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अब पानी की जहाज का नहीं मिलेगा लोकेशन
Updated Sat, 08 Sep 2018 10:32 PM IST
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गाजीपुर। गंगा के जलस्तर में हो रहे घटाव के बाद कई क्षेत्रों में कटान तेज हो गया है। कटान ने कुर्था में लगे शिप के टावर को निगल लिया। इससे पानी में चलने वाली बड़ी जहाज का लोकेशन गाजीपुर क्षेत्र में अब नहीं मिल रहा है। कुर्था गांव में गंगा किनारे तीन बीघा में बनाया गया कैलाशानंदजी का भव्य आश्रम दो दिन के भीतर गंगा में समा गया। साथ ही करीब 15 बीघा से अधिक जमीन गंगा में विलीन हुई है। करंडा, सैदपुर, जमानिया, गाजीपुर और मुहम्मदाबाद क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर कई मकान तथा खेती योग्य सैकड़ों बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। पीड़ितों के कलेजे पर सांप लोट रहा है। प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। जगह-जगह नाराज ग्रामीण कटान रोकने तथा राहत पाने के लिए प्रदर्शन करते रहे, लेकिन उनका दुखड़ा सुनने के लिए शासन प्रशासन का कोई भी प्रतिनिधि आगे नहीं आया।
गाजीपुर के बयेपुर, जैतपुरा, उसरा तथा कुर्था में इन दिनों जबरदस्त कटान हो रहा है। देखते ही देखते जमीन के बड़े-बड़े चप्पे तेज आवाज के साथ गंगा में समा जा रहे हैं। गांवों से काफी दूरी पर बह रही गंगा जैसे गांवों में ही घुस जाना चाहती है। कुर्था गांव में गंगा किनारे तीन बीघा में बनाया गया कैलाशानंदजी का भव्य आश्रम दो दिन के भीतर गंगा में समा गया। यह पूरे गांव के आस्था का केंद्र था। इसके साथ आश्रम का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। यहीं पर पानी के जहाजों का लोकेशन और संकेतक के लिए एक बड़ा सा टावर स्थापित था। शानिवार की सुबह करीब आठ बजे वह भी गंगा में समाहित हो गया। दोपहर दो बजे तक उसका मामूली भाग ही दिखाई दे रहा था। इस टावर की देख रेख के लिए एक कर्मचारी रामायन साहनी तैनात था। गांव के भानू प्रताप सिंह ने बताया कि आश्रम के साथ ही इस क्षेत्र की करीब 15 बीघा से अधिक जमीन गंगा में विलीन हुई है। इसी प्रकार आसपास के तटवर्ती जैतपुरा, बयेपुर, उसरा आदि में भी भयंकर कटान बना हुआ है। अन्य ग्रामीणों की माने तो काफी समय पहले गंगा पावहारी बाबा आश्रम के पास से ही हो कर बहती थी। बाद में उन्होंने स्थान छोड़ दिया और दूर हो गई। ंअबघ वह फिर अपने पुराने स्थान को ग्रहण कर रही है।
करंडा संवाददाता के अनुसार गंगा की वजह से रफीपुर, बड़हरिया में तो कटान कीा क्रम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दो तीन दिन में करीब 10 बिगहा जमीन गंगा में विलीन हुआ है। इधर सोकनी गांव में भी किनारे पर कटान शुरू हो गया है। जमानिया संवाददाता के अनुसार गंगा की वजह से किनारें के कई गांवों के आस पास कटान हो रीहा है। रोजाना थोड़ी बहुत जमीन गंगा में विलीन हो रही है। मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार बच्छल का पुरा तथा सेमरा गांव के लोगों को कटान का भय हमेशा सताता रहता है। बच्छल का पुरा सेमरा के बीच इन दिनों रोजाना कटान हो रहा है। गंगा के बढ़ने और घटने दोनों समय ही कटान तेज हो जाता है। इससे बचने के लिए ग्रामीण शुरु मसे ही कोशिश करते रहे लेकिन शासन प्रशासन की उदासीनता के कारण उनकी एक न चली। आज कटान के समय ग्रामीणों की जमीन जब गंगा में समा रही है इतो उनके उपर क्या गुजरती होगी, इसका अंदाजा आसानी से नहीं लगाया जा सकता।
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गाजीपुर के बयेपुर, जैतपुरा, उसरा तथा कुर्था में इन दिनों जबरदस्त कटान हो रहा है। देखते ही देखते जमीन के बड़े-बड़े चप्पे तेज आवाज के साथ गंगा में समा जा रहे हैं। गांवों से काफी दूरी पर बह रही गंगा जैसे गांवों में ही घुस जाना चाहती है। कुर्था गांव में गंगा किनारे तीन बीघा में बनाया गया कैलाशानंदजी का भव्य आश्रम दो दिन के भीतर गंगा में समा गया। यह पूरे गांव के आस्था का केंद्र था। इसके साथ आश्रम का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। यहीं पर पानी के जहाजों का लोकेशन और संकेतक के लिए एक बड़ा सा टावर स्थापित था। शानिवार की सुबह करीब आठ बजे वह भी गंगा में समाहित हो गया। दोपहर दो बजे तक उसका मामूली भाग ही दिखाई दे रहा था। इस टावर की देख रेख के लिए एक कर्मचारी रामायन साहनी तैनात था। गांव के भानू प्रताप सिंह ने बताया कि आश्रम के साथ ही इस क्षेत्र की करीब 15 बीघा से अधिक जमीन गंगा में विलीन हुई है। इसी प्रकार आसपास के तटवर्ती जैतपुरा, बयेपुर, उसरा आदि में भी भयंकर कटान बना हुआ है। अन्य ग्रामीणों की माने तो काफी समय पहले गंगा पावहारी बाबा आश्रम के पास से ही हो कर बहती थी। बाद में उन्होंने स्थान छोड़ दिया और दूर हो गई। ंअबघ वह फिर अपने पुराने स्थान को ग्रहण कर रही है।
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करंडा संवाददाता के अनुसार गंगा की वजह से रफीपुर, बड़हरिया में तो कटान कीा क्रम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दो तीन दिन में करीब 10 बिगहा जमीन गंगा में विलीन हुआ है। इधर सोकनी गांव में भी किनारे पर कटान शुरू हो गया है। जमानिया संवाददाता के अनुसार गंगा की वजह से किनारें के कई गांवों के आस पास कटान हो रीहा है। रोजाना थोड़ी बहुत जमीन गंगा में विलीन हो रही है। मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार बच्छल का पुरा तथा सेमरा गांव के लोगों को कटान का भय हमेशा सताता रहता है। बच्छल का पुरा सेमरा के बीच इन दिनों रोजाना कटान हो रहा है। गंगा के बढ़ने और घटने दोनों समय ही कटान तेज हो जाता है। इससे बचने के लिए ग्रामीण शुरु मसे ही कोशिश करते रहे लेकिन शासन प्रशासन की उदासीनता के कारण उनकी एक न चली। आज कटान के समय ग्रामीणों की जमीन जब गंगा में समा रही है इतो उनके उपर क्या गुजरती होगी, इसका अंदाजा आसानी से नहीं लगाया जा सकता।
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