{"_id":"5b9400ac867a557f6661f063","slug":"51536426156-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा और गोमती का जलस्तर घटा, लेकिन मुसीबतें जस की तस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा और गोमती का जलस्तर घटा, लेकिन मुसीबतें जस की तस
Updated Sat, 08 Sep 2018 10:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। गंगा और गोमती के जलस्तर में निरंतर घटोतरी हो रही है। गंगा जहां एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे घट रही हैं, वहीं गोमती नदी का जलस्तर आधा सेंटीमीटर प्रतिघंटे कम हो रहा है। ताड़ीघाट बारा मार्ग के तटवर्ती गांवों में स्थित नहर और माइनर से होते हुए बाढ़ का पानी पकड़ी, डेढ़गावां के सिवान से होते हुए मार्ग के दोनों तरफ पहुंच गया है। इस कारण रेवतीपुर को जाने वाला पकड़ी डेढ़गावां बाईपास मार्ग भी अभी तक बाढ़ की जद में है। इस मार्ग पर लगभग एक फुट तक पानी लगा हुआ है। लोगों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है।
आलम यह है कि रेवतीपुर हसनपुरा गहमर बाईपास मार्ग नगदीलपुर-हसनपुरा, हसनपुरा-नसीरपुर आदि अन्य प्रमुख मार्गों पर पहले से ही बाढ़ का पानी पसरा हुआ है। इसके जद में आने से आवागमन पूरी तरह से बाधित रहा। गंगा के कहर के चलते बाढ़ से प्रभावित गांवों के सैकड़ों किसानों की लाखों रुपये की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी है। साथ ही सबसे बड़ी समस्या जानवरों के चारे को लेकर है। लोगों ने कहा कि अभी तक प्रभावित गांवों के लोगों को मदद तो नहीं मिली, लेकिन अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का दौरा कर कागजी कोरम जरूर पूरा कर लिया है। प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित गांवों में सरकारी कर्मचारी और अधिकारी तैनात जरूर हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बया कर रही है। उधर, गोमती नदी में आई बाढ़ से कई गांव अब भी प्रभावित हैं। बाढ़ के पानी से घिरे इन गांवों से बाहर निकलना भी लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। गांव के लोगों ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा के चलते स्कूलों में पढ़ने वाले और प्रतियोगी परीक्षाओं आदि की तैयारी में जुटे छात्रों और युवाओं के भविष्य पर भी इसका असर पड़ रहा है। बाढ़ के चलते विद्युत आपूर्ति न होने से उनके बच्चों की तैयारियों पर भी विपरीत असर है। इधर, बाढ़ के कहर के चलते प्रभावित गांवों में नाव आदि की समुचित व्यवस्था न होने से दिन हो या रात मरीजों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, कहा कि बाढ़ के पानी के चलते प्रभावित गांवों में अब संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी खतरा लगातार बना हुआ है। प्रभावित गांव के परिजनों के समक्ष अब दैनिक दिनचर्या की वस्तुएं भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगी है। जिससे उन्हें खुद एवं जानवरों के भरण-पोषण की समस्या दिखाई देने लगी है।
विज्ञापन
आलम यह है कि रेवतीपुर हसनपुरा गहमर बाईपास मार्ग नगदीलपुर-हसनपुरा, हसनपुरा-नसीरपुर आदि अन्य प्रमुख मार्गों पर पहले से ही बाढ़ का पानी पसरा हुआ है। इसके जद में आने से आवागमन पूरी तरह से बाधित रहा। गंगा के कहर के चलते बाढ़ से प्रभावित गांवों के सैकड़ों किसानों की लाखों रुपये की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी है। साथ ही सबसे बड़ी समस्या जानवरों के चारे को लेकर है। लोगों ने कहा कि अभी तक प्रभावित गांवों के लोगों को मदद तो नहीं मिली, लेकिन अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का दौरा कर कागजी कोरम जरूर पूरा कर लिया है। प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित गांवों में सरकारी कर्मचारी और अधिकारी तैनात जरूर हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बया कर रही है। उधर, गोमती नदी में आई बाढ़ से कई गांव अब भी प्रभावित हैं। बाढ़ के पानी से घिरे इन गांवों से बाहर निकलना भी लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। गांव के लोगों ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा के चलते स्कूलों में पढ़ने वाले और प्रतियोगी परीक्षाओं आदि की तैयारी में जुटे छात्रों और युवाओं के भविष्य पर भी इसका असर पड़ रहा है। बाढ़ के चलते विद्युत आपूर्ति न होने से उनके बच्चों की तैयारियों पर भी विपरीत असर है। इधर, बाढ़ के कहर के चलते प्रभावित गांवों में नाव आदि की समुचित व्यवस्था न होने से दिन हो या रात मरीजों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, कहा कि बाढ़ के पानी के चलते प्रभावित गांवों में अब संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी खतरा लगातार बना हुआ है। प्रभावित गांव के परिजनों के समक्ष अब दैनिक दिनचर्या की वस्तुएं भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगी है। जिससे उन्हें खुद एवं जानवरों के भरण-पोषण की समस्या दिखाई देने लगी है।
विज्ञापन