिम्मेदारी दी गई है।
इसी तरह दिनेश यादव मरदह और रेवतीपुर, संजय पांडेय सैदपुर और करंडा, पीएन मिश्रा सादात और देवकली, रामराज गौतम भदौरा और जमानियां, लक्ष्मण प्रसाद को जखनियां और मनिहारी का बीडीओ बनाया गया है। एक-एक बीडीओ को दो-दो ब्लाक की जिम्मेदारी दिए जाने से गांवों में होने वाले विकास कार्यों की जांच पड़ताल बेहतर ढंग से नहीं मिल पा रही है।
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सिर्फ ग्राम पंचायत और ग्राम विकास अधिकारियों की रिपोर्ट को ही आधार मानकर कार्रवाई आगे बढ़ा दे रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि सचिव ग्राम प्रधानों से मिलकर सरकारी योजनाओं को चौपट करने में लगे हुए हैं। इस संबंध में सीडीओ रामअवतार का कहना है कि बीडीओ की कमी की जानकारी शासन को दी गई है। शासन ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही बीडीओ की कमी को दूर कर लिया जाएगा।
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जिले में 16 ब्लाकों में विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक ब्लाकों में खंड विकास अधिकारी के पद सृजित किए गए हैं। खंड विकास अधिकारी के माध्यम से ब्लाक के सभी गांवों में विकास का खाका खींचा जाता है। ब्लाक में कल्याणकारी योजनाओं का क्या हाल है। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी बीडीओ की होती है। गांवों के विकास के साथ ही परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर भी बीडीओ के भरोसे है। लेकिन बीडीओ की कमी की वजह से जो बीडीओ हैं वह भी काम के बोझ से परेशान हैं । उन्हें गांवों में स्थलीय निरीक्षण का मौका ही नहीं मिलता है। सिर्फ निरीक्षण की औपचारिकता पूरी करनी पड़ती है। देखा जाए तो बीडीओ भृगुनाथ राम को बाराचंवर के साथ ही बिरनो की भी जिम्मेदारी दी गई है।
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इसी तरह दिनेश यादव मरदह और रेवतीपुर, संजय पांडेय सैदपुर और करंडा, पीएन मिश्रा सादात और देवकली, रामराज गौतम भदौरा और जमानियां, लक्ष्मण प्रसाद को जखनियां और मनिहारी का बीडीओ बनाया गया है। एक-एक बीडीओ को दो-दो ब्लाक की जिम्मेदारी दिए जाने से गांवों में होने वाले विकास कार्यों की जांच पड़ताल बेहतर ढंग से नहीं मिल पा रही है।
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सिर्फ ग्राम पंचायत और ग्राम विकास अधिकारियों की रिपोर्ट को ही आधार मानकर कार्रवाई आगे बढ़ा दे रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि सचिव ग्राम प्रधानों से मिलकर सरकारी योजनाओं को चौपट करने में लगे हुए हैं। इस संबंध में सीडीओ रामअवतार का कहना है कि बीडीओ की कमी की जानकारी शासन को दी गई है। शासन ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही बीडीओ की कमी को दूर कर लिया जाएगा।