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Ghazipur News: 30 किमी के हाईवे पर 70 स्पीड ब्रेकर बने हैं जान के दुश्मन
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जमानिया। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-24 गाजीपुर से जमानिया होते हुए चंदौली और बिहार को जोड़ता है। अतिक्रमण और अवैध गति अवरोधकों (स्पीड ब्रेकर) की वजह से इन दिनों यह दुर्घटनाओं का केंद्र बनता जा रहा है।
राजमार्ग के दोनों किनारों पर अतिक्रमण और मानकों के विरुद्ध बनाए गए ये ब्रेकर अब तक कई जानलेवा हादसों का कारण बन चुके हैं लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग अब तक केवल दिखावटी उपायों में व्यस्त नजर आ रहा है।
गाजीपुर से जमानिया तक के करीब 30 किलोमीटर के खंड पर 70 से अधिक स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। इसमें से 20 ब्रेकर सिर्फ जमानिया स्टेशन से कस्बे के बीच हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्पीड ब्रेकर बनाना राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के मानकों का उल्लंघन है। नियमानुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग पर केवल रंबल स्ट्रिप्स या अधिकतम दो इंच ऊंचे गति नियंत्रक ही लगाए जा सकते हैं।
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वह भी भूतल परिवहन मंत्रालय की अनुमति से केवल अस्पताल, विद्यालय या धार्मिक स्थलों के पास ही बनाए जा सकते हैं। इन स्पीड ब्रेकरों की न तो कोई चेतावनी पट्टिका है, न रंग-संकेत और ना ही इनकी ऊंचाई तय मानक के अनुरूप है। इससे तेज गति से आ रहे वाहन अचानक ब्रेकर पर असंतुलित होकर हादसे का शिकार हो जाते हैं। वाहन चालकों को रात में काफी परेशानी हाेती है। राजमार्ग के दोनों ओर की 2.5 मीटर चौड़ी सड़क पटरी पूरी तरह अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी है।
दुकानों, ठेलों और पक्के निर्माणों ने इस स्थान पर कब्जा जमा लिया है। यह अतिक्रमण हादसों को न्योता दे रहा है और अब तक कई मासूम एवं बुजुर्गों की जान ले चुका है। करीब 20 वर्ष पहले इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया था। तब से लेकर आज तक एनएच मानकों का पालन नहीं हुआ। न सड़क की चौड़ाई बढ़ी, न ड्रेनेज सिस्टम बना और न ही फुटपाथ जैसी मूलभूत संरचनाएं विकसित की गईं।
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राजमार्ग के दोनों किनारों पर अतिक्रमण और मानकों के विरुद्ध बनाए गए ये ब्रेकर अब तक कई जानलेवा हादसों का कारण बन चुके हैं लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग अब तक केवल दिखावटी उपायों में व्यस्त नजर आ रहा है।
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गाजीपुर से जमानिया तक के करीब 30 किलोमीटर के खंड पर 70 से अधिक स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। इसमें से 20 ब्रेकर सिर्फ जमानिया स्टेशन से कस्बे के बीच हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्पीड ब्रेकर बनाना राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के मानकों का उल्लंघन है। नियमानुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग पर केवल रंबल स्ट्रिप्स या अधिकतम दो इंच ऊंचे गति नियंत्रक ही लगाए जा सकते हैं।
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वह भी भूतल परिवहन मंत्रालय की अनुमति से केवल अस्पताल, विद्यालय या धार्मिक स्थलों के पास ही बनाए जा सकते हैं। इन स्पीड ब्रेकरों की न तो कोई चेतावनी पट्टिका है, न रंग-संकेत और ना ही इनकी ऊंचाई तय मानक के अनुरूप है। इससे तेज गति से आ रहे वाहन अचानक ब्रेकर पर असंतुलित होकर हादसे का शिकार हो जाते हैं। वाहन चालकों को रात में काफी परेशानी हाेती है। राजमार्ग के दोनों ओर की 2.5 मीटर चौड़ी सड़क पटरी पूरी तरह अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी है।
दुकानों, ठेलों और पक्के निर्माणों ने इस स्थान पर कब्जा जमा लिया है। यह अतिक्रमण हादसों को न्योता दे रहा है और अब तक कई मासूम एवं बुजुर्गों की जान ले चुका है। करीब 20 वर्ष पहले इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया था। तब से लेकर आज तक एनएच मानकों का पालन नहीं हुआ। न सड़क की चौड़ाई बढ़ी, न ड्रेनेज सिस्टम बना और न ही फुटपाथ जैसी मूलभूत संरचनाएं विकसित की गईं।