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गाजीपुर के दो आश्रम आध्यात्मिक सर्किट में शामिल
Updated Thu, 11 Oct 2018 11:12 PM IST
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गाजीपुर। प्रदेश सरकार की ओर से बनाए गए आध्यात्मिक सर्किट में गाजीपुर के दो सिद्ध तथा पुरातन आश्रमों को शामिल किया गया है। इसमें पवहारी बाबा आश्रम तथा मौनी बाबा आश्रम चोचकपुर को शामिल किया गया है। सरकार की नजर में आने के बाद अब इन आश्रमों की व्यवस्था सुधरने की उम्मीद जगी है। निर्माण और सुंदरीकरण के लिए बजट का निर्धारण होगा। यह ऐतिहासिक तथा सिद्ध आश्रम मानव उत्थान और परहित को लेकर चलने वाले हैं। सरकार के इस कदम से आश्रम के अनुयायियों में खुशी व्याप्त है। शहर से सटे कुर्था गांव में रामानुज वैष्णव संप्रदाय से जुड़ा पवहारी बाबा का आश्रम करीब 1820 में स्थापित किया गया। यह जाति-पात से हटकर सिर्फ मानव सेवा के लिए काम करता है। पहले यह गंगा नदी के बिल्कुल किनारे बसा था लेकिन बाद में इस आश्रम से गंगा जी दूर हो गईं। स्वामी विवेकानंद आध्यात्मिक बोध के लिए इस आश्रम में आकर बाबा की शरण में तीन महीने तक रहे थे। उन्होंने यहां से कई दिव्य ज्ञान लिए जिसके आधार पर पूरे विश्व में भारत का डंका बजाया। इस आश्रम की कोई शाखा नहीं है। आश्रम में खास कार्यक्रम पवहारी बाबा के परिनिर्वाण दिवस ज्येष्ठ मास की अमावस्या को तथा गुरुपूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाता है। बाबा के बड़े भाई गंगा तिवारी की पांचवीं पीढ़ी इस आश्रम की देखरेख कर रही है। आश्रम दिखने में काफी पुराना है तथा भवन जर्जर हालत में है। इसमें पवहारी बाबा की समाधि के साथ ही भगवान राम जानकी का मंदिर भी है। बाबा इन्ही मूर्तियों की पूजा करते थे। उनके हाथ से लिखा गीता भी यहां भक्तों के दर्शनार्थ रखा गया है। इस आश्रम के सुंदरीकरण की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही थी।
करंडा ब्लॉक के चोचकपुर में गंगा के तट पर स्थित मौनी बाबा का आश्रम करीब 13 सौ वर्ष पुराना है। मनिहारी ब्लॉक के करसाय गांव के गरीब ब्राम्हण के यहां जन्मे एक बालक ने 10 वर्ष में ही गृह त्याग दिया तथा चोचकपुर में गंगा किनारे जंगलों में रहने लगा। आगे चलकर वह मौनी बाबा के नाम से विख्यात हुए। किवदंतियों के अनुसार एक बार मेढ़वा गांव की दूध दही बेचने वाली एक महिला शाम को देर हो जाने से गंगा पार नहीं जा पाई। उसका रुदन सुनकर बाबा ने गंगा के पानी पर पैदल ही चल कर अहिरिनिया माई को उसके गांव पहुंचा दिया। उसके बाद वह बाबा की परम भक्त हो गई। इसी प्रकार एक व्यापारी की भवर में फंसी नाव को भी दिव्य शक्ति से बचा लिया। इस तट पर ऐसी सीढ़ियां है जिसका अंत कभी नहीं दिखता, चाहे गंगा का पानी कितना घट जाये। आज भी इस आश्रम में हजारों अनुयायी श्रद्धा के साथ दर्शन पूजन के लिए आते हैं। आश्रम जीर्ण शीर्ण हो चुका है। इसमें मौनी बाबा की समाधि तथा अहिरिनिया माई की भी समाधि है। मौनी बाबा के परिनिर्वाण दिवस कार्तिक मास की तेरस को तथा गुरु पूर्णिमा के दिन इस आश्रम पर खास कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
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करंडा ब्लॉक के चोचकपुर में गंगा के तट पर स्थित मौनी बाबा का आश्रम करीब 13 सौ वर्ष पुराना है। मनिहारी ब्लॉक के करसाय गांव के गरीब ब्राम्हण के यहां जन्मे एक बालक ने 10 वर्ष में ही गृह त्याग दिया तथा चोचकपुर में गंगा किनारे जंगलों में रहने लगा। आगे चलकर वह मौनी बाबा के नाम से विख्यात हुए। किवदंतियों के अनुसार एक बार मेढ़वा गांव की दूध दही बेचने वाली एक महिला शाम को देर हो जाने से गंगा पार नहीं जा पाई। उसका रुदन सुनकर बाबा ने गंगा के पानी पर पैदल ही चल कर अहिरिनिया माई को उसके गांव पहुंचा दिया। उसके बाद वह बाबा की परम भक्त हो गई। इसी प्रकार एक व्यापारी की भवर में फंसी नाव को भी दिव्य शक्ति से बचा लिया। इस तट पर ऐसी सीढ़ियां है जिसका अंत कभी नहीं दिखता, चाहे गंगा का पानी कितना घट जाये। आज भी इस आश्रम में हजारों अनुयायी श्रद्धा के साथ दर्शन पूजन के लिए आते हैं। आश्रम जीर्ण शीर्ण हो चुका है। इसमें मौनी बाबा की समाधि तथा अहिरिनिया माई की भी समाधि है। मौनी बाबा के परिनिर्वाण दिवस कार्तिक मास की तेरस को तथा गुरु पूर्णिमा के दिन इस आश्रम पर खास कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
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