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'मृतक' भी लेंगे स्वास्थ्य योजना का लाभ
Ghazipur
Updated Tue, 03 Dec 2013 05:43 AM IST
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गाजीपुर। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना नाजुक दौर से गुजर रही है। स्वास्थ्य विभाग एवं संबंधित बीमा कंपनी की मिलीभगत से सैकड़ों मृत लोगों के नाम पर हेल्थ स्मार्ट कार्ड जारी कर दिए गए हैं। यही नहीं, कई लोग ऐसे भी हैं जिनका नाम बीपीएल सूची में शामिल नहीं है फिर भी उनका हेल्थ स्मार्ट कार्ड बना दिया गया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गरीबों का 30 हजार रुपये तक नि:शुल्क इलाज किया जाता है। इससे पहले बीपीएल सूची में शामिल गरीबाें का हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाया जाता है। जिले में 2002 में बीपीएल सूची बनी थी। इसमें करीब दो लाख 24 हजार 600 लोगों के नाम थे। हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाने के लिए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड इसी सूची का सहारा ले रही है। बीमा कंपनी के एजेंट गांवों में हेल्थ कार्ड बना रहे हैं। देखा जाए तो सरकार की तरफ से जो सूची दी गई है उसमें से कई लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन सूची में उनके नाम हैं, जबकि सरकार ने स्पष्ट कहा है कि मृत लोगों के नाम सूची से हटा दिए जाएं, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो अक्तूबर से अब तक करीब 73 हजार लोगों के हेल्थ स्मार्ट कार्ड बन चुके हैं। इनमें से कई लोग अब जीवित नहीं हैं। यही नहीं, ग्रामीणों के नाम से फर्जी तरीके से हेल्थ स्मार्ट कार्ड जारी करने का भी आरोप लग रहा है पर इन कार्डों का सत्यापन करने वाला कोई नहीं है। सब कुछ रामभरोसे चल रहा है। उदाहरण के तौर पर करंडा ब्लाक के दीनापुर गांव को ही ले लें। यहां के 182 लोगों के नाम बीपीएल सूची में शामिल हैं। इनमें गंगा सिंह, खरपत राम, परदेशी, पाखंडी तथा झगड़ू का निधन हो चुका है। फिर भी उनके नाम से कार्ड जारी कर दिया जा गया है। करंडा ब्लाक के दीनापुर गांव की बीपीएल सूची में तो कई अमीरों के नाम भी शामिल कर लिए गए हैं। इन्हें हेल्थ स्मार्ट कार्ड भी मिलने जा रहा है। इसके साथ ही एक कोटेदार और सरकारी कर्मचारी भी सूची में शामिल किया गया है।
उन्हीं लोगों का हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाया जा रहा है जिनका नाम बीपीएल सूची में है। यह सूची भारत सरकार की तरफ से मिली है। यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो इसकी जानकारी लेकर कार्ड निरस्त किए जाएंगे।
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-कुलदीप सिंह, जिला कोआर्डिनेटर, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड
यह बीमा कंपनी का काम है। उसे ही देखना है कि गलत लोगों का कार्ड न बनने पाए। इसकी जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दी जाएगी।
-डा. अशोक कुमार, नोडल अधिकारी
किसी भी हाल में अपात्रों का हेल्थ स्मार्ट कार्ड नहीं बनने दिया जाएगा। इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। सीएमओ से बीपीएल सूची मंगाकर हेल्थ स्मार्ट कार्ड आवंटन की जांच होगी। यह योजना सिर्फ गरीबों के लिए है।
-चंद्रपाल सिंह, जिलाधिकारी
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गरीबों का 30 हजार रुपये तक नि:शुल्क इलाज किया जाता है। इससे पहले बीपीएल सूची में शामिल गरीबाें का हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाया जाता है। जिले में 2002 में बीपीएल सूची बनी थी। इसमें करीब दो लाख 24 हजार 600 लोगों के नाम थे। हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाने के लिए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड इसी सूची का सहारा ले रही है। बीमा कंपनी के एजेंट गांवों में हेल्थ कार्ड बना रहे हैं। देखा जाए तो सरकार की तरफ से जो सूची दी गई है उसमें से कई लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन सूची में उनके नाम हैं, जबकि सरकार ने स्पष्ट कहा है कि मृत लोगों के नाम सूची से हटा दिए जाएं, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो अक्तूबर से अब तक करीब 73 हजार लोगों के हेल्थ स्मार्ट कार्ड बन चुके हैं। इनमें से कई लोग अब जीवित नहीं हैं। यही नहीं, ग्रामीणों के नाम से फर्जी तरीके से हेल्थ स्मार्ट कार्ड जारी करने का भी आरोप लग रहा है पर इन कार्डों का सत्यापन करने वाला कोई नहीं है। सब कुछ रामभरोसे चल रहा है। उदाहरण के तौर पर करंडा ब्लाक के दीनापुर गांव को ही ले लें। यहां के 182 लोगों के नाम बीपीएल सूची में शामिल हैं। इनमें गंगा सिंह, खरपत राम, परदेशी, पाखंडी तथा झगड़ू का निधन हो चुका है। फिर भी उनके नाम से कार्ड जारी कर दिया जा गया है। करंडा ब्लाक के दीनापुर गांव की बीपीएल सूची में तो कई अमीरों के नाम भी शामिल कर लिए गए हैं। इन्हें हेल्थ स्मार्ट कार्ड भी मिलने जा रहा है। इसके साथ ही एक कोटेदार और सरकारी कर्मचारी भी सूची में शामिल किया गया है।
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उन्हीं लोगों का हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाया जा रहा है जिनका नाम बीपीएल सूची में है। यह सूची भारत सरकार की तरफ से मिली है। यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो इसकी जानकारी लेकर कार्ड निरस्त किए जाएंगे।
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-कुलदीप सिंह, जिला कोआर्डिनेटर, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड
यह बीमा कंपनी का काम है। उसे ही देखना है कि गलत लोगों का कार्ड न बनने पाए। इसकी जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दी जाएगी।
-डा. अशोक कुमार, नोडल अधिकारी
किसी भी हाल में अपात्रों का हेल्थ स्मार्ट कार्ड नहीं बनने दिया जाएगा। इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। सीएमओ से बीपीएल सूची मंगाकर हेल्थ स्मार्ट कार्ड आवंटन की जांच होगी। यह योजना सिर्फ गरीबों के लिए है।
-चंद्रपाल सिंह, जिलाधिकारी