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ठसाठस भरी हैं महानगरों को जाने वाली गाड़ियां
Updated Fri, 16 Nov 2018 10:55 PM IST
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गाजीपुर। दीपावली तथा डाला छठ समाप्त होने के बाद अब लोग अपनी रोजी-रोटी तथा काम धंधे पर लौटने लगे है। इसके चलते ट्रेन, बस तथा निजी सवारी गाड़ियों जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। सभी रूटों से जाने वाली मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों में तिल रखने भर की जगह नहीं है। महानगरों की ओर जाने वाली ट्रेनों के दरवाजों तथा पायदानों पर लटक कर लोग यात्रा कर रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी उन्हें हो रही जो आरक्षण के बाद भी अपने बर्थ तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। आलम यह है कि यात्री परिवार के साथ ट्रेन में चढ़ तक नहीं पा रहे हैं। मजबूरन उन्हें यात्रा निरस्त करनी पड़ रही है।
दूर दराज रोजी-रोटी के लिए नौकरी व धंधा करने वाले लोग दीवाली और डाला छठ मनाने के लिए घर आए थे। त्योहार खत्म होने के बाद अब लोगों के जाने का सिलसिला जारी हो गया है। इसके चलते गुजरात, महाराष्ट्र, आसाम, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों की ओर जाने वाली गाड़ियों में लोगों के बैठने तक की जगह नहीं मिल रही है। जिन लोगों ने पहले से आरक्षण करा लिया है, उन्हें भी अपने बर्थ तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरक्षण बोगियों की दशा भी सामान्य बोगियों जैसी है। पूरी बोगी में आरक्षण बर्थ तथा जमीन पर लोग बैठ कर यात्रा कर रहे है। बाद में अपनी बर्थ पर पहुंचने पर पहले से बैठे लोगों को हटाने को लेकर नोंक झोंक भी हो रही है। गाजीपुर तीन तरफ से रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। इसमें वाराणसी- बलिया, वाराणसी- गोरखपुर, पीपीडीयू- पटना रेल मार्ग है जिस पर छोटे बड़े कुल 32 रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा एकमात्र दिलदारनगर- ताड़ीघाट पैसेंजर चलती है इसके बीच करीब चार स्टेशन पड़ते है। सभी रूटों पर चल रही ट्रेनों में भीड़ की यही हालत बनी हुई है। गाजीपुर सिटी रेलवे स्टेशन से जाने वाली ज्ञान गंगा, स्वतंत्रता सेनानी, सारनाथ, पवन एक्सप्रेस, सुहेलदेव एक्सप्रेस आदि गाड़ियों में यात्रियों की खूब भीड़ देखी गई। इसी प्रकार मऊ रूट पर लोकमान्य तिलक- गोरखपुर काशी एक्सप्रेस, तमसा, चौरीचौरा आदि गाड़ियों में तथा पटना रूट पर फरक्का, श्रमजीवी, दादर, विभूति, पंजाब मेल आदि में ठसाठस भरे लोग यात्रा कर रहे है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि कम से कम एक पखवारे तक भीड़ की यही दशा बनी रहेगी। किसी भी गाड़ी में आरक्षण मिलना संभव नहीं है।
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दूर दराज रोजी-रोटी के लिए नौकरी व धंधा करने वाले लोग दीवाली और डाला छठ मनाने के लिए घर आए थे। त्योहार खत्म होने के बाद अब लोगों के जाने का सिलसिला जारी हो गया है। इसके चलते गुजरात, महाराष्ट्र, आसाम, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों की ओर जाने वाली गाड़ियों में लोगों के बैठने तक की जगह नहीं मिल रही है। जिन लोगों ने पहले से आरक्षण करा लिया है, उन्हें भी अपने बर्थ तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरक्षण बोगियों की दशा भी सामान्य बोगियों जैसी है। पूरी बोगी में आरक्षण बर्थ तथा जमीन पर लोग बैठ कर यात्रा कर रहे है। बाद में अपनी बर्थ पर पहुंचने पर पहले से बैठे लोगों को हटाने को लेकर नोंक झोंक भी हो रही है। गाजीपुर तीन तरफ से रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। इसमें वाराणसी- बलिया, वाराणसी- गोरखपुर, पीपीडीयू- पटना रेल मार्ग है जिस पर छोटे बड़े कुल 32 रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा एकमात्र दिलदारनगर- ताड़ीघाट पैसेंजर चलती है इसके बीच करीब चार स्टेशन पड़ते है। सभी रूटों पर चल रही ट्रेनों में भीड़ की यही हालत बनी हुई है। गाजीपुर सिटी रेलवे स्टेशन से जाने वाली ज्ञान गंगा, स्वतंत्रता सेनानी, सारनाथ, पवन एक्सप्रेस, सुहेलदेव एक्सप्रेस आदि गाड़ियों में यात्रियों की खूब भीड़ देखी गई। इसी प्रकार मऊ रूट पर लोकमान्य तिलक- गोरखपुर काशी एक्सप्रेस, तमसा, चौरीचौरा आदि गाड़ियों में तथा पटना रूट पर फरक्का, श्रमजीवी, दादर, विभूति, पंजाब मेल आदि में ठसाठस भरे लोग यात्रा कर रहे है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि कम से कम एक पखवारे तक भीड़ की यही दशा बनी रहेगी। किसी भी गाड़ी में आरक्षण मिलना संभव नहीं है।
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