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आठ बिस्वा भूमि कटकर गंगा में समाई
Updated Sun, 13 Aug 2017 11:48 PM IST
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करंडा (गाजीपुर)। रफीपुर में कटान का क्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार तीसरे दिन रविवार को भी विभिन्न किसानों की आठ बिस्वा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई। कटान का सिलसिला न थमने से पीड़ितों के माथे पर इस बात से बल पड़ने लगा है कि अगर इसी तरह से कटान की रफ्तार जारी रही तो भारी मात्रा में उनकी भूमि गंगा में समाहित हो जाएगी।
पिछले कई दिनों से बड़हरिया, सोकनी और रफीपुर में कटान का सिलसिला जारी था लेकिन तीन दिनों से सिर्फ रफीपुर में गंगा कटान हो रहा है। शनिवार की सुबह की तरह रविवार की सुबह भी करीब आठ बजे से कटान का क्रम शुरु हो गया, जो करीब एक घंटा तक जारी रहा। इस दौरान किसानों के आंखों के सामने ही आठ बिस्वा कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में समा गई। जिन लोगों की भूमि कटी, उनमें दीनापुर के किसान नर्वदेश्वर यादव, रामअवतार सिंह, कृष्णा सिंह, राधेश्याम सिंह, रामदेव सिंह, धनंजय सिंह, रामा सिंह, गोपाल सिंह, उमाशंकर सिंह, नरेंद्र यादव और नौदर के किसान रामपूजन सिंह, शिवपूजन सिंह, दिनेश सिंह, सीरी सिंह, प्रवोध सिंह, देवमुनी सिंह तथा बड़हरिया के बलेश्वर यादव, श्रीनाथ यादव, प्रभु यादव बलदेव यादव, बसई यादव, गोरख यादव, शिवदान, राजदेव, इंद्रदेव यादव और देवमुनी सिंह शामिल हैं। लगातार तीसरे दिन भी कटान जारी रहने से इन किसानों के माथे पर बल पड़ने लगा है। वे इस बात से चिंतित हैं कि अगर इसी तरह से कटान होता है तो बड़ी मात्रा में उनकी कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में समाहित हो जाएगी। लोगों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन की तरफ से कटान रोकने का कोई उपाय नहीं किया जा रहा है, जिसका खामियाजा किसानों को भूमि को गंवाकर भुगतना पड़ रहा है। कटान रोकने के नाम पर सिर्फ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से कटान का निरीक्षण किया जा रहा है।
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पिछले कई दिनों से बड़हरिया, सोकनी और रफीपुर में कटान का सिलसिला जारी था लेकिन तीन दिनों से सिर्फ रफीपुर में गंगा कटान हो रहा है। शनिवार की सुबह की तरह रविवार की सुबह भी करीब आठ बजे से कटान का क्रम शुरु हो गया, जो करीब एक घंटा तक जारी रहा। इस दौरान किसानों के आंखों के सामने ही आठ बिस्वा कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में समा गई। जिन लोगों की भूमि कटी, उनमें दीनापुर के किसान नर्वदेश्वर यादव, रामअवतार सिंह, कृष्णा सिंह, राधेश्याम सिंह, रामदेव सिंह, धनंजय सिंह, रामा सिंह, गोपाल सिंह, उमाशंकर सिंह, नरेंद्र यादव और नौदर के किसान रामपूजन सिंह, शिवपूजन सिंह, दिनेश सिंह, सीरी सिंह, प्रवोध सिंह, देवमुनी सिंह तथा बड़हरिया के बलेश्वर यादव, श्रीनाथ यादव, प्रभु यादव बलदेव यादव, बसई यादव, गोरख यादव, शिवदान, राजदेव, इंद्रदेव यादव और देवमुनी सिंह शामिल हैं। लगातार तीसरे दिन भी कटान जारी रहने से इन किसानों के माथे पर बल पड़ने लगा है। वे इस बात से चिंतित हैं कि अगर इसी तरह से कटान होता है तो बड़ी मात्रा में उनकी कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में समाहित हो जाएगी। लोगों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन की तरफ से कटान रोकने का कोई उपाय नहीं किया जा रहा है, जिसका खामियाजा किसानों को भूमि को गंवाकर भुगतना पड़ रहा है। कटान रोकने के नाम पर सिर्फ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से कटान का निरीक्षण किया जा रहा है।
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