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ब्याज की धनराशि न मिलने लाभार्थी परेशाना
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:11 PM IST
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गाजीपुर। पशुपालन विभाग की ओर से श्वेत क्रांति के तहत तत्कालीन सपा सरकार के शासन में कामधेनु, मिनी कामधेनु और माइक्रो काम धेनु का चयन किया गया था। इन लाभार्थियों द्वारा इस योजना को शुरू करने के लिए बैंकों से ऋण भी लिया गया था। ऋण का 12 प्रतिशत शासन की ओर से लाभार्थियों के खाते में जमा करना था, लेकिन प्रदेश की सत्ता बदलने के साथ ही अब इस योजना पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है। अभी तक शासन की ओर से विभाग द्वारा ब्याज के लिए भेजे गए धनराशि के प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगने से लाभार्थियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
जनपद में श्वेत क्रांति लाने के लिए कामधेनु के 7, मिनी कामधेनु के 20 और माइक्रो के तहत 29 लाभार्थियों का चयन किया गया था। कामधेनु के लिए एक करोड़, मिनी के लिए 50 लाख और माइक्रो लाभार्थियों को 25 लाख रुपये तत्कालीन प्रदेश सरकार की ओर से निर्धारित किए गए थे। लाभार्थियों ने चयन होने के बाद बैंक से ऋण लेकर इस योजना के तहत कार्य शुरू किया इस योजना के तहत लाभार्थियों द्वारा बैंकों से लिए गए ऋण का 12 प्रतिशत ब्याज शासन की ओर से देने के लिए निर्धारित किया गया था। प्रदेश की सत्ता बदलते ही लाभार्थियों के ब्याज की धनराशि विभाग को उपलब्ध नहीं हो रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इसके लिए करीब एक करोड़ 12 लाख का प्रस्ताव भी बनाकर भेज गया है। इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विद्याशंकर तिवारी ने बताया कि कुछ लाभार्थियों के ब्याज की धनराशि शासन से भेजी गई है। प्रस्ताव भी बनाकर भेजा गया है। धनराशि उपलब्ध होते ही ब्याज उनके खाते में भेज दिया जाएगा।
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जनपद में श्वेत क्रांति लाने के लिए कामधेनु के 7, मिनी कामधेनु के 20 और माइक्रो के तहत 29 लाभार्थियों का चयन किया गया था। कामधेनु के लिए एक करोड़, मिनी के लिए 50 लाख और माइक्रो लाभार्थियों को 25 लाख रुपये तत्कालीन प्रदेश सरकार की ओर से निर्धारित किए गए थे। लाभार्थियों ने चयन होने के बाद बैंक से ऋण लेकर इस योजना के तहत कार्य शुरू किया इस योजना के तहत लाभार्थियों द्वारा बैंकों से लिए गए ऋण का 12 प्रतिशत ब्याज शासन की ओर से देने के लिए निर्धारित किया गया था। प्रदेश की सत्ता बदलते ही लाभार्थियों के ब्याज की धनराशि विभाग को उपलब्ध नहीं हो रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इसके लिए करीब एक करोड़ 12 लाख का प्रस्ताव भी बनाकर भेज गया है। इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विद्याशंकर तिवारी ने बताया कि कुछ लाभार्थियों के ब्याज की धनराशि शासन से भेजी गई है। प्रस्ताव भी बनाकर भेजा गया है। धनराशि उपलब्ध होते ही ब्याज उनके खाते में भेज दिया जाएगा।
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