मुहम्मदाबाद। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर सीएचसी, पीएचसी और न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों के न पहुंचने से लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोगी और तीमारदार मजबूरन निजी चिकित्सक के यहां ठगी के शिकार हो रहे हैं। मुहम्मदाबाद तहसील मुख्यालय एवं भांवरकोल विकास खंड के गोड़उर गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा दर्जनों गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की तैनाती भी की गई है, लेकिन सीएचसी मुहम्मदाबाद को छोड़ कर अन्य सरकारी चिकित्सालयों में तैनात डाक्टर ड्यूटी पर नहीं आते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात फार्मासिस्ट लैब सहायक या अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से इलाज करा कर लौटना पड़ता है। इसके चलते गंभीर बीमारियों के लिए मरीज जिला चिकित्सालय, मऊ, बलिया, वाराणसी जाकर प्राइवेट चिकित्सकों से इलाज कराने के लिए बाध्य हो रहे हैं। सीएचसी मुहम्मदाबाद में विशेषज्ञ डाक्टरों की पोस्टिंग नहीं की गई है। इसके चलते करोड़ों की लागत से बना यह हास्पिटल छोटी बीमारियों के इलाज का केंद्र एवं जच्चा-बच्चा केंद्र बन कर रह गया है। हास्पिटल में सर्जन न होने से छोटी सर्जरी के लिए भी मरीजों को जान जोखिम में डाल कर नीम हकीम के पास जाना पड़ता है। इसके अलावा बालापुर, राजापुर, भांवरकोल, शेरपुर, वीरपुर, करमचंदपुर आदि गांवों में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रभारी चिकित्साधिकारियों की तैनाती की गई है। इनमें बालापुर हास्पिटल में चिकित्सक सप्ताह में दो दिन पहुंचते हैं वहीं भांवरकोल में तैनात चिकित्सक न तो भांवरकोल में और न ही शेरपुर में जाते हैं। राजापुर एवं वीरपुर में तैनात चिकित्सक तो हास्पिटल में बिल्कुल नहीं आते हैं। ग्रामीणों द्वारा इनकी शिकायत उच्चाधिकारियों से किए जाने पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी सब कुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का ध्यान इस समस्या की तरफ आकृष्ट कराते हुए ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात चिकित्सकों को चिकित्सालय में उपस्थित होने के लिए कड़ा निर्देश देने एवं अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की मांग की है। इस संबंध में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरके सिन्हा ने कहा कि चिकित्सकों के गायब रहने की शिकायत नहीं मिली है। इसके लिए निरंतर छापेमारी और जांच की कार्रवाई चल रही है, जो भी अनुपस्थित पाया जाएगा, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी।